आत्म मूल्यांकन
10[स्वत: निर्धारण
11140क. 12[(1) 13[जहां इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पहले ही संदत्त की गर्इ कर की रकम को, यदि कोर्इ हो, हिसाब में लेने के पश्चात्] 14[यथास्थिति 15[धारा 115घ या धारा 115ज या] धारा 139 या धारा 142 16[या, धारा 148 या, 17[धारा 153क] या धारा 158खग,]] के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित किसी विवरणी के आधार पर कोर्इ कर संदेय है जहां,–
(i) इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पहले ही संदत्त की गर्इ कर की रकम, यदि कोर्इ हो;
(ii) स्रोत पर काटे गए या संगृहीत किए गए किसी कर;
(iii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गर्इ कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(iv) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गर्इ कर की किसी राहत; और
(v) धारा 155ञकक के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
को हिसाब में लेने के पश्चात्।
17क[वहां निर्धारिती, विवरणी देने के पूर्व, ऐसे कर का और साथ ही विवरणी देने में हुए किसी विलम्ब अथवा अग्रिम कर के संदाय में किसी व्यतिक्रम या विलंब के लिए, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन संदेय ब्याज का संदाय, करने का दायी होगा तथा विवरणी के साथ ऐसे कर और ब्याज के संदाय का सबूत होगा।]
17ख[स्पष्टीकरण.–जहां इस उपधारा के अधीन निर्धारिती द्वारा संदत्त रकम पूर्वोक्त कर और ब्याज के योग से कम पड़ती है, वहां इस प्रकार संदत्त रकम का समायोजन, पहले, पूर्वोक्त संदेय ब्याज के प्रति और अतिशेष का समायोजन, यदि कोर्इ हो, संदेय कर के प्रति किया जाएगा।]
17ग[(1क) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए,–
18[(i) धारा 234क के अधीन संदेय ब्याज की संगणना विवरणी में घोषित कुल आय के संबंध में कर की रकम पर की जाएगी, जिसमें से,–
(क) संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो;
(ख) स्रोत पर काटा गया या संगृहीत कोर्इ कर;
(ग) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गर्इ कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(घ) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गर्इ कर की कोर्इ राहत; और
(ड़) धारा 115ञकक के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
को घटा दिया जाएगा।]
(ii) धारा 115बट के अधीन संदेय ब्याज की संगणना विवरणी में घोषित अनुषंगी फायदों के कुल मूल्य पर कर की रकम पर की जाएगी जिसमें से संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, घटा दिया जाएगा।]
19[(1ख) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234ख के अधीन संदेय ब्याज की संगणना, यथास्थिति, निर्धारित कर के बराबर रकम पर या उस रकम पर, जिस तक संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम आता है, की जाएगी। ]
20[स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्धारित कर" से विवरणी में घोषित कुल आय पर वह कर अभिप्रेत है, जिसमें से,–
(i) किसी ऐसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत कर;
(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गर्इ कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(iii) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गर्इ कर की किसी राहत; और
(iv) धारा 115ञकक के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
को घटा दिया जाएगा।]
(2) 21[धारा 115ड़ या धारा 115च या] धारा 143 या धारा 144 के अधीन नियमित निर्धारण 22[या 23[धारा 153क या] धारा 158खग के अधीन निर्धारण] कर दिए जाने के पश्चात् उपधारा (1) के अधीन संदत्त रकम, 24[यथास्थिति, ऐसे नियमित निर्धारण या निर्धारण] मद्दे संदत्त की गर्इ समझी जाएगी।
25[(3) यदि कोर्इ निर्धारिती उपधारा (1) के अनुसार ऐसे संपूर्ण कर या ब्याज या उसके किसी भाग का अथवा दोनों का संदाय करने में असफल रहता है, तो वह, किन्हीं ऐसे अन्य परिणामों पर जो वह उपगत करे प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना असंदत्त रहे, कर या ब्याज अथवा दोनों की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा, और इस अधिनियम के सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
26[(4) इस धारा के उपबंध जैसे कि वे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 (1988 का 4) द्वारा उनके संशोधन के ठीक पूर्व थे, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण को और उसके संबंध में लागू होंगे और इस धारा में इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उन उपबंधों के प्रति निर्देश हैं जो तत्समय प्रवृत्त थे, और सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू होते थे।]
10. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित। मूल धारा वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
11. परिपत्र सं. 20(LXXXVI)-डी./1964(उद्धरण), तारीख 7.7.1964 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
12. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से प्रतिस्थापित।
13. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "जहां इस अधिनियम के किसी उपबंघ के अधीन पहले ही संदत्त की गर्इ कर की रकम, यदि कोर्इ हो, को हिसाब में लेने के पश्चात्" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
14. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 27.9.1991 से "धारा 139 या धारा 148" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
15. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
16. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "या यथास्थिति, धारा 148" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
17. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
17क. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, "वहां विवरणी दाखिल करने से पहले निर्धारिती ऐसा कर देने के लिए दायी होगा और विवरणी के साथ कर देने का ऐसा सबूत संलग्न किया जाएगा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
17ख. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
17ग. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) जो वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित की गर्इ थी, इस प्रकार थी:
"(1क) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234क के अधीन संदेय ब्याज की संगणना, विवरणी में घोषित कुल आय के संबंध में कर की रकम पर की जाएगी जिसमें से संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, और स्रोत पर कटौती किया गया या संगृहीत कोर्इ कर घटा दिया जाएगा।"
18. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (i) इस प्रकार था :
"(i) धारा 234क के अधीन संदेय ब्याज की संगणना, विवरणी में घोषित कुल आय पर कर की रकम पर की जाएगी जिसमें से संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, और स्रोत पर काटा गया या संगृहीत कोर्इ कर घटा दिया जाएगा;"
19. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
20. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
"स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्धारित कर" से विवरणी में घोषित कुल आय पर वह कर अभिप्रेत है, जिसमें से, किसी ऐसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया जाता है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत कर की रकम घटा दी जाएगी।"
21. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
22. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।
23. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
24. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "ऐसे नियमित निर्धारण" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
25. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से यथा प्रतिस्थापित की गयी थी।
26. प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

