ब्लाक अवधि की अप्रकट आय की संगणना
ब्लाक अवधि की अप्रकट आय की संगणना
158खख. (1) ब्लाक अवधि की अप्रकट आय ब्लाक अवधि में आने वाले पूर्ववर्षों की कुल आय का योग होगी जो लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों और अन्य ऐसी तथ्य सामग्री या जानकारी की, जो निर्धारण अधिकारी के पास उपलब्ध हो, और ऐसे साक्ष्य से संबंधित है, तलाशी अध्यपेक्षा के परिणामस्वरूप पाए गए साक्ष्य के आधार पर इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार, संगणित की गर्इ हो, जिसमें से–
(क) जहां धारा 143 या धारा 144 या धारा 147 के अधीन निर्धारण तलाशी प्रारंभ करने की तारीख के या अध्यपेक्षा की तारीख के पूर्व पूरे कर दिए गए हैं वहां ऐसे निर्धारणों के आधार पर;
(ख) जहां आय की विवरणी धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 148 के अधीन जारी की गर्इ सूचना के जवाब में फाइल कर दी गर्इ है किंतु निर्धारण तलाशी या अध्यपेक्षा की तारीख तक नहीं किए गए हैं वहां ऐसी विवरणी में प्रकट आय के आधार पर;
(ग) जहां आय की विवरणी फाइल करने के लिए नियत तारीख समाप्त हो गर्इ है किन्तु आय की कोर्इ विवरणी फाइल नहीं की गर्इ है,–
(अ) वहां तलाशी या अध्यपेक्षा की तारीख को या उसके पूर्व सामान्य अनुक्रम में रखी गर्इ लेखा बहियों या दस्तावेजों में लेखबद्ध प्रविष्टियों के आधार पर, जहां ऐसी प्रविष्टियों के परिणामस्वरूप ब्लाक अवधि के अंतर्गत आने वाले किसी पूर्ववर्ष के लिए हानि की संगणना की गर्इ है; या
(आ) वहां तलाशी या अध्यपेक्षा की तारीख को या उसके पूर्व सामान्य अनुक्रम में रखी गर्इ लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों में लेखबद्ध प्रविष्टियों के आधार पर, जहां ऐसी आय उस अधिकतम रकम से अधिक नहीं है जो ब्लाक अवधि के अंतर्गत आने वाले किसी पूर्ववर्ष के लिए कर से प्रभार्य नहीं है ;
(गक) जहां खंड (ग) के अधीन न आने वाले मामलों में, आय की विवरणी फाइल करने के लिए नियत तारीख समाप्त हो गर्इ है किन्तु आय की कोर्इ विवरणी फाइल नहीं की गर्इ है वहां, शून्य के रूप में;
(घ) जहां पूर्ववर्ष समाप्त नहीं हुआ है अथवा धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी दाखिल करने की तारीख नहीं बीती है वहां ऐसे पूर्ववर्षों से संबद्ध तलाशी या अध्यपेक्षा की तारीख को या उसके पूर्व सामान्य तौर पर रखी गर्इ लेखा बहियों और अन्य दस्तावेजों में लेखबद्ध ऐसी आय या संव्यवहारों से संबंधित प्रविष्टियों के आधार पर ;
(ड़) जहां धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन कोर्इ परिनिर्धारण आदेश किया गया है, वहां ऐसे आदेश के आधार पर;
(च) जहां धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन अप्रकट आय का निर्धारण पहले किया जा चुका था, वहां ऐसे निर्धारण के आधार पर,
अवधारित, यथास्थिति, ऐसे पूर्ववर्षों की कुल आय का योग घटा दिया गया हो या जिसमें हानियों का योग बढ़ा दिया गया हो।
स्पष्टीकरण.–अप्रकट आय अवधारित करने के प्रयोजन के लिए,–
(क) प्रत्येक पूर्ववर्ष की कुल आय या हानि, योग के प्रयोजनार्थ, धारा 6 के अधीन अग्रनीत हानियों का मुजरा किए बिना या धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन अनामेलित अवक्षयण किए बिना इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित कुल आय या हानि मानी जाएगी:
[परन्तु यह कि उक्त योग के प्रयोजनों के लिए अध्याय 6क के अधीन कटौतियों की संगणना करने में अध्याय 6 के अधीन अग्रनीत हानियों या धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन अनमिलित अवक्षयण को मुजरा करने के लिए प्रभावी किया जाएगा।
(ख) किसी फर्म की, समूह अवधि में आने वाले पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए निर्धारित, वापसी आय और कुल आय वेतन, ब्याज, कमीशन, बोनस या पारिश्रमिक, जो भी कहें, की, किसी भागीदार को जो कार्यकारी भागीदार न हो, कटौती अनुज्ञात करने से पूर्व अवधारित आय होगी :
परन्तु इस प्रकार फर्म की यथा अवधारित अप्रकट आय भागीदारों के हाथ में, चाहे आबंटन पर या वृद्धि के फलस्वरूप, कर से प्रभार्य नहीं होगी;
(ग) धारा 143 के अधीन निर्धारण के अंतर्गत धारा 143 की उपधारा (1) या उपधारा (1ख) के अधीन आय का अवधारण भी है;
(2) समूह अवधि की अप्रकट आय की संगणना करते समय धारा 68, 69, 69क, 69ख और धारा 69ग के उपबंध, जहां तक हो सकें, लागू होंगे और उन धाराओं में "वित्तीय वर्ष" के प्रति निर्देशों के बारे में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे समूह अवधि में आने वाले सुसंगत पूर्ववर्ष के प्रति निर्देश हैं जिसके अंतर्गत वह पूर्ववर्ष भी है जो तलाशी या अध्यपेक्षा की तारीख के साथ समाप्त होता है।
(3) निर्धारण अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित करने का भार कि कोर्इ भी अप्रकट आय निर्धारिती द्वारा, यथास्थिति, तलाशी या अध्यपेक्षा के प्रारंभ के पूर्व दाखिल की गर्इ आय की विवरणी में पहले ही प्रकट की जा चुकी थी निर्धारिती पर होगा।
(4) इस अध्याय के अधीन निर्धारण के प्रयोजनों के लिए अध्याय 6 के अधीन पूर्ववर्ष से अग्रनीत की गर्इ हानियों का या धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन अनामेलित अवक्षयण का इस अध्याय के अधीन समूह निर्धारण में अवधारित अप्रकट आय से मुजरा नहीं किया जाएगा, किंतु नियमित निर्धारणों में मुजरा किए जाने के लिए अग्रनीत किया जा सकेगा।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

