आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 139क

स्थायी खाता संख्यांक

धारा

धारा संख्या

139क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

स्थायी खाता संख्यांक

स्थायी खाता संख्यांक

स्थायी खाता संख्यांक

139क. (1) प्रत्येक व्यक्ति,—

(i) यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसकी बाबत वह किसी पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है; या

(ii) कोर्इ कारबार या वृत्ति करता है, जिसकी कुल बिक्री, आवर्त या सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में पांच लाख रुपए से अधिक है या होनी संभाव्य है; या

(iii) जिससे धारा 139 की उपधारा (4क) के अधीन आय की विवरणी देने की अपेक्षा की जाती है; या

(iv) जो नियोजक है, जिससे धारा 115बघ के अधीन अनुषंगी फायदों की विवरणी प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है, 64[या]

64[(v) जो किसी व्यष्टि से भिन्न कोर्इ निवासी है, जो किसी वित्तीय वर्ष में दो लाख पचास हजार रुपए या उससे अधिक की कुल रकम का कोर्इ वित्तीय संव्यवहार करता है;

(vi) जो प्रबंध निदेशक, निदेशक, भागीदार, न्यासी, लेखक, संस्थापक, कर्ता, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, प्रधान अधिकारी या खंड (v) में निर्दिष्ट व्यक्ति का पदाधिकारी या 64क[खंड (v) में निर्दिष्ट व्यक्ति की ओर से कार्य करने के लिए सक्षम कोर्इ व्यक्ति; या

(vii) जो ऐसा संव्यवहार करने का आशय रखता है, जो राजस्व के हित में बोर्ड द्वारा विहित किया जाए,]

और जिसे कोर्इ स्थायी खाता संख्यांक नहीं दिया गया है उस समय के भीतर जो विहित किया जाए निर्धारण अधिकारी को स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने के लिए आवेदन करेगा।

(1क) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे किसी वर्ग या किन्हीं वर्गों के व्यक्तियों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनके द्वारा इस अधिनियम के अधीन कर संदेय है, अथवा कोर्इ कर या शुल्क तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संदेय है, जिसके अंतर्गत आयातकर्ता और निर्यातकर्ता भी हैं, चाहे उसके द्वारा कोर्इ कर संदेय हो अथवा नहीं, और ऐसे व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर जो उस अधिसूचना में उल्लिखित किया जाए, स्थायी खाता संख्यांक के आबंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करेंगे।

(1ख) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार किसी ऐसी सूचना को, जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोगी या उनसे सुसंगत हो सकती है, संगृहीत करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे किसी वर्ग या किन्ही वर्गों के व्यक्तियों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो स्थायी खाता संख्यांक के आबंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करेंगे और ऐसे व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर जो उस अधिसूचना में वर्णित किया गया हो, स्थायी खाता संख्यांक के आबंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करेंगे।

(2) निर्धारण अधिकारी ऐसे संव्यवहारों की, जो विहित किए जाएं, प्रकृति को ध्यान में रखते हुए किसी अन्य व्यक्ति को भी (चाहे उसके द्वारा कोर्इ कर संदेय हो या नहीं) ऐसी रीति में और ऐसी प्रक्रिया के अनुसार जो विहित की जाए, स्थायी खाता संख्यांक आबंटित कर सकेगा।

(3) कोर्इ व्यक्ति जो उस उपधारा (1) या उपधारा (2) के अंतर्गत नहीं आता है, निर्धारण अधिकारी को स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा और इस पर निर्धारण अधिकारी ऐसे व्यक्ति को तुरंत स्थायी खाता संख्यांक देगा।

(4) नर्इ श्रृंखला में स्थायी खाता संख्यांक देने के प्रयोजनों के लिए बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा वह तारीख विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिससे उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यक्ति और अन्य व्यक्ति जिन्हें स्थायी खाता संख्यांक दिया गया है; और जो ऐसे स्थान में रहते हैं, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट है, ऐसे समय के भीतर जो विनिर्दिष्ट किया जाए नर्इ श्रृंखला में स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने के लिए निर्धारण अधिकारी से आवेदन करेगा और ऐसा स्थायी खाता संख्यांक किसी व्यक्ति को दिए जाने पर उसका पुराना स्थायी खाता संख्यांक, यदि कोर्इ है, प्रभावी नहीं रहेगा :

परन्तु वे व्यक्ति जिन्हें नर्इ श्रृंखला के अंतर्गत स्थायी खाता संख्यांक पहले ही दिया जा चुका है, ऐसे संख्यांक के लिए पुन: आवेदन नहीं करेंगे।

(5) प्रत्येक व्यक्ति,—

() किसी आय-कर प्राधिकारी को अपनी सभी विवरणियों या उसके साथ पत्र व्यवहार में उस संख्यांक को कोट करेगा;

() इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि के संदाय के लिए सभी चालानों में उस संख्यांक को कोट करेगा;

() ऐसे संव्यवहारों से संबंधित सभी दस्तावेजों में जो बोर्ड द्वारा राजस्व के हित में विहित किए जाएं और जो उसके द्वारा किए जाएं उस संख्यांक को कोट करेगा :

परन्तु बोर्ड विभिन्न संव्यवहारों या संव्यवहारों के वर्ग के लिए या व्यक्तियों के भिन्न-भिन्न वर्गों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विहित कर सकेगा :

परन्तु यह और कि जब तक किसी व्यक्ति को स्थायी लेखा संख्यांक न दिया जाए वह जनरल इन्डैक्स रजिस्टर संख्यांक कोट करेगा;

() निर्धारण अधिकारी को अपने पते में या अपने ऐसे कारबार के नाम और प्रकृति में, जिसके आधार पर उसे स्थायी लेखा संख्यांक आबंटित किया गया था, परिवर्तनों की सूचना देगा।

(5क) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसने कोर्इ ऐसी राशि या आय या रकम प्राप्त की है, जिसमें से कर की कटौती अध्याय 17ख के उपबंधों के अधीन की गर्इ है, ऐसे व्यक्ति को अपना स्थायी लेखा संख्यांक संसूचित करेगा, जो उस अध्याय के अधीन ऐसे कर की कटौती करने के लिए उत्तरदायी है :

परन्तु यह और कि इस उपधारा में निर्दिष्ट कोर्इ व्यक्ति, जनरल इन्डैक्स रजिस्टर संख्यांक ऐसे समय तक संसूचित करेगा जब तक कि ऐसे व्यक्ति को स्थायी लेखा संख्यांक का आबंटन नहीं हो जाता।

(5ख) जहां किसी राशि या आय या रकम का अध्याय 17ख के अधीन कर की कटौती के पश्चात् संदाय किया गया है, वहां उस अध्याय के अधीन कर की कटौती करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, उस व्यक्ति के स्थायी लेखा संख्यांक को निम्नलिखित में कोट करेगा, जिसको उसके द्वारा ऐसी राशि या आय या रकम का संदाय किया गया है—

(i) धारा 192 की उपधारा (2ग) के उपबंधों के अनुसार दिए गए विवरण में;

(ii) धारा 203 के उपबंधों के अनुसार दिए गए सभी प्रमाणपत्रें में;

(iii) धारा 206 के उपबंधों के अनुसार तैयार की गर्इ और किसी आय-कर प्राधिकारी को परिदत्त की गर्इ या करार्इ जाने वाली सभी विवरणियों में;

(iv) धारा 200 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार तैयार किए गए और परिदत्त किए गए या परिदत्त कराए गए सभी विवरणों में :

परन्तु केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिससे इस उपधारा के उपबंध किसी वर्ग या वर्गों के व्यक्तियों की बाबत लागू होंगे:

परन्तु यह और कि उपधारा (5क) और उपधारा (5ख) की कोर्इ बात किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में लागू नहीं होगी, जिसकी कुल आय आय-कर से प्रभार्य नहीं है, या जिससे इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन स्थायी लेखा संख्यांक लेने की अपेक्षा नहीं है, यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे किसी व्यक्ति को, जो कर की कटौती करने के लिए उत्तरदायी है, धारा 197क में निर्दिष्ट इस आशय की घोषणा उसके अधीन विहित फार्म और रीति से देता है कि उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जाने वाली है, उसकी अनुमानित कुल आय पर कर शून्य होगा।

(5ग) धारा 206ग में निर्दिष्ट प्रत्येक क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार उस धारा में ऐसे व्यक्ति को जो कर संग्रहित करने के लिए उत्तरदायी हैं अपना स्थायी लेखा संख्यांक संसूचित करेगा।

(5घ) धारा 206ग के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस धारा में निर्दिष्ट प्रत्येक क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार के स्थायी लेखा संख्यांक को निम्नलिखित में कोट करेगा—

(i) धारा 206ग की उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसार दिए गए सभी प्रमाणपत्रें में;

(ii) धारा 206ग की उपधारा (5क) या उपधारा (5ख) के उपबंधों के अनुसार तैयार की गर्इ और किसी आय-कर प्राधिकारी को परिदत्त की गर्इ या करार्इ जाने वाली सभी विवरणियों में;

(iii) धारा 206ग की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार तैयार किए गए और परिदत्त किए गए या परिदत्त कराए गए सभी विवरणों में।

64ख[(5ड़) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिससे इस अधिनियम के अधीन अपना स्थायी खाता संख्यांक देने या सूचित करने या उसका हवाला देने की अपेक्षा की जाती है, और—

() जिसे स्थायी खाता संख्यांक नहीं दिया गया है किंतु वह आधार संख्यांक रखता है, स्थायी खाता संख्यांक के बदले में अपना आधार संख्यांक प्रस्तुत कर सकेगा या उसकी सूचना दे सकेगा या उसका हवाला दे सकेगा और ऐसे व्यक्ति को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, स्थायी खाता संख्यांक दिया जाएगा;

() जिसे स्थायी खाता संख्यांक दे दिया गया है और जिसने धारा 139कक की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार अपनी आधार संख्या सूचित कर दी है, और वह स्थायी खाता संख्यांक के बदले अपनी आधार संख्या दे सकेगा या सूचित कर सकेगा या उसका हवाला दे सकेगा।]

(6) उपधारा (5) के खंड ()द्वारा विहित संव्यवहार से संबंधित कोर्इ दस्तावेज़ प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह सुनिश्चित करेगा कि स्थायी लेखा संख्यांक या 64ग[, यथास्थिति, साधारण सूचकांक रजिस्टर संख्यांक या आधार संख्यांक] दस्तावेज में सम्यक्त: कोट किया गया है।

64घ[(6क) ऐसा संव्यवहार, जो विहित किया जाए, करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसे संव्यवहारों से संबंधित दस्तावेजों में अपने, यथास्थिति, स्थायी खाता संख्यांक या आधार संख्यांक का हवाला देगा और ऐसे स्थायी खाता संख्यांक या आधार संख्यांक को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अधिप्रमाणित भी करेगा।

(6ख) उपधारा (6क) में निर्दिष्ट विहित संव्यवहारों से संबंधित किसी दस्तावेज को प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे दस्तावेज में, यथास्थिति, स्थायी खाता संख्यांक या आधार संख्यांक का सम्यक् रूप से हवाला दिया गया है और यह भी सुनिश्चित करेगा कि ऐसा स्थायी खाता संख्यांक या आधार संख्यांक ऐसी रीति में अधिप्रमाणित है, जो विहित की जाए।]

(7) कोर्इ व्यक्ति जिसे नर्इ श्रृंखला के अंतर्गत पहले ही स्थायी लेखा संख्यांक दिया जा चुका है, दूसरा स्थायी लेखा संख्यांक के लिए आवेदन नहीं करेगा, अभिप्राप्त नहीं करेगा या अपने पास नहीं रखेगा।

स्पष्टीकरण.—शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि ऐसे किसी व्यक्ति से, जिसे उपधारा (1) के खंड (iv) से भिन्न किसी खंड के अधीन स्थायी लेखा संख्यांक आबंटित किया गया है, कोर्इ दूसरा स्थायी लेखा संख्यांक अभिप्राप्त करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी और उसे पहले से आबंटित किए गए स्थायी लेखा संख्यांक को अनुषंगी फायदा कर के संबंध में स्थायी लेखा संख्यांक समझा जाएगा।

(8) बोर्ड निम्नलिखित के लिए उपबंध करने के लिए नियम बना सकेगा—

() वह फार्म और रीति जिसमें स्थायी लेखा संख्यांक दिए जाने के लिए आवेदन किया जाए और वे विवरण जो उस आवेदन में होने चाहिएं;

() संव्यवहारों के प्रवर्ग जिनके संबंध में स्थायी लेखा संख्यांक या 64ड़[,यथास्थिति, साधारण सूचकांक रजिस्टर संख्यांक या आधार संख्यांक] ऐसे संव्यवहारों से संबंधित दस्तावेजों में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा कोट किए जाएंगे;

() कारबार या वृत्ति से संबंधित दस्तावेजों के प्रवर्ग जिनमें ऐसे संख्यांक प्रत्येक व्यक्ति द्वारा कोट किए जाएंगे;

() व्यक्तियों का या के वर्ग जिन्हें इस धारा के उपबंध लागू नहीं होंगे;

() वह फार्म और रीति जिसमें वह जिसे स्थायी लेखा संख्यांक नहीं दिया गया है या जिसके पास जनरल इन्डेक्स रजिस्टर संख्यांक नहीं है, अपनी घोषणा करेगा;

() वह रीति जिसमें स्थायी लेखा संख्यांक या 64ड़[,यथास्थिति, साधारण सूचकांक रजिस्टर संख्यांक या आधार संख्यांक] खंड ()* में निर्दिष्ट संव्यवहारों के प्रवर्गों के संबंध में कोट किया जाएगा;

() समय और वह रीति जिसमें खंड ()* में निर्दिष्ट संव्यवहार विहित प्राधिकारी को सूचित किए जाएंगे।

स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए—

64च[() "आधार संख्यांक" का वही अर्थ होगा जो उसका आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, प्रसुविधाओं और सेवाओं का लिक्ष्यत परिदान) अधिनियम, 2016 (2016 का 18) की धारा 2 के खंड () में है;

(कक) "निर्धारण अधिकारी" के अंतर्गत आय-कर प्राधिकारी भी है, जिसे स्थायी खाता संख्यांक देने का कर्तव्य सौंपा गया है;

(कख) "अधिप्रमाणन" से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है, जिसके द्वारा किसी व्यक्ति की जनसांख्यिकी सूचना या बायोमैट्रिक सूचना के साथ स्थायी खाता संख्यांक या आधार संख्यांक, उसके सत्यापन के लिए आय-कर प्राधिकारी या ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण को, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत किया जाता है और ऐसा प्राधिकारी या अभिकरण, उसके पास उपलब्ध सूचना के आधार पर, उसकी परिशुद्धता या कमी का सत्यापन करता है;]

() "स्थायी लेखा संख्यांक" से ऐसा संख्यांक अभिप्रेत है जो निर्धारण अधिकारी पहचान के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति को दे और इसके अंतर्गत नर्इ श्रृंखला के अंतर्गत दिया गया स्थायी लेखा संख्यांक भी है;

() "नर्इ श्रृंखला के अंतर्गत स्थायी लेखा संख्यांक" से ऐसा स्थायी लेखा संख्यांक अभिप्रेत है जिसमें दस अल्फान्युमेरिक करेक्टर हैं 65[***];

() "जनरल इन्डेक्स रजिस्टर संख्यांक" से ऐसा संख्यांक अभिप्रेत है जो निर्धारण अधिकारी द्वारा रखे गए जनरल इन्डेक्स रजिस्टर में दिया जाए जिसमें निर्धारण अधिकारी का वार्ड या सर्किल या रेंज की विशिष्टियां तथा उसका पदनाम दिया गया हो।

 

64. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

64क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से "खंड (v) में निर्दिष्ट व्यक्ति की ओर से कार्य करने के लिए सक्षम कोर्इ व्यक्ति" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

64ख. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से अंत:स्थापित।

64ग. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से "साधारण सूचकांक रजिस्टर संख्यांक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

64घ. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से अंत:स्थापित।

64ड़. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से "साधारण सूचकांक रजिस्टर संख्यांक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

64च. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड() निम्न प्रकार था:

"() "निर्धारण अधिकारी" के अंतर्गत वह आय-कर प्राधिकारी है जिसे स्थायी लेखा संख्यांक देने का काम सौंपा जाए;"

* "खंड ()" पढ़ा जाना चाहिए।

65. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से "और जो पटलिय कार्ड के रूप में जारी किया जाए" शब्दों का लोप किया गया।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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