आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 143

निर्धारण

धारा

धारा संख्या

143

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

निर्धारण

निर्धारण

निर्धारण

143. (1) जहां धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना के उत्तर में कोई विवरणी दी गई है, वहां ऐसी विवरणी पर कार्यवाही निम्नलिखित रीति से की जाएगी, अर्थात् :—

() कुल आय या हानि की संगणना निम्नलिखित समायोजन किए जाने के पश्चात् की जाएगी, अर्थात् :-

(i) विवरणी में कोई गणित संबंधी गलती ;

(ii) कोई गलत दावा, यदि ऐसा गलत दावा विवरणी में की किसी सूचना से प्रकट होता है ;

(iii) दावा की गई हानि की नामंजूरी, यदि पूर्ववर्ष की विवरणी जिसके लिए हानि के मुजरे का दावा किया गया था धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख से परे प्रस्तुत की गई थी;

(iv) लेखापरीक्षा रिपोर्ट में उपदर्शित 71कक[व्यय की नामंजूरी या आय में वृद्धि किन्तु] जिसे विवरणी में कुल आय की संगणना के लेखे नहीं लिया गया है;

(v)71कख[धारा 10कक के अधीन या "ग— 'कतिपय आयों की कटौतियां' शीर्ष के अधीन अध्याय 6क के किसी उपबंध के अधीन] कटौती की नामंजूरी यदि विवरणी धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख से परे प्रस्तुत की गई है; या

(vi) प्ररूप 26कध या प्ररूप 16क या प्ररूप 16 में आने वाली आय में वर्धन जिसे विवरणी में कुल आय की संगणना में सम्मिलित नहीं किया गया है :

परंतु ऐसा कोई समायोजन सिवाय निर्धारिती को लिखित या किसी इलैक्ट्रानिकी ढंग के संसूचना देने के सिवाय नहीं किया जाएगा :

परंतु यह और कि निर्धारिती से प्राप्त प्रत्युत्तर, यदि कोई हो, पर कोई समायोजन करने से पूर्व विचार किया जाएगा और उस समय जहां ऐसी संसूचना जारी करने से तीस दिन के भीतर कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं होता है, ऐसा समायोजन किया जाएगा:

72[परंतु यह भी कि 1 अप्रैल, 2018 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए प्रस्तुत की गई किसी विवरणी के संबंध में उपखंड (vi) के अधीन कोई समायोजन नहीं किया जाएगा;]

() कर 73[, ब्याज और फीस] की, यदि कोई हो, संगणना खंड () के अधीन संगणित कुल आय के आधार पर की जाएगी ;

() निर्धारिती द्वारा संदेय राशि या उसे देय प्रतिदाय की रकम का अवधारण खंड () के अधीन संगणित कर 73[, ब्याज और फीस], यदि कोई हो, का स्रोत पर काटे गए किसी कर, स्रोत पर संगृहीत किसी कर, संदत्त किसी अग्रिम कर, 73क[धारा 89 के अधीन अनुज्ञेय कर की कोई राहत] धारा 90 या धारा 90क के अधीन किसी करार के अंतर्गत अनुज्ञेय किसी राहत या धारा 91 के अधीन अनुज्ञेय किसी राहत, अध्याय 8 के भाग क के अधीन अनुज्ञेय किसी रिबेट, स्वत:निर्धारण के आधार पर संदत किसी कर और कर 74[, ब्याज या फीस] के रूप में अन्यथा संदत्त किसी रकम से समायोजन करने के पश्चात् किया जाएगा ;

() एक संसूचना खंड () के अधीन निर्धारिती द्वारा संदाय किए जाने के लिए अवधारित राशि या उसे देय प्रतिदाय की रकम विनिर्दिष्ट करते हुए तैयार की जाएगी या बनार्ई जाएगी और निर्धारिती को भेजी जाएगी ; और

() खंड () के अधीन अवधारण के अनुसरण में निर्धारिती को देय प्रतिदाय की रकम निर्धारिती को अनुदत्त की जाएगी :

परंतु यह कि संसूचना निर्धारिती को ऐसे मामले में भी भेजी जाएगी जहां निर्धरिती द्वारा विवरणी में घोषित हानि समायोजित कर दी गई है किन्तु उसके द्वारा कोई कर 74क[, ब्याज या फीस] संदेय नहीं है या उसे कोई प्रतिदाय देय नहीं है :

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोई संसूचना उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें विवरणी दी गई है, अंत से 71कग[नौ मास] की समाप्ति के पश्चात् नहीं भेजी जाएगी।

स्पष्टीकरण. — इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,—

() "विवरणी में की किसी सूचना से प्रकट गलत दावा" से विवरणी का, किसी प्रविष्टि के आधार पर, ऐसा दावा अभिप्रेत है,—

(i) जो किसी ऐसी मद के संबंध में है जो ऐसी विवरणी में की उसी मद या किसी अन्य मद की किसी अन्य प्रविष्टि से असंगत है ;

(ii) जिसकी बाबत ऐसी प्रविष्टि को सिद्ध करने के लिए दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना इस अधिनियम के अधीन उस रूप में नहीं दी गई है ; या

(iii) जो किसी कटौती की बाबत है जहां ऐसी कटौती उस विनिर्दिष्ट कानूनी सीमा से अधिक हो जाती है जो धन राशि या प्रतिशत या अनुपात या उसके भाग के रूप में व्यक्त की जा सकती है ;

() विवरणी की अभिस्वीकृति उस दशा में संसूचना समझी जाएगी जहां खंड () के अधीन निर्धारिती द्वारा कोई राशि संदेय नहीं है या उसे प्रतिदेय नहीं है और जहां खंड () के अधीन कोई समायोजन नहीं किया गया है।

(1क) उपधारा (1) के अधीन विवरणियों पर कार्यवाही करने के प्रयोजनों के लिए, बोर्ड उक्त उपधारा के अधीन अपेक्षित रूप में निर्धारिती द्वारा संदेय कर या उसे देय प्रतिदाय का शीघ्रतापूर्वक अवधारण करने की दृष्टि से विवरणियों पर केन्द्रीकृत रूप में कार्यवाही करने के लिए स्कीम बना सकेगा।

(1ख) जैसा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1क) के अधीन बनाई गई स्कीम को प्रभावी रूप देने के प्रयोजन के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी की विवरणियों पर कार्यवाही किए जाने के संबंध में इस अधिनियम के कोई उपबंध लागू नहीं होंगे या ऐसे उपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ लागू होंगे जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं; बहरहाल ऐसा कोई निदेश 31 मार्च, 2012 के पश्चात् जारी नहीं किया जाएगा।

(1ग) उपधारा (1ख) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, उपधारा (1क) के अधीन बनाई गई स्कीम के साथ, अधिसूचना के जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी।

75[(1घ) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (2) के अधीन निर्धारिती को सूचना जारी की गई है, वहां किसी विवरणी पर कार्यवाही करना आवश्यक नहीं होगा:

परंतु इस उपधारा के उपबंध, 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए प्रस्तुत किसी विवरणी को लागू नहीं होंगे।]

(2) जहां धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना के उत्तर में कोई विवरणी दी गई है, वहां, यदि, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या विहित आय-कर प्राधिकारी यदि यह सुनिश्चित करना आवश्यक या समीचीन समझता है कि निर्धारिती ने कम आय का विवरण नहीं दिया है या आधिक्य हानि संगणित नहीं की है या किसी रीति में कम कर संदत्त नहीं किया गया है, निर्धारिती को उससे यह अपेक्षा करते हुए एक सूचना की तामील की जाएगी कि वह उसमें विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख को निर्धारण अधिकारी के कार्यालय में या तो उपस्थित हो या निर्धारण प्राधिकारी के समक्ष ऐसे साक्ष्य को, जिस पर निर्धारिती उस विवरणी के समर्थन में निर्भर करता है, पेश करे या करवाए :

परंतु इस उपधारा के अधीन निर्धारिती पर किसी सूचना की तामील उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें विवरणी दी जाती है, 75क[तीन मास] के अवसान के पश्चात् नहीं की जाएगी।

(3) 76[ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट दिन को, जो उपधारा (2)] या ऐसे साक्ष्य की, जिन्हें निर्धारिती पेश करे और ऐसे अन्य साक्ष्य की यथाशक्य पश्चात्, जिसकी निर्धारण अधिकारी विनिर्दिष्ट मुद्दों पर अपेक्षा करे, सुनवाई और सभी सुसंगत तथ्यसामग्री को ध्यान में रखने के पश्चात्, जो उसने एकत्रित की है; निर्धारण अधिकारी, लिखित आदेश द्वारा, निर्धारिती की कुल आय या हानि का निर्धारण करेगा और ऐसे निर्धारण के आधार पर उसके द्वारा संदेय राशि या उसको देय किसी रकम के प्रतिदाय की राशि का अवधारण करेगा :

76ककक[परंतु,-

(क) धारा 10 के खंड (21) में निर्दिष्ट अनुसंधान संगम;

(ख) धारा 10 के खंड (22ख) में निर्दिष्ट समाचार एजेंसी;

(ग) धारा 10 के खंड (23क) में निर्दिष्ट संगम या संस्था;

(घ) धारा 10 के खंड (23ख) में निर्दिष्ट संस्था,

की दशा में, जिससे धारा 139 की उपधारा (4ग) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है, ऐसे अनुसंधान संगम, समाचार एजेंसी, संगम या संस्था की कुल आय या हानि का निर्धारण करने वाला कोई आदेश, धारा 10 के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, निर्धारण अधिकारी द्वारा नहीं किया जाएगा, यदि,-

(i) निर्धारण अधिकारी ने ऐसे अनुसंधान संगम, समाचार एजेंसी, संगम या संस्था द्वारा, यथास्थिति, खंड (21) या खंड (22ख) या खंड (23क) या खंड (23ख) के उपबंधों के उल्लंघन में केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को सूचित नहीं किया है, जहां उसके विचार में ऐसा उल्लंघन हुआ है; और

(ii) ऐसे अनुसंधान संगम या अन्य संगम या संस्था को अनुदत्त अनुमोदन वापस ले लिया गया है या ऐसी समाचार एजेंसी या संगम या संस्था के संबंध में जारी अधिसूचना विखंडित कर दी गई है:]

76ककख[परंतु यह और कि जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट कोई निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट कोई न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट कोई अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था या धारा 11 में निर्दिष्ट कोई न्यास या संस्था ने, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) के पन्द्रहवें परंतुक के स्पष्टीकरण 2 या धारा 12कख की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित कोई विनिर्दिष्ट उल्लंघन किया है, तो वह, -

(क) प्रधान आयुक्त या आयुक्त को, यथास्थिति, अनुमोदन या रजिस्ट्रीकरण वापस लेने के लिए निर्देश भेजेगा; और

(ख) ऐसी निधि या संस्था या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की कुल आय या हानि का निर्धारण करने वाला कोई आदेश, उसके द्वारा धारा 10 के खंड (23ग) के पन्द्रहवें परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) या धारा 12कख की उपधारा (4) के खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा पारित आदेश को प्रभावी किए बिना नहीं किया जाएगा:

परंतु यह भी कि] जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था के क्रियाकलाप उन सभी शर्तों या उनमें से किन्हीं के अनुसार नहीं चलाए जा रहे हैं जिनके अधीन रहते हुए ऐसे विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था का अनुमोदन किया गया था वहां, वह, संबद्ध विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को प्रस्तावित अनुमोदन वापस लिए जाने के संबंध में कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार को अनुमोदन वापस लेने की सिफारिश करेगा और वह सरकार आदेश द्वारा अनुमोदन वापस ले सकेगी तथा आदेश की प्रति संबद्ध विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था और निर्धारण अधिकारी को अग्रेषित करेगी।

2कक[***]

77[(3क) केंद्रीय सरकार, उपधारा (3) 76क[या धारा 144] के अधीन निर्धारिती की कुल आय या हानि का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कोई स्कीम बना सकेगी, जिससे निम्नलिखित के द्वारा बृहत्तर दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लाया जा सके,—

() जहां तक प्रौद्योगिकीय रूप से साध्य हो, कार्यवाहियों के अनुक्रम में निर्धारण अधिकारी और निर्धारिती के बीच इंटरफेस का उन्मूलन करना;

() आवश्यकतानुसार और कृत्यकारी विशेषज्ञता के माध्यम से संसाधनों का अनुकूल उपयोग करना;

() क्रियाशील अधिकारिता सहित टीम आधारित निर्धारण को आरंभ करना।

(3ख) केंद्रीय सरकार, उपधारा (3क) के अधीन बनाई गई स्कीम को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि कुल आय या हानि के निर्धारण से संबंधित इस अधिनियम के उपबंध ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ, जैसा अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, लागू नहीं होंगे या लागू होंगे:

परंतु यह कि 31 मार्च, 77कक[2021] के पश्चात् कोई निदेश जारी नहीं किया जाएगा।

(3ग) उपधारा (3क) और उपधारा (3ख) के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना, जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।]

77कख[(3घ) उपधारा (3क) और उपधारा (3ख) में अन्तर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् यथास्थिति, उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन किए गए निर्धारण को लागू नहीं होगी।]

(4) जहां इस धारा की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन नियमित निर्धारण किया जाता है, वहां,—

() उपधारा (1) के अधीन निर्धारिती द्वारा संदत्त कोई कर या ब्याज ऐसे नियमित निर्धारण के मद्दे दिया गया समझा जाएगा;

() यदि नियमित निर्धारण पर कोई प्रतिदाय शोध्य नहीं है, या उपधारा (1) के अधीन लौटाई गई रकम नियमित निर्धारण पर प्रतिदेय रकम से अधिक है, तो इस प्रकार लौटाई गई संपूर्ण या अधिक रकम निर्धारिती द्वारा संदेय कर समझी जाएगी, और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(5) [वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से लोप किया गया।]

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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