आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 153ख

धारा 153 के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा

धारा

धारा संख्या

153ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2011

धारा 153 के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा

धारा 153 के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा

धारा 153 के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा

153ख. (1) धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी निर्धारण अधिकारी,–

() धारा 153क 62ग[की उपधारा (1)] के खंड () में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, समाप्ति से दो वर्ष की अवधि के भीतर,

() उस पूर्ववर्ष से जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष की बाबत उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 132 के भीतर तलाशी के लिये या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, समाप्ति से दो वर्ष की अवधि के भीतर,

निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा :

63[परंतु धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में, निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमा की अवधि, इस उपधारा के खंड () या खंड () में निर्दिष्ट अवधि या उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंपी जाती हैं, अंत से एक वर्ष की, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी :]

64[परंतु यह और कि उस दशा में, जहां धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार, 1 अपै्रल, 2004 को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान निष्पादित किया गया था, वहां,–

(i) इस उपधारा के खंड () या खंड () के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर "इक्कीस मास" शब्द रख दिए गए हों;

(ii) धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमा अवधि, उस वित्तीय वर्ष के अंत से, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था, इक्कीस मास या उस वित्तीय वर्ष के अंत से, जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंपी जाती हैं, नौ मास, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी:]

65[परंतु यह भी कि उस दशा में जहां धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार, 1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान निष्पादित किया गया था और कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–

(i) 1 जून, 2007 से पूर्व किया गया था, किंतु धारा 92गक की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश उस तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या

(ii) 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है,

वहां इस उपधारा के खंड () या खंड () के उपबंध, दूसरे परंतुक के खंड (i) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर "तैंतीस मास" शब्द रखे गए हों :

परंतु यह भी कि उस दशा में जहां धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार, 1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान निष्पादित किया गया था और धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–

(i) 1 जून, 2007 से पूर्व किया गया था, किंतु धारा 92गक की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश उस तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या

(ii) 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है,

वहां ऐसे अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमा की अवधि, दूसरे परंतुक के खंड (ii) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था, अंत से तैंतीस मास की अवधि या उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अभिगृहित या अध्यपेक्षित लेखाबहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153ग के अधीन ऐसे व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंपी जाती हैं, अंत से इक्कीस मास की अवधि, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमा की अवधि की संगणना करने में,–

(i) उस अवधि को, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश के द्वारा रोक लगा दी जाती है; या

(ii) उस दिन से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन उसके लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और उस दिन को, जिसको निर्धारिती से उस उपधारा के अधीन ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देने की अपेक्षा की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(iii) संपूर्ण कार्यवाही या उसके किसी भाग को पुन: शुरू करने में या धारा 129 के परन्तुक के अधीन निर्धारिती को पुन: सुनवार्इ का अवसर देने में लगे समय को; या

(iv) ऐसे मामले में, जिसमें धारा 245ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है या उसके द्वारा उस पर कार्यवाही करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती है, उस तारीख से जिसको ऐसा आवेदन किया जाता है प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश उस धारा की उपधारा (2) के अधीन आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; 66[या]

66[(v) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को नामंजूर करने वाला आदेश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(vi) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि;]

66क[(vii) धारा 153क की उपधारा (2) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण की किसी कार्यवाही या आदेश के बातिलीकरण की तारीख से प्रारंभ होने वाली और आयुक्त द्वारा ऐसे बातिलीकरण के आदेश को अपास्त किए जाने संबंधी आदेश की प्राप्ति की तारीख 66कख[तक की अवधि; या]]

66कग[(viii) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोर्इ निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको आयुक्त द्वारा इस प्रकार अनुरोध की गर्इ सूचना प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या छह मास की अवधि, इनमें से जो भी कम हो,]

को छोड़ दिया जाएगा :

परंतु जहां पूर्वोक्त अवधि को छोड़े जाने के ठीक पश्चात् इस 66ख[उपधारा] * के खंड () या खंड () में निर्दिष्ट परिसीमा की अवधि, यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी के पास साठ दिन से कम उपलब्ध हैं वहां ऐसी शेष अवधि को बढ़ाकर साठ दिन तक कर दिया जाएगा और परिसीमा की पूर्वोक्त अवधि को तदनुसार बढ़ाया गया समझा जाएगा।

(2) उपधारा (1) के खंड () और खंड () में निर्दिष्ट प्राधिकार को,–

() तलाशी की दशा में, किसी ऐसे व्यक्ति की बाबत, जिसके मामले में प्राधिकार का वारंट जारी किया गया है, लिखे गए अंतिम पंचनामे में यथा अभिलिखित तलाशी पूरी होने पर,

() धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की दशा में, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तिओं के वस्तुत: प्राप्त होने पर,

निष्पादित किया गया समझा जाएगा।

 

62ग. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

63. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.6.2003 से, भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

64. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।

65. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।

66. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।

66क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

66कख. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.6.2011 से "तक की अवधि," के स्थान पर प्रतिस्थापित।

66कग. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

66ख. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से "धारा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

*"इस उपधारा" शब्दों के स्थान पर "उपधारा (1)" शब्द होने चाहिए।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा संशोधित रूप में]

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