जहां हिताधिकारियों का अंश अज्ञात हो वहां कर का प्रभारण
जहां हिताधिकारियों का अंश अज्ञात हो वहां कर का प्रभारण
164. (1) उपधारा (2) और (3) के उपबंधों के अंतर्गत रहते हुए जहां कोर्इ ऐसी आय, जिसकी बाबत धारा 160 की उपधारा (1) के खंड (iii) और (iv)में वर्णित व्यक्ति प्रतिनिधि निर्धारितियों के रूप में दायी हैं, या उसका कोर्इ भी भाग किसी एक व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए विनिर्दिष्टत: प्राप्य नहीं है, या जहां उन व्यक्तियों के, जिनकी ओर से या जिनके फायदे के लिए ऐसी आय या उसका भाग प्राप्य है, अलग-अलग अंश अनवधारित या अज्ञात हैं (ऐसी आय, आय के भाग और ऐसे व्यक्तियों को इसके पश्चात् इस धारा में क्रमश: ''सुसंगत आय'', ''सुसंगत आय का भाग'' और ''हिताधिकारी'' कहा गया है), वहां कर सुसंगत आय या सुसंगत आय के भाग पर अधिकतम मार्जिनल दर से प्रभारित किया जाएगा:
परन्तु ऐसी दशा में जहां–
(i) हिताधिकारियों में से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य ऐसी कोर्इ अन्य आय नहीं है जो उस अधिकतम रकम से अधिक हो जो व्यक्तियों के संगम की दशा में कर से प्रभार्य नहीं है या हिताधिकारियों में से कोर्इ किसी अन्य न्यास के अधीन हिताधिकारी नहीं है; या
(ii) सुसंगत आय या सुसंगत आय का भाग किसी व्यक्ति द्वारा विल द्वारा घोषित न्यास के अंतर्गत प्रभार्य है और ऐसा न्यास उसके द्वारा घोषित एकमात्र न्यास है; या
(iii) सुसंगत आय या सुसंगत आय का भाग ऐसे न्यास के अंतर्गत प्राप्य है जो किसी गैरवसीयती लिखत द्वारा 1 मार्च, 1970 के पूर्व सृष्ट हुआ और सुसंगत समय पर विद्यमान सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो गया है कि न्यास का सृजन सद्भाविकत: अनन्यत: व्यवस्थापक के नातेदारों के फायदे के लिए, या जहां व्यवस्थापक हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, वहां अनन्यत: उस कुटुम्ब के सदस्यों के फायदे के लिए उन परिस्थितियों में सृष्ट किया गया जब से नातेदार या सदस्य अपने पोषण और भरण-पोषण के लिए मुख्यत: व्यवस्थापक पर आश्रित थे; या
(iv) सुसंगत आय कोर्इ कारबार अथवा वृति करने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे कारबार अथवा वृति में नियोजित व्यक्तियों के अनन्यत: फायदे के लिए सद्भाविकत: सृष्ट किसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, उपदान निधि, पेंशन निधि या किसी अन्य निधि की ओर से न्यासियों द्वारा प्राप्य है,
वहां कर सुसंगत आय या सुसंगत आय के भाग पर इस प्रकार प्रभारित किया जाएगा मानो वह व्यक्तियों के किसी संगम की कुल आय हो :
परन्तु यह और कि जहां कोर्इ आय, जिसकी बाबत धारा 160 की उपधारा (1) के खंड (iv) में उल्लिखित व्यक्ति, प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में दायी है, कारबार के लाभ और अभिलाभ से मिलकर बनती है या जिसमें कारबार के लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां पूर्ववर्ती परन्तुक तभी लागू होगा जब ऐसे लाभ और अभिलाभ किसी व्यक्ति द्वारा उसके पोषण और भरण-पोषण के लिए आश्रित किसी नातेदार के अनन्यत: फायदे के लिए विल द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा घोषित न्यास के अंतर्गत प्राप्य है और ऐसा न्यास उसके द्वारा इस प्रकार घोषित एकमात्र न्यास है।
(2) उस सुसंगत आय की दशा में, जो ऐसी संपत्ति से प्राप्त होती है जो संपूर्णत: पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए न्यास के अधीन धारित है, या जो धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (iiक) में निर्दिष्ट प्रकृति की है या जो धारा 11 की उपधारा (4क) में निर्दिष्ट प्रकृति की है, कर सुसंगत आय के उस भाग पर जो धारा 11 या धारा 12 के अधीन छूट प्राप्त नहीं है उस प्रकार प्रभारित किया जाएगा मानो सुसंगत आय, जो ऐसे छूट प्राप्त नहीं है, व्यक्तियों के किसी संगम की आय हो:
परन्तु उस दशा में जहां धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ग) या खंड (घ) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के कारण धारा 11 या धारा 12 के अंतर्गत ऐसी सम्पूर्ण सुसंगत आय या उसका कोर्इ भाग छूट प्राप्त नहीं है, वहां सुसंगत आय पर या सुसंगत आय के भाग पर कर अधिकतम मार्जिनल दर से प्रभारित किया जाएगा।
(3) ऐसी दशा में जहां सुसंगत आय ऐसी सम्पत्ति से प्राप्त होती है जो केवल भागत: पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए न्यास के अधीन धारित है या जो धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (iiक) में निर्दिष्ट प्रकृति की है या जो धारा 11 की उपधारा (4क) में निर्दिष्ट प्रकृति की है और पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोज्य सुसंगत आय (या उसका कोर्इ भाग) किसी एक व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए विनिर्दिष्टत: प्राप्य नहीं है या इस प्रकार उपयोज्य आय में हिताधिकारियों के अलग-अलग अंश अनवधारित या अज्ञात हैं, वहां सुसंगत आय पर प्रभार्य कर निम्नलिखित का योग होगा–
(क) वह कर जो सुसंगत आय के उस भाग पर (उसमें से वह आय, यदि कोर्इ हो, घटाकर जो धारा 11 के अंतर्गत छूट प्राप्त है) जो पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोज्य है, ऐसे प्रभार्य होगा मानो वह भाग (या इस प्रकार घटाकर आया भाग) व्यक्तियों के किसी संगम की कुल आय होती; और
(ख) सुसंगत आय के उस भाग पर, जो पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोज्य है और जो या तो किसी एक व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए विनिर्दिष्टत: प्राप्य नहीं है या जिसकी बाबत हिताधिकारियों के अंश अनवधारित या अज्ञात हैं, अधिकतम मार्जिनल दर से कर:
परन्तु ऐसी दशा में जहां–
(i) सुसंगत आय के उस भाग के, जो पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोज्य नहीं है, हिताधिकारियों में से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य ऐसी अन्य आय नहीं है जो उस अधिकतम रकम से अधिक हो जो व्यक्तियों के संगम की दशा में कर से प्रभार्य नहीं है या किसी अन्य न्यास के अंतर्गत हिताधिकारी नहीं है; या
(ii) सुसंगत आय किसी व्यक्ति द्वारा विल द्वारा घोषित न्यास के अंतर्गत प्राप्य है और ऐसा न्यास उसके द्वारा घोषित एकमात्र न्यास है; या
(iii) सुसंगत आय ऐसे न्यास के अंतर्गत प्राप्य है जो किसी गैर वसीयती लिखत द्वारा 1 मार्च, 1970 के पूर्व सृष्ट किया गया, और, सुसंगत समय पर विद्यमान सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारण अधिकारी का समाधान हो गया है कि न्यास का सृजन, जहां तक न्यास पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए नहीं है, वहां तक सद्भाविकत: अनन्यत: व्यवस्थापक के नातेदारों के फायदे के लिए या जहां व्यवस्थापक हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है वहां अनन्यत: उस कुटुम्ब के सदस्यों के फायदे के लिए, उन परिस्थितियों में सृष्ट किया गया जब वे नातेदार या सदस्य अपने पोषण और भरण-पोषण के लिए मुख्यत: व्यवस्थापक पर आश्रित हैं,
वह कर सुसंगत आय पर इस प्रकार प्रभारित किया जाएगा मानो सुसंगत आय (उससे वह आय यदि कोर्इ हो, घटाकर जो धारा 11 के अधीन छूट प्राप्त है) व्यक्तियों के किसी संगम की कुल आय हो :
परन्तु यह और कि जहां सुसंगत आय कारबार के लाभ और अभिलाभ से मिलकर बनती है या जिसमें कारबार के लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां पूर्ववर्ती परन्तुक तभी लागू होगा जब ऐसी आय किसी व्यक्ति द्वारा उस पर पोषण और भरण-पोषण के लिए आश्रित किसी नातेदार के एकमात्र फायदे के लिए विल द्वारा घोषित न्यास के अंतर्गत प्राप्य है और ऐसा न्यास उसके द्वारा इस प्रकार घोषित एकमात्र न्यास है :
परन्तु यह भी कि उस दशा में जहां धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ग)या खंड (घ)में अंतर्विष्ट उपबंधों के कारण धारा 11 या धारा 12 के अधीन ऐसी सम्पूर्ण सुसंगत आय या उसका कोर्इ भाग छूट प्राप्त नहीं ंहै, वहां सुसंगत आय पर या सुसंगत आय के भाग पर कर अधिकतम मार्जिनल दर से प्रभारित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(i) ऐसी आय जिसकी बाबत धारा 160 की उपधारा (1) के खंड (iii) और खंड (iv) में वर्णित व्यक्ति प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में दायी हैं या उसके किसी भाग की बाबत यह समझा जाएगा कि वह एक व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए विनिर्दिष्टत: प्राप्त नहीं है, जब तक वह व्यक्ति जिसकी ओर से या जिसके फायदे के लिए ऐसी आय या उसका ऐसा भाग पूर्ववर्ष के दौरान प्राप्य है, न्यायालय के आदेश या न्यास लिखत या वक्फ विलेख में, जो भी हो, अभिव्यक्त रूप से लिखा है और ऐसे आदेश, लिखत या विलेख की तारीख को उस रूप में पहचाना जा सकता है;
(ii) ऐसे व्यक्तियों के जिनकी ओर से या जिसके फायदे के लिए ऐसी आय का उसका ऐसा भाग प्राप्त किया जाता है, अलग-अलग अंश अनवधारित या अज्ञात समझे जाएंगे जब तक कि उन व्यक्तियों के अलग-अलग अंश जिनके फायदे के लिए ऐसी आय या उसका ऐसा भाग प्राप्य है, न्यायालय के आदेश या न्यास लिखत या वक्फ विलेख में, जो भी हो, अभिव्यक्त रूप से नहीं लिखा है और ऐसे आदेश लिखत या विलेख की तारीख को उस रूप में अभिनिश्चित नहीं किए जा सकते हैं।
स्पष्टीकरण 2.–प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

