आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 153क

तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण

धारा

धारा संख्या

153क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण

तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण

तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण

153क. (1) धारा 139, धारा 147, धारा 148, धारा 149, धारा 151 और धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे व्यक्ति की दशा में जहां 31 मई, 2003 के पश्चात् 83कक[किन्तु, 31 मार्च, 2021 का या उससे पूर्व] धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की अध्यपेक्षा की जाती है वहां निर्धारण अधिकारी–

() ऐसे व्यक्ति को सूचना जारी करेगा जिसमें उससे ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए खंड () में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों में आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत 84[और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए] विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित आय की विवरणी देने तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां उपदर्शित करने की, जो विहित की जाएं, अपेक्षा की जाएगी तथा इस अधिनियम के उपबंध जहां तक हो सके तदनुसार इस प्रकार लागू होंगे मानो यह विवरणी ऐसी विवरणी है जो धारा 139 के अधीन दी जानी अपेक्षित है;

() उस पूर्ववर्ष से, जिसमें ऐसी तलाशी ली या अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्व के छह निर्धारण वर्षों की 84[और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों की] कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा:

परंतु निर्धारण अधिकारी ऐसे छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत 84[और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए] कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा:

परंतु यह और कि इस उपधारा में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों में आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए निर्धारण या पुनर्निर्धारण का, यदि कोई हो, जो, यथास्थिति, धारा 132 के अधीन तलाशी लेने या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा करने की तारीख को लंबित हो, उपशमन हो जाएगा:

परंतु यह भी कि केंद्रीय सरकार, उसके द्वारा बनाए गए और राजपत्र में प्रकाशित नियमों द्वारा ऐसे मामलों के वर्ग या वर्गों को (उन मामलों के सिवाय, जहां किसी निर्धारण या पुनर्निर्धारण का दूसरे परंतुक के अधीन उपशमन किया गया है) विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनमें निर्धारण अधिकारी से उस पूर्ववर्ष से, जिसमें तलाशी ली जाती है या अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्व के छह निर्धारण वर्षों की 84[और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों की] कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी नोटिस जारी करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।

84[परंतु यह भी कि निर्धारण अधिकारी द्वारा सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए तब तक निर्धारण या पुन: निर्धारण के लिए कोई सूचना जारी नहीं की जाएगी–

() जब तक निर्धारण अधिकारी के कब्जे में ऐसी लेखा बहियां या अन्य दस्तावेज या साक्ष्य न हों, जो यह प्रकट करते हों कि आस्ति के रूप में व्यपदेशित आय, जो निर्धारण से रह गई है, सुसंगत निर्धारण वर्ष में पचास लाख रुपए या अधिक की रकम के बराबर है या बराबर होने की संभावना है या सुसंगत निर्धारण वर्षों में उसका कुल योग पचास लाख रुपए या अधिक है;

() खंड () में निर्दिष्ट आय या उसका भाग ऐसे वर्ष या वर्षों के लिए निर्धारण से रह गया है; और

(ग) धारा 132 के अधीन प्रारंभ की गई तलाशी या धारा 132क के अधीन की गई अध्यपेक्षा 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात् की गई है।

स्पष्टीकरण 1–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "सुसंगत निर्धारण वर्ष" पद से, उस पूर्ववर्ष, जिसमें तलाशी ली जाती है या अध्यपेक्षा की जाती है, से सुसंगत निर्धारण वर्ष से पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है और जो उस पूर्ववर्ष, जिसमें तलाशी ली जाती है या अध्यपेक्षा की जाती है, से सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति के छह निर्धारण वर्षों से परे है, किंतु दस निर्धारण वर्षों से अपश्चात् है।

स्पष्टीकरण 2–चौथे परंतुक के प्रयोजनों के लिए, "आस्ति" के अंतर्गत ऐसी स्थावर संपत्ति भी होगी, जो भूमि या भवन या दोनों, शेयर और प्रतिभूतियां, ऋण और अग्रिम, बैंक खातों में निक्षेप हैं।]

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन आरंभ की गई किसी कार्यवाही या किया गया निर्धारण या पुनर्निर्धारण के किसी आदेश को अपील में या किसी अन्य विधिक कार्यवाही में बातिल कर दिया गया है तो उपधारा (1) या धारा 153 में की किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में निर्धारण या पुनर्निर्धारण, जिसका उपधारा (1) के दूसरे परंतुक के अधीन उपशमन हो गया है, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा ऐसे बातिलीकरण के आदेश की प्राप्ति की तारीख से पुन:प्रवर्तित हो जाएगा :

परंतु यदि बातिलीकरण के ऐसे आदेश को अपास्त कर दिया जाता है तो ऐसे पुन:प्रवर्तन का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।

स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषणा की जाती है कि,–

(i) इस धारा 153ख और धारा 153ग में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम से सभी अन्य उपबंध इस धारा के अधीन किए गए निर्धारण को लागू होंगे;

(ii) इस धारा के अधीन किसी निर्धारण वर्ष की बाबत किए गए किसी निर्धारण या पुनर्निर्धारण में कर ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए लागू दर या दरों पर प्रभार्य होगा ।

 

83कक. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित।

84. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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