प्रत्यक्ष निर्धारण या वसूली का वर्जित न होना
घ–प्रतिनिधि निर्धारिती -- प्रकीर्ण उपबंध
प्रत्यक्ष निर्धारण या वसूली का वर्जित न होना
31166. इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं की कोर्इ बात न तो उस व्यक्ति के, जिसकी ओर से या जिसके फायदे के लिए इसमें निर्दिष्ट आय प्राप्य है, प्रत्यक्ष निर्धारण और न ही ऐसे व्यक्ति से ऐसी आय की बाबत संदेय कर की वसूली से निवारित करेगी।
31. पत्र [फा. सं. 45/78/66 आर्इटीजे (5)], तारीख 24.2.1967 भी देखिए। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

