आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 144खक

कतिपय मामलों में आयुक्त को निर्देश

धारा

धारा संख्या

144खक

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2013

कतिपय मामलों में आयुक्त को निर्देश

कतिपय मामलों में आयुक्त को निर्देश

वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से धारा 144ख के पश्चात् निम्नलिखित धारा 144खक अंत:स्थापित की जाएगी :

92[कतिपय मामलों में आयुक्त को निर्देश

144खक. (1) यदि, निर्धारण अधिकारी का, उसके समक्ष निर्धारण या पुनर्निर्धारण कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर, उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यो को ध्यान में रखते हुए, यह विचार है कि किसी ठहराव को अध्याय 10क के अर्थांतर्गत किसी अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित करना और ऐसे किसी ठहराव का परिणाम अवधारित करना आवश्यक है तो वह इस संबंध में आयुक्त को निर्देश कर सकेगा।

(2) यदि आयुक्त की, उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश प्राप्त होने पर, यह राय है कि अध्याय 10क के उपबंधों का अवलंब लेना अपेक्षित है तो वह एक सूचना, उसमें ऐसी राय के कारणों और आधार को उपवर्णित करते हुए निर्धारिती को आक्षेप, यदि कोर्इ हों, प्रस्तुत करने के लिए और निर्धारिती को साठ दिन से अनधिक की ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, सुनवार्इ का अवसर देने के लिए जारी करेगा।

(3) यदि निर्धारिती उपधारा (2) के अधीन जारी की गर्इ सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर सूचना के प्रति कोर्इ आक्षेप प्रस्तुत नहीं करता है तो आयुक्त ऐसे निदेश जारी करेगा, जो वह ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा करने के संबंध में ठीक समझे।

(4) यदि निर्धारिती प्रस्तावित कार्यवाही के प्रति आक्षेप करता है और आयुक्त का, मामले में निर्धारिती की सुनवार्इ करने के पश्चात् निर्धारिती के स्पष्टीकरण के प्रति समाधान नहीं होता है तो वह उस मामले में ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा के प्रयोजन के लिए अनुमोदनकर्ता पैनल को निर्देश करेगा।

(5) यदि आयुक्त का, निर्धारिती की सुनवार्इ करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि अध्याय 10क के उपबंधों का अवलंब नहीं लिया जाए तो वह लिखित आदेश द्वारा उसकी संसूचना, निर्धारिती को एक प्रति के साथ, निर्धारण अधिकारी को देगा।

(6) अनुमोदनकर्ता पैनल, उपधारा (4) के अधीन आयुक्त से निर्देश प्राप्त होने पर, ठहराव को अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा की बाबत, जिसके अंतर्गत उस पूर्ववर्ष या उन पूर्ववर्षों को विनिर्दिष्ट करना भी है, जिनके लिए ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में ऐसी घोषणा लागू होगी, ऐसे निदेश जारी करेगा, जो वह ठीक समझे।

(7) उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश तब तक नहीं जारी किया जाएगा जब तक ऐसे निदेशों के संबंध में, जो, यथास्थिति, निर्धारिती के हित या राजस्व के हित के प्रतिकूल हों, निर्धारिती और निर्धारण अधिकारी को सुनवार्इ का अवसर न दे दिया गया हो।

(8) अनुमोदनकर्ता पैनल, उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश जारी करने से पूर्व,–

(i) यदि उसकी यह राय है कि मामले में कोर्इ और जांच आवश्यक है, तो आयुक्त को ऐसी जांच करने या किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी द्वारा जांच कराने तथा ऐसी जांच के परिणामों वाली एक रिपोर्ट उसे प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा; या

(ii) मामले से संबंधित ऐसे अभिलेखों को मंगा सकेगा और उनकी परीक्षा कर सकेगा, जो वह ठीक समझे; या

(iii) निर्धारिती से ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा, जो वह निदेश दे।

(9) यदि अनुमोदनकर्ता पैनल के सदस्यों में किसी मुद्दे पर मतभेद है तो उस मुद्दे का विनिश्चय सदस्यों के बहुमत के अनुसार किया जाएगा।

(10) निर्धारण अधिकारी, उपधारा (3) के अधीन, आयुक्त या उपधारा (6) के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल के निदेशों की प्राप्ति पर, ऐसे निदेशों और अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्यवाहियों को पूरा करने की कार्यवाही आरंभ करेगा।

(11) यदि उपधारा (6) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश में यह विनिर्दिष्ट है कि ऐसे ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा ऐसे किसी पूर्ववर्ष से भिन्न किसी पूर्ववर्ष के लिए लागू होती है, जिससे उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्यवाहियां तात्पर्यित हैं, तो निर्धारण अधिकारी ऐसे अन्य पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष की किसी निर्धारण या पुन:निर्धारण की कार्यवाहियों को पूरा करते समय ऐसे निदेशों और अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार ऐसा करेगा और उसके लिए सुसंगत निर्धारण वर्ष के संबंध में उस मुद्दे पर नए सिरे से निदेश लेना आवश्यक नहीं होगा।

(12) यदि अध्याय 10क के उपबंधों के अधीन आदेश में कोर्इ कर परिणाम अवधारित किए गए हैं तो निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारण या पुन:निर्धारण संबंधी कोर्इ आदेश, आयुक्त के पूर्व अनुमोदन के बिना पारित नहीं किया जाएगा।

(13) उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश उस मास के, जिसमें उपधारा (4) के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल द्वारा निर्देश प्राप्त किया गया था, अंत से छह मास की अवधि के पश्चात् जारी नहीं किया जाएगा।

(14) उपधारा (6) के अधीन अनुमोदनकर्ता द्वारा जारी निदेश निम्नलिखित पर आबद्धकर होंगे–

(i) निर्धारिती; और

(ii) आयुक्त और उसके अधीनस्थ आय-कर प्राधिकारी,

और अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन ऐसे निदेशों के विरुद्ध कोर्इ अपील नहीं की जाएगी।

(15) केंद्रीय सरकार, इस धारा के प्रयोजनों के लिए यथावश्यक एक या अधिक अनुमोदनकर्ता पैनल गठित कर सकेगी और प्रत्येक पैनल में तीन सदस्य, जिसके अंतर्गत अध्यक्ष भी हैं, होंगे।

(16) अनुमोदनकर्ता पैनल का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होगा जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है और–

(i) एक सदस्य मुख्य आय-कर आयुक्त की पंक्ति से अन्यून भारतीय राजस्व सेवा का सदस्य होगा; और

(ii) एक सदस्य प्रत्यक्ष-कर, कारबार लेखा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पद्धतियों जैसे मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाला शिक्षाविद या विद्वान होगा।

(17) अनुमोदनकर्ता पैनल की अवधि साधारणत: एक वर्ष होगी और समय-समय पर तीन वर्ष की अवधि तक बढ़ार्इ जा सकेगी।

(18) अनुमोदनकर्ता पैनल का अध्यक्ष और सदस्य पैनल को किए गए निर्देशों पर विचार करने के लिए, जब कभी अपेक्षित हो, बैठक करेंगे और उन्हें ऐसा पारिश्रमिक दिया जाएगा, जो विहित किया जाए।

(19) इस धारा के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल को प्रदत्त शक्तियों के अलावा उसके पास वे शक्तियां होंगी, जो धारा 245प के अधीन अग्रिम विनिर्णय प्राधिकरण में निहित हैं।

(20) बोर्ड अनुमोदनकर्ता पैनल को उतने कर्मचारी उपलब्ध कराएगा जो अधिनियम के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल की शक्तियों के दक्षतापूर्ण प्रयोग और कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक हैं।

(21) बोर्ड, अनुमोदनकर्ता पैनल के दक्ष कार्यकरण और उपधारा (4) के अधीन प्राप्त निर्देशों के शीघ्र निपटान के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगा।

स्पष्टीकरणउपधारा (13) में निर्दिष्ट अवधि की गणना में, निम्नलिखित को अपवर्जित किया जाएगा:–

(i) उस तारीख, जिसको धारा 90  या धारा 90क में निर्दिष्ट करार के अधीन सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से अनुमोदनकर्ता पैनल द्वारा आयुक्त को जांच कराए जाने का पहला निदेश जारी किया गया है, से आरंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको इस प्रकार अनुरोध की अंतिम सूचना अनुमोदनकर्ता पैनल को प्राप्त होती है समाप्त होने वाली अवधि, या एक वर्ष, जो भी कम हो;

(ii) वह अवधि जिसके दौरान अनुमोदनकर्ता पैनल की कार्यवाही किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोकी गर्इ हो :

परंतु जहां पूर्वोक्त समय या अवधि के अपवर्जन के ठीक पश्चात् अनुमोदनकर्ता पैनल को निदेश जारी करने के लिए उपलब्ध अवधि साठ दिन से कम है वहां ऐसी शेष अवधि का विस्तार साठ दिनों तक किया जाएगा और छह मास की पूर्वोक्त अवधि को तदनुसार विस्तारित किया गया माना जाएगा।

 

92. पूर्व में, धारा 144खक वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2014 से अंत:स्थापित की जा रही थी और वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से धारा 144खक का लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व धारा धारा 158खक इस प्रकार थी :

" धारा 144खक. कतिपय मामलों में आयुक्त को निर्देश.–(1) यदि निर्धारण अधिकारी का, उसके समक्ष निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर, उपलब्ध सामग्री और साक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, यह विचार है कि किसी ठहराव को अध्याय 10क के अर्थांतर्गत किसी अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित करना और ऐसे ठहराव के परिणाम अवधारित करना आवश्यक है तो वह इस संबंध में आयुक्त को निर्देश कर सकेगा।

(2) यदि आयुक्त की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश प्राप्त होने पर, यह राय है कि अध्याय 10क के उपबंधों का अवलंब लेना अपेक्षित है तो एक नोटिस, उसमें ऐसी राय के कारणों और आधार को उल्लिखित करते हुए निर्धारिती को अक्षेप, यदि कोर्इ हों, प्रस्तुत करने के लिए और निर्धारिती को साठ दिन से अनधिक की ऐसी अवधि के भीतर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, सुनवार्इ का अवसर प्रदान करते हुए, जारी करेगा।

(3) यदि निर्धारिती उपधारा (2) के अधीन जारी किए नोटिस में विनिर्दिष्ट समय के भीतर नोटिस के प्रति कोर्इ आक्षेप प्रस्तुत नहीं करता है तो आयुक्त ऐसे निदेश जारी करेगा, जो वह ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित करने के संबंध में ठीक समझे।

(4) यदि निर्धारिती प्रस्तावित कार्यवाही के प्रति आक्षेप करता है और आयुक्त का मामले में निर्धारिती की सुनवार्इ करने के पश्चात् निर्धारिती के स्पष्टीकरण के प्रति समाधान नहीं होता है तो वह उस मामले में ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित करने के प्रयोजन के लिए अनुमोदनकर्ता पैनल को निर्देश करेगा।

(5) यदि आयुक्त का निर्धारिती के पक्ष को सुनने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि अध्याय 10क के उपबंधों का अवलंब नहीं लिया जाना चाहिए तो वह लिखित आदेश द्वारा उसकी संसूचना, निर्धारिती को एक प्रति के साथ, निर्धारण अधिकारी को देगा।

(6) अनुमोदनकर्ता पैनल, उपधारा (4) के अधीन आयुक्त से निर्देश प्राप्त होने पर, ठहराव को अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित करने के संबंध में, जिसके अंतर्गत उस पूर्ववर्ष या उन पूर्ववर्षों को विनिर्दिष्ट करना भी है, जिनके लिए ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में ऐसी घोषणा लागू होगी, ऐसे निदेश जारी करेगा, जो वह ठीक समझे।

(7) उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक ऐसे निदेशों के संबंध में, जो, यथास्थिति, निर्धारिती के हित या राजस्व के हित के प्रतिकूल हों, निर्धारिती और निर्धारण अधिकारी को सुनवार्इ का अवसर न दे दिया गया हो।

(8) अनुमोदनकर्ता पैनल, उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश जारी करने से पूर्व,–

(i) यदि उसकी यह राय है कि मामले में कोर्इ और जांच आवश्यक है, आयुक्त को ऐसी और जांच करने या किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी द्वारा ऐसी और जांच कराने तथा ऐसी जांच के परिणामों वाली रिपोर्ट उसे प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा; या

(ii) मामले से संबंधित ऐसे अभिलेखों को मंगा सकेगा और उनकी परीक्षा कर सकेगा, जो ठीक समझे; या

(iii) निर्धारिती से ऐसा दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा, जो वह इस प्रकार निदेश दे।

(9) यदि अनुमोदनकर्ता पैनल के सदस्यों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद है तो उस मुद्दे का विनिश्चय सदस्यों के बहुमत के अनुसार किया जाएगा।

(10) उपधारा (6) के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल द्वारा या उपधारा (3) के अधीन आयुक्त द्वारा जारी किया गया प्रत्येक निदेश निर्धारण अधिकारी पर आबद्धकर होगा और निर्धारण अधिकारी, निदेशों के प्राप्त होने पर, निदेशों और अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्यवाहियों को पूरा करने के लिए अग्रसर होगा।

(11) यदि उपधारा (6) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश में यह विनिर्दिष्ट है कि ऐसे ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा ऐसे किसी पूर्ववर्ष के लिए लागू होती है, जिससे उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्यवाहियां तात्पर्यित हैं, तो निर्धारण अधिकारी ऐसे अन्य पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष की किसी निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी कार्यवाहियों को पूरा करते समय ऐसे निदेशों और अध्याय 10क के उपबंधों के अनुसार ऐसा करेगा और उसके लिए उस मुद्दे पर सुसंगत निर्धारण वर्ष के संबंध में नए सिरे से निदेश लेना आवश्यक नहीं होगा।

(12) निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारण या पुन:निर्धारण संबंधी कोर्इ आदेश, आयुक्त के पूर्व अनुमोदन के बिना उस दशा में पारित नहीं किया जाएगा, यदि किसी ठहराव की अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषणा करते हुए उपधारा (6) या उपधारा (3) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश के अनुसरण में अध्याय 10क के उपबंधों के अधीन आदेश में कोर्इ कर परिणाम अवधारित किए गए हैं।

(13) उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश उस मास के अंत से, जिसमें उपधारा (4) के अधीन अनुमोदनकर्ता पैनल द्वारा निर्देश प्राप्त किया गया था, छह मास की अवधि के पश्चात् जारी नहीं किया जाएगा।

(14) बोर्ड, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, एक अनुमोदनकर्ता पैनल का गठन करेगा, जो तीन से अन्यून ऐसे सदस्यों से मिलकर बनेगा, जो,–

(i) ऐसे आय-कर प्राधिकारी हों जो आयुक्त की पंक्ति से नीचे की पंक्ति के न हों; और

(ii) भारतीय विधिक सेवा का ऐसा कोर्इ अधिकारी, जो संयुक्त सचिव, भारत सरकार की पंक्ति से नीचे की पंक्ति का न हो।

(15) बोर्ड, अनुमोदनकर्ता पैनल के दक्ष कार्यकरण और उपधारा (4) के अधीन प्राप्त निर्देशों के शीघ्र निपटान के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगा।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

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