भूल सुधार
भूल सुधार
154. (1) अभिलेख से प्रकट किसी भूल की दृष्टि से धारा 116 में निर्दिष्ट आय कर प्राधिकारी,–
(क) किसी ऐसे आदेश को, जो उसने इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन पारित किया है, संशोधित कर सकेगा;
(ख) धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन सूचना या समझी गर्इ सूचना को संशोधित कर सकेगा;
(ग) धारा 200क की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना को संशोधित कर सकेगा;
(घ) धारा 206गख की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना का संशोधन कर सकेगा।
(1क) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी आदेश से संबंधित अपील या पुनरीक्षण के तौर पर किसी कार्यवाही में कोर्इ विषय विचारित और विनिश्चित किया गया है, वहां ऐसा आदेश पारित करने वाला प्राधिकारी तत्समय प्रवृत किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी उस उपधारा के अधीन उस आदेश को ऐसे विषय के संबंध में संशोधित कर सकेगा जो उस विषय से भिन्न है जो इस प्रकार विचारित और विनिश्चित किया गया है।
(2) इस धारा के अन्य उपबंधों के अधीन यह है कि संबंधित प्राधिकारी–
(क) उपधारा (1) के अधीन संशोधन स्वप्रेरणा से कर सकेगा; और
(ख) किसी ऐसी भूल को सुधारने के लिए जो निर्धारिती द्वारा या कटौतीकर्ता द्वारा या संग्रहणकर्ता द्वारा और जहां संबंधित प्राधिकारी आयुक्त (अपील) है, वहां निर्धारण अधिकारी द्वारा भी उसके ध्यान में लार्इ जाती है, ऐसा संशोधन करेगा।
(3) कोर्इ ऐसा संशोधन, जिसका परिणाम निर्धारण में वृद्धि करना या प्रतिदाय को घटाना या निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता के दायित्व को अन्यथा बढ़ाना है, इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक संबंधित प्राधिकारी ने ऐसा करने के अपने आशय की निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता को सूचना नहीं दे दी हो और निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता को सुनवार्इ का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया हो।
(4) जहां इस धारा के अधीन कोर्इ संशोधन किया जाता है, वहां संबंधित आय-कर प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में आदेश पारित किया जाएगा।
(5) जहां किसी ऐसे संशोधन का परिणाम निर्धारण को कम करना या निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता के दायित्व को अन्यथा कम करना है, वहां निर्धारण अधिकारी ऐसा कोर्इ प्रतिदाय करेगा, जो ऐसे निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता को देय हो।
(6) जहां ऐसे किसी संशोधन का परिणाम पहले से किए गए निर्धारण में वृद्धि करना या प्रतिदाय को घटाना या निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता के दायित्व को अन्यथा बढ़ाना है, वहां निर्धारण अधिकारी संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की निर्धारिती या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता पर तामील करेगा और ऐसी मांग की सूचना धारा 156 के अधीन जारी की गर्इ समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(7) धारा 155 में या धारा 186 की उपधारा (4) में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस धारा के अधीन कोर्इ संशोधन उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें ऐसा आदेश, जिसका संशोधन चाहा गया है, पारित किया गया था चार वर्ष की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा।
(8) उपधारा (7) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जहां निर्धारित द्वारा या कटौतीकर्ता या संग्रहणकर्ता द्वारा इस धारा के अधीन संशोधन के लिए आवेदन 1 जून, 2001 को या उसके पश्चात् उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-कर प्राधिकारी को किया जाता है, वहां वह प्राधिकारी उस मास की, जिसमें उसके द्वारा आवेदन प्राप्त किया जाता है, समाप्ति से छह मास के भीतर–
(क) संशोधन करते हुए; या
(ख) दावा मंजूर करने से इंकार करते हुए,
आदेश पारित करेगा।
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

