मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा आस्तियों के मूल्य का प्राक्कलन
55[मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा आस्तियों के मूल्य का प्राक्कलन
142क. (1) निर्धारण अधिकारी, निर्धारण या पुन:निर्धारण के प्रयोजनों के लिए, मूल्यांकन अधिकारी को किसी आस्ति, संपत्ति या विनिधान के मूल्य, जिसके अंतर्गत उचित बाजार मूल्य भी है, का प्राक्कलन करने और रिपोर्ट की एक प्रति उसे प्रस्तुत करने का निर्देश कर सकेगा।
(2) निर्धारण अधिकारी, उपधारा (1) के अधीन इस बात का कोर्इ निर्देश कर सकेगा कि उसका, निर्धारिती के लेखाओं की शुद्धता और पूर्णता के बारे में, समाधान हो गया है अथवा नहीं।
(3) मूल्यांकन अधिकारी को, उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी निर्देश पर आस्ति, संपत्ति या विनिधान के मूल्य का प्राक्कलन करने के प्रयोजन के लिए, वे सभी शक्तियां प्राप्त होंगी जो धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 38क के अधीन उसे प्राप्त हैं।
(4) मूल्यांकन अधिकारी, निर्धारिती को सुनवार्इ का अवसर देने के पश्चात्, ऐसे साक्ष्य पर, जो निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया जाए और उसके कब्जे से एकत्रित किसी अन्य साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात्, आस्ति, संपत्ति या विनिधान का मूल्य प्राक्कलित करेगा।
(5) मूल्यांकन अधिकारी, यदि निर्धारिती सहयोग नहीं करता है या उसके निदेशों का अनुपालन नहीं करता है तो अपनी सर्वोत्तम विवेकबुद्धि के अनुसार आस्ति, संपत्ति या विनिधान का मूल्य प्राक्कलित कर सकेगा।
(6) मूल्यांकन अधिकारी, उस मास के अंत से, जिसमें उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश किया जाता है, छह मास की अवधि के भीतर, यथास्थिति, उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन प्राक्कलन करने की रिपोर्ट की प्रति निर्धारण अधिकारी और निर्धारिती को भेजेगा।
(7) निर्धारण अधिकारी, मूल्यांकन अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त होने पर और निर्धारिती को सुनवार्इ का अवसर देने के पश्चात् निर्धारण या पुन:निर्धारण करने में ऐसी रिपोर्ट पर विचार कर सकेगा।
स्पष्टीकरण–इस धारा में, "मूल्यांकन अधिकारी" का वही अर्थ है जो धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 2 के खंड (द) में उसका है।]
55. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.10.2014 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 15.11.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित और वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.7.2010 से संशोधित, धारा 142क निम्नानुसार थी :
"142क. कतिपय मामलों में मूल्यांकन अधिकारी द्वारा प्राक्कलन–(1) इस अधिनियम के अधीन कोर्इ निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, जहाँ धारा 69 या धारा 69ख में निर्दिष्ट किसी विनिधान के मूल्य या धारा 69क या धारा 69ख में निर्दिष्ट किसी सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु के मूल्य का या धारा 56 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी संपत्ति के उचित बाजार मूल्य का प्राक्कलन किया जाना अपेक्षित है, वहां निर्धारण अधिकारी, मूल्यांकन अधिकारी से ऐसे मूल्य का प्राक्कलन करने और उसे उसकी रिपोर्ट देने की अपेक्षा कर सकेगा।
(2) ऐसे मूल्यांकन अधिकारी को, जिसे उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश किया जाता है, ऐसे निर्देश के संबंध में कार्रवार्इ करने के प्रयोजनों के लिए, वे सभी शक्तियां प्राप्त होंगी जो उसे धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 38क के अधीन प्राप्त हैं।
(3) मूल्यांकन अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त होने पर, निर्धारण अधिकारी, निर्धारिती को सुनवार्इ का अवसर प्रदान करने के पश्चात्, ऐसा निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने में ऐसी रिपोर्ट पर विचार कर सकेगा:
परंतु इस धारा में की कोर्इ बात, 30 सितंबर, 2004 को या उससे पूर्व किए गए किसी निर्धारण के संबंध में और जहाँ ऐसा निर्धारण उस तारीख को या उससे पूर्व अंतिम और निश्चायक हो गया है, लागू नहीं होगी, सिवाय उन मामलों के जहां कि पुनर्निर्धारण धारा 153क के उपबंधों के अुनसार किया जाना अपेक्षित हो।
स्पष्टीकरण.--इस धारा में, "मूल्यांकन अधिकारी" का वही अर्थ है, जो उसका धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 2 के खंड (द) में है।"
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

