समूह निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा
समूह निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा
158खड़. (1) धारा 158खग के अधीन आदेश–
(क) उस मास के अंत से एक वर्ष के भीतर प्राप्ति किया जाएगा, जिसमें धारा 132 के अधीन यथास्थिति, तलाशी के या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के प्राधिकारों में से अंतिम प्राधिकार उन मामलों में निष्पादित किया गया था जिनमें 30 जून, 1995 के पश्चात् किन्तु 1 जनवरी, 1997 से पूर्व तलाशी आरंभ की जाए या लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों या कोर्इ आस्तियों की अध्यपेक्षा की जाए;
(ख) उस मास के अंत से दो वर्ष के भीतर प्राप्ति किया जाएगा, जिसमें धारा 132 के या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के प्राधिकारों में से अंतिम प्राधिकार उन मामलों में निष्पादित किया गया था जिनमें 1 जनवरी, 1997 को या उसके पश्चात् तलाशी आरंभ की जाए या लेखा बहियों, या अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की अध्यपेक्षा की जाए।
(2) धारा 158खघ में उल्लिखित अन्य व्यक्ति के मामले में समूह निर्धारण पूरा करने की परिसीमा-काल निम्नलिखित होगा–
(क) उस मास के अंत से एक वर्ष, जिसमें इस अध्याय के अधीन नोटिस 30 जून, 1995 के पश्चात् किंतु 1 जनवरी, 1997 के पूर्व आरंभ की गर्इ तलाशी अथवा अध्यपेक्षित लेखा बहियों, या अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत ऐसे अन्य व्यक्ति पर तामील किया जाएगा; और
(ख) उस मास के अंत से दो वर्ष, जिसमें इस अध्याय के अधीन नोटिस 1 जनवरी, 1997 को या उसके पश्चात् आरंभ की गर्इ तलाशी अथवा अध्यपेक्षित लेखा बहियों, या अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत ऐसे अन्य व्यक्ति पर तामील किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमाकाल की संगणना करने में,–
(i) वह अवधि, जिसके दौरान निर्धारण कार्यवाही किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोकी जाती है ; या
(ii) वह अवधि, जो उस दिन से प्रारंभ होती है जिसको निर्धारण अधिकारी, निर्धारिती को धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने के लिए निदेश देता है और जो उस दिन को समाप्त होती है जिसको निर्धारिती से उस उपधारा के अधीन ऐसी संपरीक्षा की रिपार्ट देने की अपेक्षा की जाती है ; या
(iii) वह समय, जो धारा 129 के परंतुक के अधीन संपूर्ण कार्यवाही या उसका कोर्इ भाग फिर से आरंभ किए जाने या निर्धारिती को पुन:सुनवार्इ का अवसर दिए जाने में लगा है ; या
(iv) उस मामले में जहां धारा 245ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है या उसके द्वारा कार्यवाही किए जाने के लिए मंजूर नहीं किया जाता है वहां वह अवधि, जो उस दिन से प्रारंभ होती है जिसको आवेदन किया जाता है और उस दिन को समाप्त होती है जिसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश उस धारा की उपधारा (2) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है,
निकाल दी जाएगी :
परंतु जहां पूर्वोक्त अवधि के निकाले जाने के ठीक पश्चात् धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन कोर्इ आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट परिसीमा काल की उपलब्ध अवधि साठ दिन से कम है, वहां ऐसी शेष अवधि को साठ दिन तक बढ़ाया जाएगा और पूर्वोक्त परिसीमा काल तदनुसार बढ़ाया गया समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) में उल्लिखित प्राधिकार–
(क) तलाशी के मामले में, तलाशी की समाप्ति पर, जो किसी व्यक्ति के संबंध में, जिसके मामले में प्राधिकार पत्र जारी किया गया है, लिखे गए अंतिम पंचनामे में लेखबद्ध है;
(ख) धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के मामले में, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तियों की वास्तविक प्राप्ति पर,
निष्पादित किया गया समझा जाएगा।
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

