जहां आय निर्धारण से छूट गर्इ है, वहां सूचना का जारी किया जाना
जहां आय निर्धारण से छूट गर्इ है, वहां सूचना का जारी किया जाना
148. (1) धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना करने के पूर्व, निर्धारण अधिकारी निर्धारिती पर उससे यह अपेक्षा करने वाली सूचना तामील करेगा कि वह ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, सुसंगत निर्धारण वर्ष के तत्स्थानी पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय की या किसी अन्य व्यक्ति की आय की, जिसकी बाबत वह इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को जो विहित की जाए, उल्लिखित करते हुए एक विवरणी दे और इस अधिनियम के उपबंध, जहां तक हो सके, तदनुसार उसी प्रकार लागू होंगे मानों वह विवरणी ऐसी विवरणी हो जो धारा 139 के अधीन दी जानी अपेक्षित है:
परंतु यह कि ऐसे किसी मामले में,–
(क) जहां कि इस धारा के अधीन तामील की गर्इ किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 1991 को प्रारंभ होने वाली और 30 सितंबर, 2005 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान कोर्इ विवरणी दी गर्इ है और
(ख) तत्पश्चात् धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन किसी सूचना की, धारा 143 की उपधारा (2) के परंतुक में, जैसे कि वह वित्त अधिनियम, 2002 (2002 का 20) द्वारा उक्त उपधारा का संशोधन किए जाने से ठीक पूर्व विद्यमान था, विनिर्दिष्ट बारह मास के अवसान के पश्चात् किंतु धारा 153 की उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगणना करने की समय-सीमा के अवसान से पूर्व, तामील की गर्इ है, वहां इस खंड में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसी सूचना को विधिमान्य सूचना समझा जाएगा :
परंतु यह और कि ऐसे किसी मामले में,–
(क) जहां कि इस धारा के अधीन तामील की गर्इ किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 1991 को प्रारंभ होने वाली और 30 सितंबर, 2005 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान कोर्इ विवरणी दी गर्इ है, और
(ख) तत्पश्चात् धारा 143 की उपधारा (2) के खंड (ii) के अधीन किसी सूचना की धारा 143 की उपधारा (2) के खंड (ii) के परंतुक में विनिर्दिष्ट बारह मास के अवसान के पश्चात् किंतु धारा 153 की उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगंणना करने की समय-सीमा के अवसान से पूर्व, तामील की गर्इ है, वहां इस खंड में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसी सूचना को विधिमान्य सूचना समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि पहले परंतुक या दूसरे परंतुक में की कोर्इ भी बात, इस धारा के अधीन तामील की गर्इ किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 2005 को या उसके पश्चात् दी गर्इ विवरणी को लागू नहीं होगी।
(2) निर्धारण अधिकारी इस धारा के अधीन कोर्इ सूचना जारी करने से पूर्व ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करेगा।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

