आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 147

निर्धारण से छूट गर्इ आय

धारा

धारा संख्या

147

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

निर्धारण से छूट गर्इ आय

निर्धारण से छूट गर्इ आय

98[निर्धारण से छूट गर्इ आय

99147. यदि 1[निर्धारण] अधिकारी 2[का यह विश्वास करने का कारण है3] कि कर से प्रभार्य कोर्इ आय किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण4 से छूट गर्इ है तो वह धारा 148 से धारा 153 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए (जिसे इस धारा में और धारा 148 से धारा 153 में इसके पश्चात् सुसंगत निर्धारण वर्ष कहा गया है), यथास्थिति, ऐसी आय का और कर से प्रभार्य किसी अन्य आय का भी, जो निर्धारण से छूट गर्इ है, और इस धारा के अधीन कार्यवाहियों के दौरान तत्पश्चात् उसकी जानकारी में आती है, निर्धारण या पुन: निर्धारण5 कर सकेगा अथवा हानि या अवक्षयण मोक या किसी अन्य मोक की पुन: संगणना कर सकेगा :

परन्तु जहां धारा 143 की उपधारा (3) या इस धारा के अधीन निर्धारण, सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए किया गया है वहां सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से चार वर्ष की समाप्ति के पश्चात् इस धारा के अधीन कोर्इ कार्यवाही तभी की जाएगी जब कर से प्रभार्य कोर्इ, आय धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 148 के अधीन जारी की गर्इ सूचना के उत्तर में विवरणी देने में अथवा उस निर्धारण वर्ष के लिए उसके निर्धारण के लिए आवश्यक सभी तात्विक तथ्यों6 के पूर्णत: और सही रूप से प्रकट करने में निर्धारिती की ओर से असफलता6क के कारण ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण से छूट गर्इ है :

7[परंतु यह और कि निर्धारण अधिकारी, उस आय से भिन्न, जिसमें ऐसे विषय अंतर्वलित हैं जो किसी अपील, निर्देश या पुनरीक्षण की विषय-वस्तु है, ऐसी आय का, जो कर से प्रभार्य है और निर्धारण से छूट गर्इ है, निर्धारण या पुन: निर्धारण कर सकेगा।]

स्पष्टीकरण 1.–निर्धारण अधिकारी के समक्ष लेखा बहियों या अन्य साक्ष्य का पेश किया जाना, जिससे निर्धारण अधिकारी द्वारा सम्यक् तत्परता से तात्विक साक्ष्य का पता लगाया जा सकता था, पूर्वगामी परंतुक के अर्थ में अनिवार्यत:प्रकटीकरण नहीं होगा6

स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित को भी ऐसे मामले समझा जाएगा जिसमें कर से प्रभार्य आय निर्धारण से छूट गर्इ है, अर्थात् :–

() जहां निर्धारिती ने आय की कोर्इ विवरणी नहीं दी है यद्यपि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय, जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धार्य है, उस अधिकतम रकम से अधिक थी जो आय कर से प्रभार्य नहीं है ;

() जहां निर्धारिती ने आय की विवरणी दी है, किंतु कोर्इ निर्धारण नहीं किया गया है, और निर्धारण अधिकारी की जानकारी में आता है कि निर्धारिती ने आय कम बतार्इ है, या विवरणी में अत्यधिक हानि, कटौती, मोक या राहत का दावा किया है;

() जहां निर्धारण किया गया है, किन्तु–

(i) कर से प्रभार्य आय अवनिर्धारित की गर्इ है; या

(ii) ऐसी आय अत्यंत न्यून दर से निर्धारित की गर्इ है; या

(iii) ऐसी आय इस अधिनियम के अधीन अत्यधिक राहत का विषय बना दी गर्इ है; या

(iv) इस अधिनियम के अधीन अत्यधिक हानि या अवक्षयण मोक या कोर्इ अन्य मोक संगणित किया गया है।]

7क[स्पष्टीकरण 3.–इस धारा के अधीन निर्धारण या पुन:निर्धारण के प्रयोजनार्थ, निर्धारण अधिकारी, ऐसे किसी पुरोधरण की बाबत आय का, जो निर्धारण से छूट गर्इ है, और ऐसा पुरोधरण इस धारा के अधीन कार्यवाहियों के अनुक्रम में बाद में उसकी जानकारी में आया है, इस बात के होते हुए भी, निर्धारण या पुन:निर्धारण कर सकेगा कि ऐसे पुरोधरण के कारणों को धारा 148 की उपधारा (2) के अधीन अभिलिखित कारणों में सम्मिलित नहीं किया गया है।]

 

98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।

99. परिपत्र [फा.सं. 45ए/180/52-आर्इ.टी.], तारीख 6.12.1955 देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लाज़ के लिये देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "की, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह राय है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. "विश्वास करने का कारण है", "निर्धारण" और "पुन:निर्धारण" पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

4. "निर्धारण" और "पुन:निर्धारण" पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

5. "निर्धारण" और "पुन:निर्धारण" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

6. "तात्विक तथ्य" और "अनिवार्यत: प्रकटीकरण नहीं होगा" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

6क. "असफलता" पद के अर्थ के लिये देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

7. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

7क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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