विवरणी किसके द्वारा सत्यापित हो
विवरणी किसके द्वारा सत्यापित हो
140. धारा 115बघ या धारा 139 के अधीन विवरणी निम्नलिखित द्वारा सत्यापित की जाएगी–
(क) किसी व्यष्टि की दशा में,–
(i) स्वयं व्यष्टि द्वारा;
(ii) जहां वह भारत से अनुपस्थित है, वहां स्वयं व्यष्टि द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा;
(iii) जहां वह अपने कार्यों का पालन करने में मानसिक रूप से असमर्थ है वहां उसके संरक्षक द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी अन्य व्यक्ति द्वारा; और
(iv) जहां किसी अन्य कारण से, उस व्यष्टि के लिए विवरणी का सत्यापन करना संभव नहीं है वहां उसके द्वारा इस निमित्त सम्यक्त: प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा :
परन्तु उपखंड (ii) या (iv) में निर्दिष्ट मामले में विवरणी का सत्यापन करने वाले व्यक्ति के पास ऐसा करने के लिए व्यष्टि का विधिमान्य मुख्तारनामा हो जिसे विवरणी के साथ संलग्न किया जाएगा;
(ख) किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब की दशा में कर्ता द्वारा और जहां कर्ता भारत से अनुपस्थित है या अपने कार्यों का पालन करने में मानसिक रूप से असमर्थ है वहां ऐसे कुटुम्ब के किसी अन्य वयस्क सदस्य द्वारा;
(ग) किसी कंपनी की दशा में, उसके प्रबंध निदेशक द्वारा या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबंध निदेशक विवरणी को सत्यापित करने में असमर्थ है या जहां कोर्इ प्रबंध निदेशक नहीं है, वहां उसके किसी निदेशक द्वारा :
परन्तु जहां कंपनी भारत में निवासी नहीं है वहां विवरणी ऐसे व्यक्ति द्वारा सत्यापित की जा सकेगी जिसके पास ऐसा करने का विधिमान्य मुख्तारनामा है, जिसे विवरणी के साथ संलग्न किया जाएगा :
परन्तु यह और कि–
(क) जहां कंपनी का, चाहे न्यायालय के आदेशों के अधीन या अन्यथा, परिसमापन किया जा रहा है, या जहां कंपनी की किन्हीं आस्तियों के संबंध में किसी व्यक्ति को रिसीवर नियुक्त किया गया है, वहां विवरणी धारा 178 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट परिसमापक द्वारा सत्यापित की जाएगी;
(ख) जहां कंपनी का प्रबंध किसी विधि के अधीन, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा, ग्रहण कर लिया गया है, वहां कंपनी की विवरणी उसके प्रधान अधिकारी द्वारा सत्यापित की जाएगी; 67[या]
67[(ग) जहां किसी कंपनी के संबंध में दिवाला और धन-शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 7 या धारा 9 या धारा 10 के अधीन न्यायनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा निगम दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए कोर्इ आवेदन स्वीकार किया गया है, वहां विवरणी का सत्यापन, ऐसे न्यायनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा नियुक्त दिवाला वृत्तिक द्वारा किया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''दिवाला वृत्तिक'' और ''न्यायनिर्णायक प्राधिकरण'' पदों का क्रमश: वही अर्थ होगा, जो दिवाला और धन-शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 3 के खंड (18) और धारा 5 के खंड (1) में क्रमश: उनका है;]
(गग) किसी फर्म की दशा में, उसके प्रबंध में भागीदार द्वारा या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबंध भागीदार विवरणी को सत्यापित करने में असमर्थ है या जहां इस प्रकार कोर्इ प्रबंध भागीदार नहीं है, वहां उसके किसी भागीदार द्वारा जो अवयस्क नहीं है;
(गघ) किसी सीमित दायित्व वाली भागीदारी की दशा में, उसके अभिहित भागीदार द्वारा या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा अभिहित भागीदार विवरणी को सत्यापित करने में असमर्थ है या जहां उस प्रकार का अभिहित भागीदार नहीं है वहां उसके किसी भागीदार द्वारा;
(घ) किसी स्थानीय प्राधिकारी की दशा में उसके प्रधान अधिकारी द्वारा;
(घघ) धारा 139 की उपधारा (4ख) में निर्दिष्ट किसी राजनैतिक दल की दशा में, उस दल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा (चाहे ऐसा मुख्य कार्यपालक अधिकारी सचिव के रूप में या किसी अन्य पदनाम से ज्ञात हो);
(ड़) किसी अन्य संगम की दशा में, संगम के किसी सदस्य या उसके प्रधान अधिकारी द्वारा; तथा
(च) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में, उस व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी व्यक्ति द्वारा।
67. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

