आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 145क

कुछ मामलों में लेखा की विधि

धारा

धारा संख्या

145क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

कुछ मामलों में लेखा की विधि

कुछ मामलों में लेखा की विधि

28[कुछ मामलों में लेखा पद्धति

145क. धारा 145 में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी ''कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय अवधारित करने के प्रयोजनों के लिए माल के क्रय और विक्रय का मूल्यांकन तथा सूची–

() निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से प्रयुक्त लेखा पद्धति के अनुसार होगी; और

() माल को उसके स्थान पर और मूल्यांकन की तारीख की स्थिति में लाने के लिए निर्धारिती द्वारा वास्तव में अदा या उपगत कोर्इ कर, शुल्क, उपकर या फीस (उसका जो भी नाम हो) की राशि शामिल करने के लिए आगे समायोजित की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए तत्समय लागू किसी विधि के अधीन किसी कर, शुल्क, उपकर या फीस (उसका जो भी नाम हो) में ऐसे भुगतान के परिणामस्वरूप उत्पन्न किसी अधिकार के होते हुए भी, ऐसे सब भुगतान शामिल होंगे।]

 

28. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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