आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 154

भूल सुधार

धारा

धारा संख्या

154

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2014

भूल सुधार

भूल सुधार

भूल सुधार

69154. 70[(1) अभिलेख71 से प्रकट किसी भूल71 की दृष्टि से धारा 116 में निर्दिष्ट आय कर प्राधिकारी,–

() किसी ऐसे आदेश को, जो उसने इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन पारित किया है, संशोधित कर सकेगा;

72[() धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन सूचना या समझी गर्इ सूचना को संशोधित कर सकेगा;]]

72क[() धारा 200क की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना को संशोधित कर सकेगा।]

73[(1क) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी आदेश से संबंधित अपील या पुनरीक्षण के तौर पर किसी कार्यवाही में कोर्इ विषय विचारित और विनिश्चित किया गया है, वहां ऐसा आदेश पारित करने वाला प्राधिकारी तत्समय प्रवृत किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी उस उपधारा के अधीन उस आदेश को ऐसे विषय के संबंध में संशोधित कर सकेगा जो उस विषय से भिन्न है जो इस प्रकार विचारित और विनिश्चित किया गया है।]

(2) इस धारा के अन्य उपबंधों के अधीन यह है कि संबंधित प्राधिकारी–

() उपधारा (1) के अधीन संशोधन स्वप्रेरणा से कर सकेगा; और

() किसी ऐसी भूल को सुधारने के लिए जो निर्धारिती द्वारा 73क[या कटौतीकर्ता द्वारा] और जहां संबंधित प्राधिकारी 74[* * *] 75[आयुक्त (अपील)] है, वहां 76[निर्धारण] अधिकारी द्वारा भी उसके ध्यान में लार्इ जाती है, ऐसा संशोधन करेगा।

77[* * *]

(3) कोर्इ ऐसा संशोधन, जिसका परिणाम निर्धारण में वृद्धि करना या प्रतिदाय को घटाना या निर्धारिती 77क[या कटौतीकर्ता] के दायित्व को अन्यथा बढ़ाना है, इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक संबंधित प्राधिकारी ने ऐसा करने के अपने आशय की निर्धारिती 77क[या कटौतीकर्ता] को सूचना नहीं दे दी हो और निर्धारिती 77क[या कटौतीकर्ता] को सुनवार्इ का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया हो।

(4) जहां इस धारा के अधीन कोर्इ संशोधन किया जाता है, वहां संबंधित आय-कर प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में आदेश पारित किया जाएगा।

77ख[(5) जहां किसी ऐसे संशोधन का परिणाम निर्धारण को कम करना या निर्धारिती या कटौतीकर्ता के दायित्व को अन्यथा कम करना है, वहां निर्धारण अधिकारी ऐसा कोर्इ प्रतिदाय करेगा, जो ऐसे निर्धारिती या कटौतीकर्ता को देय हो।]

(6) जहां ऐसे किसी संशोधन का परिणाम पहले से किए गए निर्धारण में वृद्धि करना या 78[प्रतिदाय को घटाना या निर्धारिती या कटौतीकर्ता के दायित्व को अन्यथा बढ़ाना है, वहां निर्धारण अधिकारी संदेय राशि79 विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की निर्धारिती या कटौतीकर्ता पर] तामील करेगा और ऐसी मांग की सूचना धारा 156 के अधीन जारी की गर्इ समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(7) धारा 155 में या धारा 186 की उपधारा (4) में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस धारा के अधीन कोर्इ संशोधन 80[उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें ऐसा आदेश81, जिसका संशोधन चाहा गया है, पारित किया गया था] चार वर्ष की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा।

82[(8) उपधारा (7) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जहां निर्धारित द्वारा 82क[या कटौतीकर्ता द्वारा] इस धारा के अधीन संशोधन के लिए आवेदन 1 जून, 2001 को या उसके पश्चात् उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-कर प्राधिकारी को किया जाता है, वहां वह प्राधिकारी उस मास की, जिसमें उसके द्वारा आवेदन प्राप्त किया जाता है, समाप्ति से छह मास के भीतर–

() संशोधन करते हुए; या

() दावा मंजूर करने से इंकार करते हुए,

आदेश पारित करेगा।]

 

69. परिपत्र सं. 68, तारीख 17.11.1971, परिपत्र सं. 71, तारीख 20.12.1971, परिपत्र सं. 73, तारीख 7.1.1972, परिपत्र सं. 87, तारीख 19.6.1972, जो परिपत्र सं. 81, तारीख 26.3.1972 के अतिष्ठित करके निकाला गया था, परिपत्र सं. 581, तारीख 28.9.1990, परिपत्र सं. 669, तारीख 25.10.1993 और परिपत्र सं. 725, तारीख 16.10.1995 भी देखिये।

सुसंगत केस लॉज़ देखिए

70. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी।

इसके प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) पहले प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से और फिर कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से और फिर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से संशोधित की गर्इ थी।

71. ‘‘भूल’’, ‘‘अभिलेख’’, ‘‘प्रकट किसी भूल’’ और ‘‘अभिलेख से प्रकट किसी भूल’’ पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

72. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित खंड () इस प्रकार था :

‘‘() धारा 143 की धारा (1) के अधीन उसके द्वारा भेजी गर्इ संसूचना को संशोधित अथवा उस उपधारा के अधीन मंजूर की गर्इ रिफंड राशि को बढ़ा या घटा सकेगा।’’

72क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

73. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।

73क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

74. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से ‘‘उपायुक्त (अपील) या’’ शब्दों का लोप किया गया। इससे पहले ‘‘उपायुक्त (अपील)’’ शब्द ‘‘सहायक आयुक्त (अपील)’’ शब्दों के स्थान पर प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से रखे गए थे।

75. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।

76. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘आय-कर’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

77. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से परन्तुक का लोप किया गया। लोप से पहले परंतुक वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 14.5.1992 से अंत:स्थापित किया गया था।

77क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

77ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से यथासंशोधित उपधारा (5) इस प्रकार थी :

"(5) धारा 241 के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि जहां ऐसे किसी संशोधन का परिणाम निर्धारण को घटाना है, वहां निर्धारण अधिकारी ऐसा प्रतिदाय करेगा जैसा ऐसे निर्धारिती को देय हो।"

78. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "प्रतिदाय को घटाना है, वहां निर्धारण अधिकारी संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की निर्धारिती पर" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए गए शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘आय-कर’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

79. ‘‘संदेय राशि’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

80. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से ‘‘संशोधित किए जाने के लिए र्इप्सित आदेश की तारीख से पारित किया गया था’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

81. ‘‘आदेश’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।

82. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से अंत:स्थापित।

82क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

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