आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 142

मूल्यांकन से पहले जांच

धारा

धारा संख्या

142

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

मूल्यांकन से पहले जांच

मूल्यांकन से पहले जांच

निर्धारण के पूर्व जांच

88142. (1) इस अधिनियम के अधीन निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए 89[निर्धारण] अधिकारी किसी निर्धारण के पूर्व, ऐसे व्यक्ति पर, जिसने धारा 139 के अधीन विवरणी दी है, 90[या जिसके मामले में उस धारा की उपधारा (1) के अधीन विवरणी देने के लिए अनुज्ञात समय समाप्त हो गया है], ऐसी सूचना की तामील कर सकेगा जिसमें उससे अपेक्षा की जाएगी कि वह उसमें विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख को,–

91[(i) जहां ऐसे व्यक्ति ने 92[धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर] विवरणी नहीं दी है, वहां अपनी आय की या किसी अन्य व्यक्ति की आय की, जिसकी बाबत वह इस अधिनियम के अधीन निर्धार्य है, विहित प्ररूप में और विहित रीति93 से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उल्लिखित करते हुए, एक विवरणी दे, या]

94[(ii)] ऐसे लेखे या दस्तावेज पेश करे या पेश कराए जिनकी 95[निर्धारण] अधिकारी अपेक्षा करे, या

96[(iii)] 97ऐसे प्ररूप में और ऐसे मुद्दों या विषयों पर (जिनके अंतर्गत निर्धारिती की सब आस्तियों और दायित्वों का विवरण भी है, चाहे वे लेखाओं में सम्मिलित हो या न हो) जिनकी कि 98[निर्धारण] अधिकारी अपेक्षा करे, लिखित रूप में और विहित रीति से सत्यापित जानकारी दे :

परन्तु--

() लेखाओं में सम्मिलित न की गर्इ सब आस्तियों और दायित्वों का विवरण देने के लिए निर्धारिती से अपेक्षा करने से पूर्व 99[संयुक्त आयुक्त] का पूर्व अनुमोदन अभिप्राप्त किया जाएगा;

() 1[निर्धारण] अधिकारी पूर्ववर्ष से तीन वर्ष से अधिक पूर्व की कालावधि से सम्बद्ध कोर्इ लेखे पेश करने की अपेक्षा नहीं करेगा।

(2) किसी व्यक्ति की आय या हानि की बाबत पूरी जानकारी अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए 1[निर्धारण] अधिकारी ऐसी जांच कर सकेगा जैसी वह आवश्यक समझता है।

2[(2क) 3यदि अपने समक्ष कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर 4[निर्धारण] अधिकारी की निर्धारिती के लेखाओं की प्रकृति और जटिलता5 को और राजस्व के हित को ध्यान में रखते हुए, यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक है, तो वह 6[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] के पूर्व अनुमोदन से निर्धारिती को निदेश दे सकेगा कि वह धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित और इस निमित्त 6[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] द्वारा नामनिर्देशित किसी लेखापाल से लेखाओं की संपरीक्षा कराए और विहित प्ररूप में ऐसी संपरीक्षा की ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक् रूप में हस्ताक्षरित और सत्यापित रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिसमें ऐसी विशिष्टियां हों, जो विहित की जाए; या ऐसी अन्य विशिष्टियां हों, जिनकी 7[निर्धारण] अधिकारी अपेक्षा करे।

(2ख) उपधारा (2क) के उपबंध इस बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे कि निर्धारिती के लेखाओं की तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन या अन्यथा संपरीक्षा की गर्इ है।

(2ग) उपधारा (2क) के अधीन प्रत्येक रिपोर्ट निर्धारिती द्वारा 7[निर्धारण] अधिकारी को इतनी कालावधि के अन्दर दी जाएगी जितनी 7[निर्धारण] अधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए :

परन्तु 8[निर्धारण] अधिकारी इस निमित्त निर्धारिती द्वारा आवेदन किए जाने पर तथा किसी अच्छे और पर्याप्त कारण से उक्त कालावधि को इतनी अतिरिक्त कालावधि या कालावधियों तक बढ़ा सकेगा जितनी वह ठीक समझता है, किन्तु मूलत: नियत कालावधि और इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ कालावधि या कालावधियों का योग किसी भी दशा में उस तारीख से, जिसको उपधारा (2क) के अधीन निर्धारिती द्वारा निदेश प्राप्त किया जाता है, एक सौ अस्सी दिन से अधिक नहीं होगा।

(2घ) उपधारा (2क) के अधीन किसी संपरीक्षा के व्यय तथा उसके आनुषंगिक व्यय (जिनके अंतर्गत लेखापाल का पारिश्रमिक भी है) 9[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] द्वारा अवधारित किए जाएंगे; (जो अवधारणा अंतिम होगा) और निर्धारिती द्वारा संदत्त किए जाएंगे तथा ऐसे संदाय में व्यतिक्रम होने पर निर्धारिती से उस रीति से वसूल किए जा सकेंगे जो कर के बकाया की वसूली के लिए अध्याय 17घ में उपबंधित है।]

(3) निर्धारिती को, वहां के सिवाय जहां निर्धारण धारा 144 के अधीन किया जाता है, किसी ऐसी सामग्री की बाबत सुनवार्इ का अवसर दिया जाएगा जो उपधारा (2) के अधीन किसी जांच के 10[या उपधारा (2क) के अधीन किसी संपरीक्षा के] आधार पर एकत्रित की गर्इ है और निर्धारण के प्रयोजनों के लिए जिसका उपयोग किया जाना प्रस्थापित है।

11[(4) इस धारा के उपबंध, जैसे कि वे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 (1988 का 4) द्वारा उनके संशोधन के ठीक पूर्व थे, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण को और उसके संबंध में लागू होंगे और इस धारा में इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निदेशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उन उपबंधों के प्रति निर्देश हैं जो तत्समय प्रवृत्त थे और सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू होते थे।]

 

88. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

89. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

90. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, "अथवा जिसे धारा 139 की उपधारा (2) के अधीन नोटिस जारी किया गया है (चाहे विवरणी दी गर्इ हो या नहीं)" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले इटैलिक शब्द कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से प्रतिस्थापित किये गये।

91. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

92. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से "सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पूर्व" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

93. सत्यापन के प्ररूप के लिए देखिये नियम 14 जो निम्न रूप में होगा :

"मैं यह घोषित करता हूं कि मेरे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार विवरण। विवरणों में दी गर्इ जानकारी सही और पूर्ण है और इसमें दर्शाये गए अन्य विवरण सत्य हैं।"

94. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से पुनर्संख्यांकित।

95. यथोक्त द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

96. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से पुन: संख्यांकित।

97. देखिये नियम 14.

98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

99. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" के स्थान पर "उपायुक्त" रखा गया था।

1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

3. धारा 142(2क) के अधीन संपरीक्षा रिपोर्ट के लिए देखिये नियम 14क और प्ररूप सं. 6ख।

4. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

5. "जटिलता" शब्द के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

6. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

7. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

8. यथोक्त द्वारा "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

9. यथोक्त द्वारा "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

10. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

11. प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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