तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण
62[तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण
153क. 62क[(1)] धारा 139, धारा 147, धारा 148, धारा 149, धारा 151 और धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे व्यक्ति की दशा में जहां 31 मर्इ, 2003 के पश्चात् धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की अध्यपेक्षा की जाती है वहां निर्धारण अधिकारी–
(क) ऐसे व्यक्ति को सूचना जारी करेगा जिसमें उससे ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए खंड (ख) में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों में आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित आय की विवरणी देने तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां उपदर्शित करने की, जो विहित की जाएं, अपेक्षा की जाएगी तथा इस अधिनियम के उपबंध जहां तक हो सके तदनुसार इस प्रकार लागू होंगे मानो यह विवरणी ऐसी विवरणी है जो धारा 139 के अधीन दी जानी अपेक्षित है;
(ख) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें ऐसी तलाशी ली या अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्व के छह निर्धारण वर्षों की कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा:
परंतु निर्धारण अधिकारी ऐसे छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा:
परंतु यह और कि इस 62ख[उपधारा] में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों की अवधि के भीतर आने वाले किसी निर्धारण वर्ष से संबंधित निर्धारण या पुनर्निर्धारण का, यदि कोर्इ हो, जो, यथास्थिति, धारा 132 के अधीन तलाशी लेने या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा करने की तारीख को लंबित हो, उपशमन हो जाएगा।
62ग[(2) यदि उपधारा (1) के अधीन आरंभ की गर्इ किसी कार्यवाही या किया गया निर्धारण या पुनर्निर्धारण के किसी आदेश को अपील में या किसी अन्य विधिक कार्यवाही में बातिल कर दिया गया है तो उपधारा (1) या धारा 153 में की किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में निर्धारण या पुनर्निर्धारण, जिसका उपधारा (1) के दूसरे परंतुक के अधीन उपशमन हो गया है, आयुक्त द्वारा ऐसे बातिलीकरण के आदेश की प्राप्ति की तारीख से पुन:प्रवर्तित हो जाएगा :
परंतु यदि बातिलीकरण के ऐसे आदेश को अपास्त कर दिया जाता है तो ऐसे पुन:प्रवर्तन का कोर्इ प्रभाव नहीं रहेगा।]
स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषणा की जाती है कि,–
(i) इस धारा 153ख और धारा 153ग में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम से सभी अन्य उपबंध इस धारा के अधीन किए गए निर्धारण को लागू होंगे;
(ii) इस धारा के अधीन किसी निर्धारण वर्ष की बाबत किए गए किसी निर्धारण या पुनर्निर्धारण में कर ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए लागू दर या दरों पर प्रभार्य होगा ।
62. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से धारा 153क से 153ग तक अंत:स्थापित।
62क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से उपधारा (1) के रूप में पुन:संख्यांकित।
62ख. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से "धारा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
62ग. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा संशोधित रूप में]

