आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 149

सूचना के लिए समय सीमा

धारा

धारा संख्या

149

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

सूचना के लिए समय सीमा

सूचना के लिए समय सीमा

1[सूचना की समय-सीमा

149. (1) धारा 148 के अधीन कोई सूचना सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए उस समय जारी नहीं की जाएगी,—

(क) यदि सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से तीन वर्ष व्यपगत हो चुके हैं, यदि वह मामला खंड (ख) के अंतर्गत नहीं आता है;

2[(ख) यदि सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से तीन वर्ष, किंतु दस वर्ष से अनधिक व्यपगत हो चुके हैं तो जब तक निर्धारण अधिकारी ने उसके कब्जे में की लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों या साक्ष्य को, जिनसे यह प्रकटित होता है कि,-

(i) किसी आस्ति ;

(ii) किसी कार्यक्रम या अवसर के संबंध में संव्यवहार की बाबत व्यय ; या

(iii) लेखाबहियों में कोई प्रविष्टि या प्रविष्टियों,

के रूप दर्शित कर से प्रभार्य आय, जो निर्धारण से छूट गई हैं, पचास लाख रुपए या संभवत: पचास लाख रुपए या उससे अधिक है।;]

परन्तु धारा 148 के अधीन 1 अप्रैल, 2021 को या उससे पूर्व आरंभ होने वाले सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए किसी मामले में किसी समय कोई सूचना उस समय जारी नहीं की जाएगी, यदि ऐसी सुचना के लिए 2कक[यथास्थिति, इस धारा की उपधारा (1) के खंड (ख) या धारा 153क या धारा 153ग के उपबंधों के अधीन विनिर्दिष्ट समय - सीमा से परे होने के नाते उस समय धारा 148 या धारा 153क या धारा 153ग के अधीन नोटिस जारी नहीं किया होता], जैसे कि वे वित्त अधिनियम, 2021 के आरंभ से ठीक पूर्व विद्यमान थे :

परन्तु यह और कि इस उपधारा के उपबंध उस दशा में लागू नहीं होंगे जहां धारा 153क या धारा 153ग के साथ पठित धारा 153ग के अधीन कोई सूचना धारा 132 के अधीन आरंभ की गई किसी तलाशी के संबंध में या 31 मार्च, 2021 को या उससे पूर्व धारा 132क के अधीन लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की अध्यपेक्षा के संबंध में जारी की जानी अपेक्षित है:

4[परंतु यह भी कि धारा 148 के स्पष्टीकरण 2 के खंड (i), खंड (iii) और खंड (iv) में निर्दिष्ट मामलों के लिए, जहां किसी वित्तीय वर्ष की 15 मार्च के पश्चात्,—

(क) धारा 132 के अधीन कोई तलाशी आरंभ की जाती है ; या

(ख) धारा 132 के अधीन कोई तलाशी, जिसके लिए अंतिम प्राधिकार का निष्पादन किया गया है ; या

(ग) धारा 132क के अधीन कोई अध्यपेक्षा की गई है,

और धारा 148 के अधीन सूचना जारी करने की अवधि ऐसे वित्तीय वर्ष की 31 मार्च को समाप्त हो रही है, वहां इस धारा के अनुसार परिसीमा की अवधि की संगणना के प्रयोजन के लिए पन्द्रह दिन की अवधि को अपवर्जित किया जाएगा और ऐसे किसी मामले में धारा 148 के अधीन जारी सूचना को ऐसे वित्तीय वर्ष की 31 मार्च को जारी किया गया समझा जाएगा :

परंतु यह भी कि जहां धारा 148 के स्पष्टीकरण 1 में यथानिर्दिष्ट जानकारी, यथास्थिति, धारा 131 या धारा 133क के अधीन लेखबद्ध किए गए किसी कथन या जब्त किए गए दस्तावेजों से निम्नलिखित के परिणामस्वरूप किसी वित्तीय वर्ष की 31 मार्च को या उससे पूर्व आती है और जहां किसी वित्तीय वर्ष की 15 मार्च के पश्चात्,—

(क) कोई तलाशी, जो धारा 132 के अधीन आरंभ की जाती है ; या

(ख) कोई तलाशी, जिसके लिए धारा 132 के अधीन अंतिम प्राधिकार का निष्पादन किया गया है ; या

(ग) कोई अध्यपेक्षा, जो धारा 132क के अधीन की गई है,

वहां इस धारा के अनुसार परिसीमा की अवधि की संगणना के प्रयोजन के लिए पन्द्रह दिन की अवधि को अपवर्जित किया जाएगा और ऐसे किसी मामले में धारा 148क के खंड (ख) के अधीन जारी सूचना को ऐसे वित्तीय वर्ष कर 31 मार्च को जारी किया गया समझा जाएगा :]

परन्तु यह भी कि इस धारा के अनुसार परिसीमा की अवधि की संगणना करने के लिए धारा 148क के खंड (ख) के अधीन जारी कारण बताओं सूचना के अनुसार निर्धारिती को दिया गया समय या उसे अनुज्ञात किया गया कोई विस्तारित समय या वह अवधि, जिसके दौरान धारा 148क के अधीन किसी कार्यवाही को किसी न्यायालय के किसी आदेश या व्यादेश द्वारा आस्थगित कर दिया जाता है, गणना में नहीं लिया जाएगा :

परन्तु यह भी कि जहां इससे ठीक पूर्ववर्ती परन्तुक में निर्दिष्ट अवधि के अपवर्जन के पश्चात् निर्धारण अधिकारी को धारा 148क के खंड (घ) के अधीन कोई आदेश पारित करने के लिए उपलब्ध 5[परिसीमा की अवधि सात दिन से अधिक नहीं होती] तो ऐसी शेष अवधि को सात दिन तक विस्तारित किया जाएगा और इस उपधारा के अधीन परिसीमा की अवधि को तदनुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण— इस उपधारा के खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए, "आस्ति के अंतर्गत स्थावर संपत्ति, चाहे भूमि या भवन या दोनों, शेयर और प्रतिभूतियां, ऋण और अग्रिम, जिसके अंतर्गत बैंक खाते में जमा भी है, होंगे।

2क[(1क) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कर से प्रभार्य आय, जो किसी आस्ति या उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट मूल्य के किसी कार्यक्रम या अवसर के संबंध में व्यय के रूप में है, निर्धारण से छूट गई है और ऐसे कार्यक्रम या अवसर के संबंध में ऐसी आस्ति में विनिधान या व्यय निर्धारण वर्षों से सुसंगत एक या अधिक पूर्ववर्षों में उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर किया गया है या उपगत किया गया है, तो धारा 148 के अधीन नोटिस, यथास्थिति, निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना के लिए ऐसे प्रत्येक निर्धारण वर्ष के लिए जारी किया जाएगा।]

(2) सूचना जारी करने से संबंधित उपधारा (1) के उपबंध के उपबंधों के अध्यधीन होंगे।]


1. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 149 निम्न प्रकार थी ।

"149. सूचना के लिए समय सीमा — (1) धारा 148 के अधीन कोई सूचना सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए तब तक जारी नहीं की जाएगी यदि–

() सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से चार वर्ष बीत चुके हैं, जब तक कि मामला खंड () या खंड () के अंतर्गत न आता हो,

() सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से चार वर्ष किंतु अधिक से अधिक छह वर्ष बीत चुके हैं, जब तक कि कर से प्रभार्य आय, जो निर्धारण से छूट गई थी, उस वर्ष के लिए एक लाख रुपए या अधिक की कोटि में नहीं आती या आनी संभाव्य नहीं है।

() यदि सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से चार वर्ष, किन्तु सोलह वर्ष से अनधिक वर्ष व्यपगत हो चुके हों तो जब तक कि भारत के बाहर स्थित किसी आस्ति के संबंध में (जिसके अंतर्गत किसी अस्तित्व में वित्तीय हित भी है) कर से प्रभार्य ऐसी आय, निर्धारण से छूट नहीं गई है।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए कर से प्रभार्य उस आय का अवधारण करने के लिए जो निर्धारण से छूट गई है, धारा 147 के स्पष्टीकरण 2 के उपबंध वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उस धारा के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

(2) उपधारा (1) के उपबंध, सूचना के जारी किए जाने के संबंध में धारा 151 के उपबंधों के अधीन होंगे।

(3) यदि वह व्यक्ति, जिस पर धारा 148 के अधीन सूचना की तामील की जानी है, ऐसा व्यक्ति है जो धारा 163 के अधीन अनिवासी का अभिकर्ता माना जाता है, और सूचना के अनुसरण में किया जाने वाला निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना ऐसे अनिवासी के अभिकर्ता के रूप में उस पर की जानी है तो सूचना, सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से छह वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पश्चात् जारी नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा यथासंशोधित उपधारा (1) और उपधारा (3) के उपबंध, 1 अप्रैल, 2012 को या उसके पूर्व आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए भी लागू होंगे।"

2. वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा 1.4.2022 से प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (ख) निम्न प्रकार था।

"(ख) यदि सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से तीन वर्ष किंतु दस से अनधिक वर्ष व्यपगत हो चुके हैं, यदि निर्धारण अधिकारी के कब्जे में ऐसी लेखा बहियां या अन्य दस्तावेज या ऐसा साक्ष्य न हो, जो यह प्रकट करता हो कि कर से प्रभार्य ऐसी आय, जिसे आस्ति के रूप में उपदर्शित किया गया है और जो निर्धारण से छूट गई है, उस वर्ष के लिए पचास लाख रुपए या उससे अधिक है या होनी संभाव्य है:"

2क. वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा 1.4.2022 से अंत:स्थापित।

2कक. वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा 1.4.2022 से प्रतिस्थापित।

4. वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2023 से अंतस्थापित।

5. वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2023 से "परिसीमा की अवधि सात दिन से कम है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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