प्रतिनिधि निर्धारिती
ख–प्रतिनिधि निर्धारिती – साधारण उपबंध
प्रतिनिधि निर्धारिती90
160. (1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ''प्रतिनिधि निर्धारिती'' से अभिप्रेत है–
(i) धारा 9 की उपधारा (1) 91[* * *] में विनिर्दिष्ट अनिवासी की आय की बाबत, अनिवासी का अभिकर्ता, जिसके अंतर्गत वह व्यक्ति भी सम्मिलित है जो धारा 163 के अधीन अभिकर्ता के रूप में माना जाता है;
(ii) अवयस्क, पागल या जड़ की आय की बाबत वह संरक्षक या प्रबंधक जो ऐसे अवयस्क पागल या जड़ की ओर से ऐसी आय प्राप्त करने का हकदार है या प्राप्त करता है;
(iii) ऐसी आय की बाबत जिसे प्रतिपाल्य अधिकरण, महाप्रशासक, शासकीय, न्यासी या कोर्इ रिसीवर या प्रबंधक (जिसके अंतर्गत किसी भी पदाभिदान वाला कोर्इ ऐसा व्यक्ति भी सम्मिलित है जो किसी अन्य की ओर से संपत्ति का वास्तव में प्रबंध करता है) जो किसी न्यायालय के किसी आदेश के द्वारा या अधीन नियुक्त है, किसी व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए प्राप्त करता है या प्राप्त करने का हकदार है ऐसा प्रतिपाल्य अधिकरण, महाप्रशासक, शासकीय न्यासी, रिसीवर या प्रबंधक;
(iv) ऐसी आय की बाबत जिसे सम्यक् रूप से निष्पादित लिखित लिखत द्वारा घोषित न्यास के अधीन चाहे वह वसीयती हो या अन्यथा [जिसके अंतर्गत कोर्इ ऐसा वक्फ92 विलेख भी है जो मुसलमान वक्फ विधिमान्यकरण अधिनियम, 1913 (1913 का 6) के अधीन विधिमान्य है] नियुक्त न्यासी92 किसी व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए प्राप्त करता है या प्राप्त करने का हकदार है ऐसा या ऐसे न्यासी;
93[(v) ऐसी आय की बाबत जो किसी मौखिक न्यास के अधीन नियुक्त न्यासी किसी व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए प्राप्त करता है या प्राप्त करने का हकदार है, ऐसा या ऐसे न्यासी।
स्पष्टीकरण 1.–किसी न्यास को, जो सम्यक् रूप से निष्पादित लिखित लिखत द्वारा घोषित नहीं किया गया है [जिसके अंतर्गत कोर्इ ऐसा वक्फ विलेख भी है जो मुसलमान वक्फ विधिमान्यकरण अधिनियम, 1913 (1913 का 6) के अधीन विधिमान्य है], खंड (iv) के प्रयोजनों के लिए सम्यक्त: निष्पादित लिखित लिखत द्वारा घोषित न्यास समझा जाएगा यदि न्यासी या न्यासियों द्वारा हस्ताक्षरित एक लिखित कथन, जिसमें न्यास के प्रयोजन या प्रयोजनों का उल्लेख हो जिसमें न्यासी या न्यासियों के हिताधिकारी या हिताधिकारियों की और न्यास संपत्ति की विशिष्टियां दी गर्इ हों, 94[निर्धारण] अधिकारी को भेजा जाता है,–
(i) जहां न्यास 1 जून, 1981 से पहले घोषित किया गया है, वहां उस तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर; और
(ii) किसी अन्य दशा में, न्यास की घोषणा की तारीख से तीन मास के भीतर।
स्पष्टीकरण 2.–खंड (v) के प्रयोजनों के लिए ''मौखिक न्यास'' से ऐसा न्यास अभिप्रेत है जो सम्यक्त: निष्पादित लिखित लिखत द्वारा घोषित नहीं है [जिसके अंतर्गत कोर्इ ऐसा वक्फ विलेख भी सम्मिलित है जो मुसलमान वक्फ विधिमान्यकरण अधिनियम, 1913 (1913 का 6) के अधीन विधिमान्य है] और जो स्पष्टीकरण 1 के अधीन सम्यक्त: निष्पादित लिखित लिखत द्वारा घोषित न्यास नहीं समझा जाता है।]
(2) प्रत्येक प्रतिनिधि निर्धारिती, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती समझा जाएगा।
90. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
91. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से "के खंड (i)" का लोप किया गया।
92. ''न्यासी'' और ''वक्फ'' पदों के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
93. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1981 से अंत:स्थापित।
94. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

