आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 139

आय की विवरणी

धारा

धारा संख्या

139

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

आय की विवरणी

आय की विवरणी

अध्याय 14

निर्धारण के लिये प्रक्रिया

आय की विवरणी

139. (1) प्रत्येक व्यक्ति,—

() जो कंपनी या फर्म है; या

() जो कंपनी या फर्म से भिन्न कोई व्यक्ति है, यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय, जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से अधिक हो गई थी जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है,

पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय की विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं उपवर्णित करते हुए एक विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगा :

परन्तु खंड () में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, जिससे इस उपधारा के अधीन विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, और ऐसे क्षेत्र में निवास कर रहा है, जो बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए और जो पूर्व वर्ष के दौरान, विद्युत के उपभोग के मद्दे पचास हजार रुपये या उससे अधिक का व्यय उपगत करता है या पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय निम्नलिखित शर्तों में से किसी एक को पूरा करता है, अर्थात् :—

(i) वह विनिर्दिष्ट भूमि क्षेत्रफल से अधिक की किसी ऐसी स्थावर संपत्ति का, चाहे स्वामित्व, अभिधृति के रूप में या अन्यथा अधिभोगी है, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए; या

(ii) वह ऐसे दुपहिए मोटरयान से चाहे उसमें अलग होने योग्य ऐसी कोई पाश्र्व कार हो, जिसमें ऐसे दुपहिए मोटरयान से जुड़े अतिरिक्त पहिए हों या नहीं, भिन्न मोटरयान का स्वामी या पट्टेदार है; या

(iii) [***]

(iv) उसने किसी विदेश यात्र पर अपने स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के लिए व्यय उपगत किया है; या

(v) वह किसी बैंक या संस्था द्वारा जारी किए गए क्रेडिट कार्डका धारक है, जो "एड-आन" कार्ड नहीं है; या

(vi) वह किसी ऐसे क्लब का सदस्य है, जहां प्रवेश फीस पच्चीस हजार रुपए या अधिक प्रभारित की जाती है,

1 अप्रैल, 2005 के पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय की विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपवर्णित करते हुए, एक विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगा :

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचनाद्वारा, व्यक्तियों के ऐसे वर्ग या वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनको पहले परंतुक के उपबंध लागू नहीं होंगे :

परन्तु यह भी कि प्रत्येक कंपनी या फर्मप्रत्येक पूर्ववर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगी :

परंतु यह भी कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो धारा 6 के खण्ड (6) के अर्थांतर्गत ऐसा निवासी है, जो भारत में मामूली तौर पर निवासी नहीं है, जिससे इस उपधारा के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित नहीं है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय—

() भारत के बाहर अवस्थित कोई आस्ति (जिसके अंतर्गत किसी इकाई में कोई वित्तीय हित भी है) हिताधिकारी स्वामी के रूप में या अन्यथा धारण करता है या उसे भारत के बाहर अवस्थित किसी खाते के लिए हस्ताक्षर करने का प्राधिकार प्राप्त है; या

() भारत के बाहर अवस्थित किसी आस्ति का (जिसके अंतर्गत किसी इकाई में कोई वित्तीय हित भी है) का हिताधिकारी है,

पूर्ववर्ष की अपनी आय या हानि के संबंध में एक विवरणी, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपवर्णित करते हुए नियत तारीख को या उसके पूर्व प्रस्तुत करेगा:

परंतु यह भी कि चौथे परंतुक में अंतर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यष्टि को, जो भारत के बाहर अवस्थित किसी आस्ति में (जिसके अंतर्गत किसी इकाई में कोई वित्तीय हित भी है) हिताधिकारी है, उस दशा में लागू नहीं होगी जहां ऐसी आस्ति से उद्भूत आय, यदि कोई हो, उस परंतुक के खंड () में निर्दिष्ट व्यक्ति की आय में उस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार सम्मिलित किए जाने योग्य है:

परंतु यह भी कि ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो कोई व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या कोई व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय है, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या कोई कृत्रिम विधिक व्यक्ति है, यदि उसकी कुल आय या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय, जिसके संबंध में वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, धारा 10 के खंड (38) या धारा 10क या धारा 10ख या धारा 10खक या 59क[धारा 54 या धारा 54ख या धारा 54घ या धारा 54ड़ग या धारा 54च या धारा 54छ या धारा 54छक या धारा 54छख या] अध्याय 6क के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, उस अधिकतम रकम से, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, अधिक हो गई है तो वह नियत तारीख को या उसके पूर्व, पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय की एक विवरणी विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित और उसमें ऐसी अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, प्रस्तुत करेगा:

59कक[परंतु यह भी कि खंड () में विनिर्दिष्ट ऐसा कोई व्यक्ति, जिससे इस उपधारा के अधीन कोई विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित नहीं है और जो पूर्ववर्ष के दौरान,—

(i) किसी बैंककारी कंपनी या किसी सहकारी बैंक के साथ रखे गए एक या अधिक चालू खातों में एक करोड़ रुपए से अधिक किसी रकम या कुल रकमो को जमा करता है; या

(ii) किसी विदेशी यात्र के लिए स्वयं हेतु या किसी अन्य व्यक्ति के लिए दो लाख रुपए से अधिक किसी रकम या कुल रकमों का व्यय उपगत करता है; या

(iii) विद्युत के उपभोग के मद्दे एक लाख रुपए से अधिक रकम या कुल रकमों का व्यय उपगत करता है; या

(iv) ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करता है, जो विहित की जाएं,

नियत तारीख को या उसके पूर्व ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में सत्यापित, जो विहित की जाए, और ऐसी अन्य विशिष्टियों का, जो विहित की जाए, वर्णन करते हुए अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करेगा:]

स्पष्टीकरण 1.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "मोटर यान" पद का वही अर्थ होगा, जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 2 के खंड (28) में उसका है।

स्पष्टीकरण 2.—इस उपधारा में, "नियत तारीख" से अभिप्रेत है,—

() जहां खंड (कक) में निर्दिष्ट किसी निर्धारिती से भिन्न निर्धारिती—

(i) कोई कंपनी है; या

(ii) (कंपनी से भिन्न) कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसके लेखाओं की इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराई जानी अपेक्षित है; या

(iii) ऐसी किसी फर्म में 59ख[***] भागीदार है, जिसके लेखाओं की इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराया जाना अपेक्षित है, 59खक[और भागीदार का पति या पत्नी सम्मिलित होगा, यदि धारा 5क के उपबंध उन्हें लागू होते हैं]

वहां निर्धारण वर्ष के 59ग[31 अक्टूबर] का दिन :

(कक) ऐसे किसी निर्धारिती की दशा में, जिससे धारा 92ड़ में निर्दिष्ट कोई रिपोर्ट प्रस्तुत करना अपेक्षित है, 59खक[जिसके अंतर्गत ऐसे निर्धारिती होने पर फर्म के भागीदार या ऐसे भागीदार का पति या पत्नी (यदि धारा 5क के उपबंध ऐसे पति या पत्नी को लागू होते हैं) भी हैं] निर्धारण वर्ष के नवंबर का तीसवां दिन;

() इस उपधारा के पहले परंतुक में निर्दिष्ट कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की दशा में निर्धारण वर्ष के अक्तूबर मास का 31वां दिन;

() किसी अन्य निर्धारिती की दशा में, निर्धारण वर्ष के जुलाई मास का 31वां दिन।

स्पष्टीकरण 3.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "किसी विदेश यात्र" पद के अंतर्गत पड़ोसी देशों या ऐसे तीर्थ स्थानों की यात्र नहीं है, जिन्हें बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।

स्पष्टीकरण 4.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "हिताधिकारी स्वामी" से, किसी आस्ति के संबंध में, ऐसा कोई व्यष्टि अभिप्रेत है जिसने आस्ति के लिए प्रतिफल, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत:, स्वयं के या किसी अन्य व्यक्ति के अव्यवहित या भावी, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, फायदे के लिए उपलब्ध कराया है।

स्पष्टीकरण 5.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "हिताधिकारी" से, किसी आस्ति के संबंध में, ऐसा व्यष्टि अभिप्रेत है जो पूर्ववर्ष के दौरान आस्ति से फायदा प्राप्त करता है और ऐसी आस्ति के लिए प्रतिफल ऐसे हिताधिकारी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया है।

ड़कक[स्पष्टीकरण 6—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,—

() "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ होगा, जो धारा 269धध के स्पष्टीकरण के खंड (i) में उसका है;

() "सहकारी बैंक" का वही अर्थ होगा, जो धारा 269धध के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है;]

(1क) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसा कोई व्यक्ति, जो कोई व्यष्टि है, "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय प्राप्त करता है, अपने विकल्प पर ऐसी स्कीम के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, अपने नियोजक को किसी पूर्ववर्ष की अपनी आय की विवरणी देगा और ऐसा नियोजक नियत तारीख को या उसके पूर्व उसके द्वारा प्राप्त आय की सभी विवरणियां ऐसे प्ररूप में (जिसके अंतर्गत किसी फ्लापी, डिस्कैट, मेग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी-रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय मीडिया सम्मिलित है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, देगा और ऐसी दशा में, किसी कर्मचारी के बारे में जिसने अपने नियोजक को अपनी आय की विवरणी फाइल की है, उपधारा (1) के अधीन यह समझा जाएगा कि उसने आय की विवरणी दे दी है तथा इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(1ख) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कोई व्यक्ति, जो कोई कंपनी है या कंपनी से भिन्न कोई व्यक्ति है, जिससे उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी देने की अपेक्षा की जाती है, अपने विकल्प पर ऐसी स्कीम के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, नियत तारीख को या उससे पूर्व ऐसे प्ररूप में (जिसके अंतर्गत कोई फ्लापी, डिस्कैट, मेग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी-रोम या कोई अन्य कंप्यूटर पर पठनीय माध्यम भी है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, किसी पूर्ववर्ष के लिए अपनी आय की विवरणी दे सकेगा और ऐसी दशा में, ऐसी स्कीम के अधीन दी गई आय की विवरणी उपधारा (1) के अधीन दी गई आय की विवरणी समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(1ग) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, व्यक्तियों के किसी वर्ग या किन्हीं वगोर्ं को ऐसी शतोर्ं को ध्यान में रखते हुए, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, आय की विवरणी देने की अपेक्षा से छूट दे सकेगी।

(2) [***]

(3) यदि किसी ऐसे व्यक्ति ने "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन या "पूंजी लाभ" शीर्ष के अधीन किसी पूर्ववर्ष में हानि उठाई है और उसका दावा है कि उस हानि या उसके किसी भाग का धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 73 की उपधारा (2) या धारा 73क की उपधारा (2) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) या धारा 74क की उपधारा (3) के अधीन अग्रनयन किया जाना चाहिए तो वह उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात समय के अंदर उस पूर्ववर्ष के, जिसके दौरान हानि उठाई गई है, सुसंगत निर्धारण वर्ष के जुलाई के 31वें दिन तक उस हानि की विहित फार्म में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टयों को, जो विहित की जाएं, अन्तर्विष्ट करते हुए एक विवरणी दे सकेगा और इस अधिनियम के सब उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन विवरणी हो।

(4) कोई व्यक्ति जिसने उपधारा (1) के अधीन उसे अनुज्ञात समय के भीतर कोई विवरणी नहीं दी है, किसी पूर्ववर्ष के लिए विवरणी सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत के पूर्व या निर्धारण वर्ष की अंत के 63क[वर्ष के अंत के पूर्व तीन मास पहले] पूर्व, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी समय दे सकेगा

(4क) पूर्णत: पूर्त या धार्मिक प्रयोजन के लिए या भागत: ऐसे प्रयोजनों के लिए न्यास या अन्य विधिक बाध्यता के अधीन धारित सम्पत्ति से उद्भूत आय, या धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (iiक) में निर्दिष्ट स्वैच्छिक अभिदाय के रूप में आय प्राप्त करने वाला हर व्यक्ति, यदि वह सकल आय, जिसकी बाबत वह प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में निर्धारणीय है, (इस प्रयोजन के लिए सकल आय धारा 11 और 12 के उपबंधों को लागू किए बिना इस अधिनियम के अधीन संगणित की जाएगी) उस अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, तो विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित करके और ऐसी अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विवरणी देगा और इस अधिनियम के सभी उपबंध, यथाशक्य, इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित विवरणी हो।

(4ख) यदि वह कुल आय जिसकी बाबत कोई राजनैतिक दल निर्धारणीय (इस प्रयोजन के लिए कुल आय धारा 13क के उपबंधों को प्रभावी किए बिना इस अधिनियम के अधीन संगणित की जाएगी) उस अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर के लिए प्रभार्य नहीं है, तो ऐसे प्रत्येक राजनैतिक दल का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (चाहे ऐसा मुख्य कार्यपालक अधिकारी सचिव के रूप में या किसी अन्य पद नाम से ज्ञात हो) पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विहित प्ररूप और विहित रीति से सत्यापित करके अन्य ऐसी विशिष्टयां देते हुए, जो विहित की जाएं, विवरणी देगा और इस अधिनियम के सभी उपबंध जहां तक हो सके, इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दी जाने के लिए अपेक्षित विवरणी हो।

(4ग) () धारा 10 के खंड (21) में निर्दिष्ट प्रत्येक अनुसंधान संगम;

() धारा 10 के खंड (22ख) में निर्दिष्ट प्रत्येक समाचार एजेंसी;

() धारा 10 के खंड (23क) में निर्दिष्ट प्रत्येक संगम या संस्था;

60[(गक) धारा 10 के खंड (23ककक) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति;]

() धारा 10 के खंड (23ख) में निर्दिष्ट प्रत्येक संस्था;

() धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट प्रत्येक निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट प्रत्येक न्यास या संस्था या उपखंड (iiiकख) या उपखंड (iiiकघ) या या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या उपखंड (iiiकग) या उपखंड (iiiकड़) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट कोई अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था;

(ड़क) धारा 10 के खंड (23घ) में निर्दिष्ट पारस्परिक निधि;

(ड़ख) धारा 10 के खंड (23घक) में निर्दिष्ट प्रतिभूतिकरण न्यास;

60[(ड़खक) धारा 10 के खंड (23ड़ग) या खंड (23ड़घ) में निर्दिष्ट विनिधानकर्ता संरक्षा निधि;

(ड़खख) धारा 10 के खंड (23डड़) में निर्दिष्ट कोर समाधान प्रत्याभूति निधि;]

(ड़ग) धारा 10 के खंड (23चख) में निर्दिष्ट जोखिम पूंजी कंपनी या जोखिम पूंजी निधि;

() धारा 10 के खंड (24) के उपखंड () में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यवसाय संघ या उपखंड () में निर्दिष्ट प्रत्येक संगम;

61[(चक) धारा 10 के खंड (29क) में निर्दिष्ट बोर्ड या प्राधिकरण;]

() धारा 10 के खंड (46) में निर्दिष्ट निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग (चाहे वह कोई भी नाम से ज्ञात हो);

() धारा 10 के खंड (47) में निर्दिष्ट अवसंरचना ऋण निधि,

यदि ऐसे अनुसंधान संगम, समाचार एजेंसी, संगम या संस्था, 62[व्यक्ति या] निधि या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था या व्यवसाय संघ या निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग या अवसंरचना ऋण निधि या पारस्परिक निधि या प्रतिभूतिकरण न्यास या जोखिम पूंजी कंपनी या जोखिम पूंजी निधि के संबंध में कुल आय, जो धारा 10 के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से जो आय-कर से प्रभार्य नहीं अधिक हो, तो पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विवरणी जो विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित हो और उसमें ऐसी विशिष्टियां दी गई हों, जो विहित की जाएं, प्रस्तुत करेगा तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, वैसे ही लागू होंगे जैसे वह उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित कोई विवरणी हो।

(4घ) धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट प्रत्येक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था, जिससे इस धारा के किसी अन्य उपबंध के अधीन आय या हानि की विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, प्रत्येक पूर्व वर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत विवरणी देगी और इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित विवरणी थी।

(4ड़) ऐसा प्रत्येक कारबार न्यास, जिससे इस धारा के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन आय या हानि की विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, प्रत्येक पूर्ववर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करेगा और इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, इस प्रकार लागू होंगे मानो यह उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित कोई विवरणी हो।

(4च) धारा 115पख में निर्दिष्ट प्रत्येक विनिधान निधि, जिससे इस धारा के किसी अन्य उपबंध के अधीन आय या हानि की विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, प्रत्येक पूर्ववर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत विवरणी देगी और इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे लागू होंगे मानों वह उपधारा (1) के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित विवरणी हो।

(5) यदि किसी व्यक्ति को, उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन विवरणी देने के पश्चात् इसमें किसी लोप या किसी गलत कथन का पता लगता है, तो वह सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत 63[***] के 63क[वर्ष के अंत के पूर्व तीन मास पहले] पूर्व या निर्धारण वर्ष पूरा होने के पूर्व, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी भी समय संशोधित विवरणी दे सकेगा।]

(6) इस धारा की उपधारा (1) और उपधारा (3) में और धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट विवरणियों के विहित फार्म में, उन मामलों में जिनमें विहित किया जाए निर्धारिती से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह कर से छूट प्राप्त आय की, उसके द्वारा हिताधिकारी स्वामी के रूप में विहित प्रकृति और मूल्य की आस्तियों की या जिनमें वह कोई हिताधिकारी है उसके बैंक खाते और उसके द्वारा धारित क्रेडिट कार्ड की विहित शीर्षों के अधीन उसके द्वारा उपगत विहित परिसीमाओं से अधिक व्यय की और अन्य ऐसे निर्गमों की, जो विहित किए जाएं, विशिष्टियां दे।

(6क) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस धारा में और धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट विवरणियों के विहित फार्म में, किसी भी कारबार या वृत्ति में लगे हुए निर्धारिती की दशा में, उससे यह भी अपेक्षा की जाएगी कि धारा 44कख के अधीन निर्दिष्ट किसी संपरीक्षा की रिपोर्ट या जहां ऐसी रिपोर्ट विवरणी देने के पूर्व दी जाती है वहां रिपोर्ट देने के सबूत सहित ऐसी रिपोर्ट की प्रति उस मूल स्थान के, जहां वह कारबार या वृत्ति चलाता है और उसकी सभी शाखाओं के अवस्थान और अभिनाम की, विशिष्टियां, ऐसे कारबार या वृत्ति में अपने भागीदारों के, यदि कोई हों, नाम और पते और यदि वह किसी संगम या व्यष्टियों के निकाय का सदस्य है तो उस संगम या व्यष्टियों के निकाय के अन्य सदस्यों के नाम और उस कारबार या वृत्ति और किन्हीं शाखाओं के लाभों में निर्धारिती के अंश और, यथास्थिति, ऐसे सभी भागीदारों या सदस्यों के अंशों की मात्र की विशिष्टियां दे।

(7) [***]

(8)() जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (4) के अधीन विवरणी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् दी जाती है या नहीं दी जाती है, वहां निर्धारिती चाहे निर्धारण अधिकारी ने उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन विवरणी देने की तारीख बढ़ाई हो या नहीं पन्द्रह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा जो विनिर्दिष्ट तारीख के ठीक बाद में आने वाले दिन से विवरणी देने की तारीख तक या जहां विवरणी नहीं दी गई है, वहां धारा 144 के अधीन निर्धारण के पूर्ण होने की तारीख तक उस रकम पर संगणित किया जाएगा जो नियमित निर्धारण पर अवधारित कुल आय पर संदेय कर की रकम में से, दिए गए अग्रिम कर की, यदि कोई हो और स्रोत पर काटे कर की रकमों को घटाने पर आती है :

परन्तु निर्धारण अधिकारी ऐसी दशाओं में और ऐसी परिस्थितियों में, जो विहित की जाएं इस उपधारा के अधीन किसी निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज को घटा सकेगा या अधित्यक्त कर सकेगा।

स्पष्टीकरण 1.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "विनिर्दिष्ट तारीख" से किसी निर्धारण वर्ष के लिए विवरणी के संबंध में अभिप्रेत है,—

() ऐसे प्रत्येक निर्धारिती की दशा में, जिसकी कुल आय के अंतर्गत या ऐसे व्यक्ति की कुल आय के अंतर्गत जिसकी बाबत वह इस अधिनियम के अधीन निर्धार्य है, कारबार या वृत्ति से होने वाली आय है, वहां, पूर्ववर्ष के खत्म होने से, या जहां एक से अधिक पूर्ववर्ष हैं, वहां उस पूर्ववर्ष के खत्म होने से, जो निर्धारण वर्ष के प्रारम्भ होने के पहले सबसे अंत में समाप्त हुआ है, चार मास की समाप्ति की तारीख या, निर्धारण वर्ष के जून का तीसवां दिन, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() प्रत्येक अन्य निर्धारिती की दशा में निर्धारण वर्ष के जून का तीसवां दिन।

स्पष्टीकरण 2.—जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 147 के अधीन कोई निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किया गया निर्धारण इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।

() जहां धारा 147 या धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अथवा धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप, कर की ऐसी रकम जिस पर इस उपधारा के अधीन ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ाई गई है या घटाई गई है, वहां ब्याज, तदनुसार बढ़ा दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा और—

(i) किसी ऐसी दशा में जहां ब्याज बढ़ाया जाता है, वहां निर्धारण अधिकारी, संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए, विहित फार्म में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना धारा 156 के अधीन सूचना समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;

(ii) किसी ऐसी दशा में जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां दिए गए ब्याज का आधिक्य, यदि कोई हो, प्रतिदत्त किया जाएगा।

() इस उपधारा के उपबंध, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के निर्धारण के संबंध में लागू होंगे और उसमें इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निदेशों का अर्थ, उक्त उपबंधों के प्रति निर्देशों के रूप में ऐसे लगाया जाएगा मानो वे सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू होते हैं।

(9) जहां निर्धारण अधिकारी यह समझता है कि निर्धारिती द्वारा दी गई आय-कर की विवरणी त्रुटिपूर्ण है, वहां वह निर्धारिती को त्रुटि की संसूचना दे सकेगा और उसे ऐसी संसूचना की तारीख से पंद्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो इस निमित्त दिए गए आवेदन पर निर्धारण अधिकारी अपने विवेकानुसार अनुज्ञात करे, त्रुटि को सुधारने का अवसर देगा; और यदि यथास्थिति, उक्त पंद्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अनुज्ञात अवधि के भीतर त्रुटि को सुधार नहीं दिया जाता है, तो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी विवरणी को अविधिमान्य विवरणी समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो निर्धारिती विवरणी देने में असफल रहा है :

परन्तु जहां निर्धारिती उक्त पंद्रह दिन की या अतिरिक्त अनुज्ञात अवधि की समाप्ति के पश्चात् किंतु निर्धारण किए जाने के पहले उस त्रुटि को सुधार देता है तो निर्धारण अधिकारी, विलंब को माफ कर सकेगा और विवरणी को विधिमान्य विवरणी मान सकेगा।

स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए आय की विवरणी त्रूटिपूर्ण समझी जाएगी जब तक कि निम्नलिखित सभी शर्तें पूरी न की जाएं, अर्थात् :—

() आय के प्रत्येक शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना से, सकल कुल आय और कुल आय की संगणना से संबंधित आय की विवरणी में उपबंध, कथन और स्तंभ सम्यक्त: भरे गए हैं;

(कक) [***]

() विवरणी के साथ ऐसा कथन है, जो विवरणी के आधार पर संदेय कर की संगणना दर्शाता है;

(खख)विवरणी के साथ धारा 44कख में निर्दिष्ट संपरीक्षा की रिपोर्ट है या जहां रिपोर्ट विवरणी देने से पहले दे दी गई तो वहां रिपोर्ट देने के सबूत के साथ ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति है;

() विवरणी के साथ निम्नलिखित का सबूत है—

(i) वह कर, यदि कोई हो, जिसके स्रोत पर काटे जाने या संगृहीत किए जाने का दावा किया गया है, और अग्रिम कर तथा स्वत: निर्धारण कर, यदि कोई हो, जिसके संदत्त किए जाने का दावा किया गया है :

परंतु जहां विवरणी के साथ ऐसे कर का, यदि कोई हो, जिसके स्रोत पर काटे जाने या संगृहीत किए जाने का दावा किया गया है, सबूत प्रस्तुत नहीं किया जाता है, वहां ऐसी आय की विवरणी को त्रुटिपूर्ण विवरणी नहीं समझा जाएगा, यदि,—

() धारा 203 या धारा 206ग के अधीन काटे गए या संगृहीत किए गए कर का कोई प्रमाणपत्र आय की अपनी विवरणी प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को नहीं दिया गया था;

() ऐसा प्रमाणपत्र धारा 155 की उपधारा (14) के अधीन विनिर्दिष्ट दो वर्ष की अवधि के भीतर प्रस्तुत कर दिया जाता है;

(ii) अनिवार्य निक्षेप स्कीम (आय-कर दाता) अधिनियम, 1974 (1974 का 38) के अधीन अनिवार्य निक्षेप की रकम, यदि कोई हो, जिसके निक्षेप किए जाने का दावा किया गया है;

() जहां निर्धारिती द्वारा नियमित लेखा बहियां रखी जाती हैं, वहां विवरणी के साथ निम्नलिखित की प्रतियां भी होंगी—

(i)यथास्थिति, विनिर्माण लेखा, व्यापार लेखा, लाभ और हानि लेखा या आय और व्यय का लेखा या इसी प्रकार का कोई अन्य लेखा और तुलनपत्र;

(ii) स्वायत्त कारबार या वृत्ति की दशा में स्वामी का व्यक्तिगत लेखा, फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की दशा में भागीदारों या सदस्यों के व्यक्तिगत लेखे और फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय के भागीदार या सदस्य की दशा में फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय में उसका व्यक्तिगत लेखा भी;

() जहां निर्धारिती के लेखाओं की संपरीक्षा की गई है, वहां विवरणी के साथ संपरीक्षित लाभ और हानि लेखा की, तुलनपत्र की और संपरीक्षक की रिपोर्ट की और जहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 233ख के अधीन निर्धारिती के लागत लेखाओं की संपरीक्षा की गई है, वहां उस धारा के अधीन रिपोर्ट प्रतियां भी;

() जहां निर्धारिती द्वारा नियमित लेखा बहियां नहीं रखी जाती हैं, वहां विवरणी के साथ एक कथन होगा जिसमें, यथास्थिति, आवर्त की रकमें या सकल प्राप्तियां, सकल लाभ, कारबार या वृत्ति के व्यय और शुद्ध लाभ उपदर्शित होंगे तथा वह आधार जिस पर ऐसी रकमों की संगणना की गई है, और उसमें कुल अन्यान्य देनदारों की, अन्यान्य लेनदारों की व्यापार स्टाक की और पूर्ववर्ष के अंत में रोकड़ भी दिखाई जाएगी:

63कक[परन्तु बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह विनिर्दिष्ट कर सकेगा कि स्पष्टीकरण के खंड (क) से खंड (च) में विनिर्दिष्ट शर्तें निर्धारितियों के ऐसे वर्ग को लागू नहीं होंगी या ऐसे उपांतरणों के साथ लागू होंगी, जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं।]

(10) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से लोप किया गया।]

 

63कक. वित अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंतस्थापित।

59क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

59कक. वित्त (सं 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

59ख. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "कार्यरत" शब्द का लोप किया गया।

59खक. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंतस्थापित।

59ग. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "30 सितंबर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

60. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

61. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

62. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

63. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से "से एक वर्ष की समाप्ति" शब्दों का लोप किया गया।

63क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंतस्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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