आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 145क

कतिपय मामलों में लेखा पद्धति

धारा

धारा संख्या

145क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

कतिपय मामलों में लेखा पद्धति

कतिपय मामलों में लेखा पद्धति

78[कतिपय मामलों में लेखा पद्धति

145क. ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए,–

(i) सूची का मूल्यांकन, धारा 145 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित आय संगणना और प्रकटन मानकों के अनुसार संगणित वास्तविक लागत या शुद्ध वसूलनीय मूल्य के निम्नतर पर किया जाएगा;

(ii) माल या सेवाओं के क्रय और विक्रय तथा सूची के मूल्यांकन का, मूल्यांकन की तारीख को, निर्धारिती द्वारा माल या सेवा को उसके अवस्थान से उस स्थान और स्थिति में लाने के लिए वास्तविक रूप से संदत्त या उपगत किसी कर, शुल्क, उपकर या फीस (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) की रकम को सम्मिलित करने के लिए समायोजन किया जाएगा;

(iii) सूची का मूल्यांकन, जो ऐसी प्रतिभूति है, जिसे किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं किया गया है या सूचीबद्ध है, किंतु उसे समय-समय पर नियमित रूप से मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में कोट नहीं किया गया है, वास्तविक लागत पर धारा 145 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित आय संगणना और प्रकटन मानकों के अनुसार प्रारंभिक रूप से मान्यता प्रदान की गर्इ वास्तविक लागत पर किया जाएगा;

(iv) सूची, जो खंड (iii) में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों से भिन्न प्रतिभूति है, का मूल्यांकन धारा 145 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित आय संगणना और प्रकटन मानकों के अनुसार वास्तविक लागत या शुद्ध वसूलनीय मूल्य के निम्नतर पर किया जाएगा:

परंतु सूची, जो किसी अनुसूचित बैंक या किसी लोक वित्तीय संस्था द्वारा धारित प्रतिभूतियां हैं, का मूल्यांकन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस संबंध में जारी वर्तमान दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए, धारा 145 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित आय संगणना और प्रकटन मानकों के अनुसार किया जाएगा:

परंतु यह और कि प्रतिभूतियों की वास्तविक लागत और शुद्ध वसूलनीय मूल्य की तुलना प्रवर्गवार की जाएगी।

स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी कर, शुल्क, उपकर या फीस में (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो), ऐसे संदाय के फलस्वरूप उद्भूत होने वाले किसी अधिकार के होते हुए भी ऐसे सभी संदायों को सम्मिलित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण 2–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(क) ''लोक वित्तीय संस्था'' पद का वही अर्थ होगा, जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (72) में उसका है;

(ख) ''मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज'' पद का वही अर्थ होगा, जो धारा 43 के खंड (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में उसका है;

(ग) ''अनुसूचित बैंक'' पद का वही अर्थ होगा, जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है।

 

78. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2017 से भूतलक्षी प्रभाव से धारा 145क के स्थान पर धारा 145क और 145ख प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 145क निम्नलिखित प्रकार थी।

'145क. कतिपय मामलों में लेखा पद्धति.-धारा 145 में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी,-

() "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय के अवधारण के प्रयोजनों के लिए माल के क्रय और विक्रय तथा सूची का मूल्यांकन,–

(i) निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से लागू की जाने वाली लेखा पद्धति के अनुसार होगा;

(ii) निर्धारिती द्वारा माल को उसके अवस्थान स्थल पर और मूल्यांकन की तारीख की स्थिति में लाने के लिए वास्तव में संदत्त या उपगत किसी कर, शुल्क, उपकर या फीस (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) की रकम को सम्मिलित करने के लिए समायोजित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी कर, शुल्क, उपकर या फीस (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) के अंतर्गत, ऐसे संदाय के परिणामस्वरूप उद्भूत किसी अधिकार के होते हुए भी, सभी ऐसे संदाय आएंगे;

() किसी निर्धारिती द्वारा, यथास्थिति प्रतिकर या वर्धित प्रतिकर पर प्राप्त ब्याज उस वर्ष की आय समझा जाएगा, जिसमें वह प्राप्त होता है।'

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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