अभिकर्ता कौन समझे जा सकेंगे
ग.–प्रतिनिधि निर्धारिती–विशेष मामले
अभिकर्ता कौन समझे जा सकेंगे99
163. (1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, अनिवासी के संबंध में "अभिकर्ता" के अंतर्गत भारत में कोर्इ ऐसा व्यक्ति सम्मिलित है :–
(क) जो अनिवासी के द्वारा या उसकी ओर से नियोजित है; या
(ख) जो अनिवासी के साथ कोर्इ कारबार संबंध रखता है; या
(ग) जिससे या जिसके द्वारा अनिवासी चाहे प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से कोर्इ आय प्राप्त करता है; या
(घ) जो अनिवासी का न्यासी है,
और उसके अंतर्गत कोर्इ ऐसा अन्य व्यक्ति भी सम्मिलित है जिसने चाहे वह निवासी हो या अनिवासी, भारत में पूंजी आस्ति, अंतरण के माध्यम से अर्जित की है :
परन्तु भारत में कोर्इ ऐसा दलाल, जो किन्हीं संव्यवहारों की बाबत, अनिवासी प्रधान के साथ या उसकी ओर से प्रत्यक्ष रूप से संव्यवहार नहीं करता है किंतु अनिवासी दलाल के साथ या उसके माध्यम से संव्यवहार करता है ऐसे संव्यवहारों की बाबत इस धारा के अंतर्गत अभिकर्ता नहीं समझा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :–
(i) संव्यवहार, कारबार के मामूली अनुक्रम में प्रथम वर्णित दलाल के माध्यम से किए जाते हैं; और
(ii) अनिवासी दलाल ऐसे संव्यवहार अपने कारबार के मामूली अनुक्रम में कर रहा है न कि प्रधान के रूप में।
(2) कोर्इ व्यक्ति अनिवासी का अभिकर्ता तब तक नहीं माना जाएगा जब तक कि उसको इस प्रकार माने जाने के उसके दायित्व के बारे में 1[निर्धारण] अधिकारी द्वारा सुने जाने का अवसर न मिल चुका हो।
99. तारीख 11.7.1995 का परिपत्र सं. 707 देखिए। सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

