आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 139

आय की विवरणी

धारा

धारा संख्या

139

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2013

आय की विवरणी

आय की विवरणी

अध्याय 14

निर्धारण 4 के लिये प्रक्रिया

आय की विवरणी

5139. 6[(1) प्रत्येक व्यक्ति7,–

() जो कंपनी 8[या फर्म] है; या

() जो कंपनी 8[या फर्म] से भिन्न कोर्इ व्यक्ति है, यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय, जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से अधिक हो गर्इ थी जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है,

पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय की विहित प्ररूप9 में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं उपवर्णित करते हुए एक विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगा :

परन्तु खंड () में निर्दिष्ट कोर्इ व्यक्ति, जिससे इस उपधारा के अधीन विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, और ऐसे क्षेत्र में निवास कर रहा है, जो बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचना10 द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए और जो 11[पूर्व वर्ष के दौरान, विद्युत के उपभोग के मद्दे पचास हजार रुपये या उससे अधिक का व्यय उपगत करता है या] पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय निम्नलिखित शर्तों में से किसी एक को पूरा करता है, अर्थात् :–

(i) वह विनिर्दिष्ट भूमि क्षेत्रफल से अधिक की किसी ऐसी स्थावर संपत्ति का, चाहे स्वामित्व, अभिधृति के रूप में या अन्यथा अधिभोगी है, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट12 किया जाए; या

(ii) वह ऐसे दुपहिए मोटरयान से चाहे उसमें अलग होने योग्य ऐसी कोर्इ पाश्र्व कार हो, जिसमें ऐसे दुपहिए मोटरयान से जुड़े अतिरिक्त पहिए हों या नहीं, भिन्न मोटरयान का स्वामी या पट्टेदार है; या

(iii) 13[***]

(iv) उसने किसी विदेश यात्रा पर अपने स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के लिए व्यय उपगत किया है; या

(v) वह किसी बैंक या संस्था द्वारा जारी किए गए क्रेडिट कार्ड14 का धारक है, जो "एड-आन" कार्ड नहीं है; या

(vi) वह किसी ऐसे क्लब का सदस्य है, जहां प्रवेश फीस पच्चीस हजार रुपए या अधिक प्रभारित की जाती है,

15[1 अपै्रल, 2005 के पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्ववर्ष के दौरान] अपनी आय की विहित प्ररूप16 में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपवर्णित करते हुए, एक विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगा :

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना17 द्वारा, व्यक्तियों के ऐसे वर्ग या वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनको पहले परंतुक के उपबंध लागू नहीं होंगे :

परन्तु यह भी कि प्रत्येक कंपनी 18[या फर्म] प्रत्येक पूर्ववर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत विवरणी नियत तारीख को या उसके पूर्व देगी :

18क[परंतु यह भी कि कोर्इ ऐसा व्यक्ति, जो धारा 6 के खंड (6) के अर्थ के भीतर भारत में मामूली तौर पर निवासी न होने से भिन्न निवासी है, जिससे इस उपधारा के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की अपेक्षा नहीं की गर्इ है और जिसकी पूर्ववर्ष के दौरान भारत के बाहर स्थित कोर्इ आस्ति (जिसमें किसी एकक में कोर्इ वित्तीय हित भी है) है या जिसे भारत के बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षर करने का प्राधिकार है, पूर्ववर्ष के लिए अपनी आय या हानि के संबंध में ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उल्लिखित करते हुए एक विवरणी, नियत तारीख को या उससे पूर्व, प्रस्तुत करेगा :]

18ख[परंतु यह भी कि ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो कोर्इ व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या कोर्इ व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय है, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या कोर्इ कृत्रिम विधिक व्यक्ति है, यदि उसकी कुल आय या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय, जिसके संबंध में वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, धारा 10क या धारा 10ख या अध्याय 6क के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, उस अधिकतम रकम से, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, अधिक हो गर्इ है तो वह नियत तारीख को या उसके पूर्व, पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय की एक विवरणी विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित और उसमें ऐसी अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, प्रस्तुत करेगा:]

स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "मोटर यान" पद का वही अर्थ होगा, जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 219 के खंड (28) में उसका है।

स्पष्टीकरण 2.–इस उपधारा में, "नियत तारीख" से अभिप्रेत है,–

() जहां 19क[खंड (कक) में निर्दिष्ट किसी निर्धारिती से भिन्न] निर्धारिती–

(i) 19ख[***] कोर्इ कंपनी है; या

(ii) (कंपनी से भिन्न) कोर्इ ऐसा व्यक्ति है, जिसके लेखाओं की इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा करार्इ जानी अपेक्षित है; या

(iii) ऐसी किसी फर्म में कार्यरत भागीदार है, जिसके लेखाओं की इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराया जाना अपेक्षित है,

वहां निर्धारण वर्ष के 19ग[सितम्बर मास का तीसवां दिन] :

19गक[(कक) ऐसे किसी निर्धारिती की दशा में, 19घ[जिससे] धारा 92ड़ में निर्दिष्ट कोर्इ रिपोर्ट प्रस्तुत करना अपेक्षित है, निर्धारण वर्ष के नवंबर का तीसवां दिन;]

() इस उपधारा के पहले परंतुक में निर्दिष्ट कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की दशा में निर्धारण वर्ष के अक्तूबर मास का 31वां दिन;

() किसी अन्य निर्धारिती की दशा में, निर्धारण वर्ष के जुलार्इ मास का 31वां दिन।

स्पष्टीकरण 3.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "किसी विदेश यात्रा" पद के अंतर्गत पड़ोसी देशों या ऐसे तीर्थ स्थानों की यात्रा नहीं है, जिन्हें बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना20 द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।]

21[(1क) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जो कोर्इ व्यष्टि है, "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय प्राप्त करता है, अपने विकल्प पर ऐसी स्कीम के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त, राजपत्र में अधिसूचना22 द्वारा, विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, अपने नियोजक को किसी पूर्ववर्ष की अपनी आय की विवरणी देगा और ऐसा नियोजक नियत तारीख को या उसके पूर्व उसके द्वारा प्राप्त आय की सभी विवरणियां ऐसे प्ररूप में (जिसके अंतर्गत किसी फ्लापी, डिस्कैट, मेग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी-रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय मीडिया सम्मिलित है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, देगा और ऐसी दशा में, किसी कर्मचारी के बारे में जिसने अपने नियोजक को अपनी आय की विवरणी फाइल की है, उपधारा (1) के अधीन यह समझा जाएगा कि उसने आय की विवरणी दे दी है तथा इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]

23[* * *]]

24[(1ख) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कोर्इ व्यक्ति, जो कोर्इ कंपनी है या कंपनी से भिन्न कोर्इ व्यक्ति है, जिससे उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी देने की अपेक्षा की जाती है, अपने विकल्प पर ऐसी स्कीम के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचना25 द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, नियत तारीख को या उससे पूर्व ऐसे प्ररूप में (जिसके अंतर्गत कोर्इ फ्लापी, डिस्कैट, मेग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी-रोम या कोर्इ अन्य कंप्यूटर पर पठनीय माध्यम भी है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, किसी पूर्ववर्ष के लिए अपनी आय की विवरणी दे सकेगा और ऐसी दशा में, ऐसी स्कीम के अधीन दी गर्इ आय की विवरणी उपधारा (1) के अधीन दी गर्इ आय की विवरणी समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]

25क[(1ग) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, व्यक्तियों के किसी वर्ग या किन्हीं वगोर्ं को ऐसी शतोर्ं को ध्यान में रखते हुए, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, आय की विवरणी देने की अपेक्षा से छूट दे सकेगी।]

(2) 26[* * *]

(3) यदि किसी ऐसे व्यक्ति ने 27[* * *] "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन या "पूंजी लाभ" शीर्ष के अधीन किसी पूर्ववर्ष में हानि उठार्इ है और उसका दावा है कि उस हानि या उसके किसी भाग का धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 73 की उपधारा (2) या धारा 74 की उपधारा (1) 28[या उपधारा (3)] 29[या धारा 74 की उपधारा (3)] के अधीन अग्रनयन किया जाना चाहिए तो वह उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात समय के अंदर 30[* * *] उस पूर्ववर्ष के, जिसके दौरान हानि उठार्इ गर्इ है, सुसंगत निर्धारण वर्ष के जुलार्इ के 31वें दिन तक] उस हानि की विहित फार्म31 में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टयों को, जो विहित की जाएं, अन्तर्विष्ट करते हुए एक विवरणी दे सकेगा और इस अधिनियम के सब उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन विवरणी हो।

32[(4) कोर्इ व्यक्ति जिसने उपधारा (1) के अधीन उसको अनुज्ञात समय33 के भीतर या धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गर्इ सूचना के अधीन अनुज्ञात समय के अन्दर विवरणी नहीं दी है, किसी पूर्ववर्ष के लिए विवरणी सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व या निर्धारण पूरा होने के पूर्व, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी समय33 दे सकेगा :

परन्तु जहां विवरणी 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष से या किसी पूर्वत्तर निर्धारण वर्ष से संबंधित है, वहां पूर्वोक्त एक वर्ष के प्रति निर्देश का अर्थ, सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से दो वर्ष के प्रति निर्देश के रूप में लगाया जाएगा।

34[35[(4क) 36पूर्णत: पूर्त या धार्मिक प्रयोजन के लिए या भागत: ऐसे प्रयोजनों के लिए न्यास या अन्य विधिक बाध्यता के अधीन धारित सम्पत्ति से उद्भूत आय, या धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (iiक) में निर्दिष्ट स्वैच्छिक अभिदाय के रूप में आय प्राप्त करने वाला हर व्यक्ति, यदि वह सकल आय, जिसकी बाबत वह प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में निर्धारणीय है, (इस प्रयोजन के लिए सकल आय धारा 11 और 12 के उपबंधों को लागू किए बिना इस अधिनियम के अधीन संगणित की जाएगी) उस अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, तो विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित करके और ऐसी अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विवरणी देगा और इस अधिनियम के सभी उपबंध, यथाशक्य, इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित विवरणी हो।]]

37[(4ख) 38यदि वह कुल आय जिसकी बाबत कोर्इ राजनैतिक दल निर्धारणीय (इस प्रयोजन के लिए कुल आय धारा 13क के उपबंधों को प्रभावी किए बिना इस अधिनियम के अधीन संगणित की जाएगी) उस अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर के लिए प्रभार्य नहीं है, तो ऐसे प्रत्येक राजनैतिक दल का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (चाहे ऐसा मुख्य कार्यपालक अधिकारी सचिव के रूप में या किसी अन्य पद नाम से ज्ञात हो) पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विहित प्ररूप और विहित रीति से सत्यापित करके अन्य ऐसी विशिष्टयां देते हुए, जो विहित की जाएं, विवरणी देगा और इस अधिनियम के सभी उपबंध जहां तक हो सके, इस प्रकार लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दी जाने के लिए अपेक्षित विवरणी हो।]

39[(4ग) () धारा 10 के खंड (21) में निर्दिष्ट प्रत्येक 39क[अनुसंधान संगम];

() धारा 10 के खंड (22) में निर्दिष्ट प्रत्येक समाचार एजेंसी;

() धारा 10 के खंड (23) में निर्दिष्ट प्रत्येक संगम या संस्था;

() धारा 10 के खंड (23) में निर्दिष्ट प्रत्येक संस्था;

() धारा 10 के खंड (23) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट प्रत्येक निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट प्रत्येक न्यास या संस्था 40[उपखंड (iiiकघ) या] या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट कोर्इ विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था 40[उपखंड (iiiकड़) या] उपखंड (viक) में निर्दिष्ट कोर्इ अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था;

() धारा 10 के खंड (24) के उपखंड () में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यवसाय संघ या उपखंड () में निर्दिष्ट प्रत्येक संगम;

40क[() धारा 10 के खंड (46) में निर्दिष्ट निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग (चाहे वह कोर्इ भी नाम से ज्ञात हो);

() धारा 10के खंड (47) में निर्दिष्ट अवसंरचना ऋण निधि,]

यदि ऐसे 39क[अनुसंधान संगम], समाचार एजेंसी, संगम या संस्था, निधि या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या कोर्इ अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था या व्यवसाय संघ 40क[या निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग या अवसंरचना ऋण निधि] के संबंध में कुल आय, जो धारा 10 के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से जो आय-कर से प्रभार्य नहीं अधिक हो, तो पूर्ववर्ष की ऐसी आय की विवरणी जो विहित प्ररूप41 में और विहित रीति से सत्यापित हो और उसमें ऐसी विशिष्टियां दी गर्इ हों, जो विहित की जाएं, प्रस्तुत करेगा तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, वैसे ही लागू होंगे जैसे वह उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित कोर्इ विवरणी हो।]

42[(4घ) धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट प्रत्येक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था, जिससे इस धारा के किसी अन्य उपबंध के अधीन आय या हानि की विवरणी देना अपेक्षित नहीं है, प्रत्येक पूर्व वर्ष में अपनी आय या हानि की बाबत विवरणी देगी और इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे लागू होंगे मानो वह उपधारा (1) के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित विवरणी थी।]

43[(5) यदि किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन जारी की गर्इ सूचना के अनुसरण में विवरणी देने के पश्चात्, उसमें किसी लोप या किसी गलत कथन का पता लगता है, तो वह सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व या निर्धारण पूरा होने के पूर्व, इनमें जो भी पूर्वतर हो, किसी समय संशोधित विवरणी दे सकेगा :

परन्तु जहां विवरणी, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष से या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष से संबंधित है वहां पूर्वोक्त एक वर्ष के प्रति निर्देश का अर्थ, सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से दो वर्ष के प्रति निर्देश के रूप लगाया जाएगा।]

44[(6) 45[इस धारा की उपधारा (1) और उपधारा (3) में और धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) में] निर्दिष्ट विवरणियों के विहित फार्म में, उन मामलों में जिनमें विहित किया जाए निर्धारिती से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह कर से छूट प्राप्त आय की, विहित प्रकृति 46[,मूल्य की आस्तियों की, और जो उसकी हों, उसके बैंक खाते और उसके द्वारा धारित क्रेडिट कार्ड की] विहित शीर्षों के अधीन उसके द्वारा उपगत विहित परिसीमाओं से अधिक व्यय की और अन्य ऐसे निर्गमों की, जो विहित किए जाएं, विशिष्टियां दे।

(6क) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, 47[इस धारा 48[***] में और धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) में] निर्दिष्ट विवरणियों के विहित फार्म में, किसी भी कारबार या वृत्ति में लगे हुए निर्धारिती की दशा में, उससे यह भी अपेक्षा की जाएगी कि 49[धारा 44कख के अधीन निर्दिष्ट 50[किसी संपरीक्षा की रिपोर्ट या जहां ऐसी रिपोर्ट विवरणी देने के पूर्व दी जाती है वहां रिपोर्ट देने के सबूत सहित ऐसी रिपोर्ट की प्रति]] उस मूल स्थान के, जहां वह कारबार या वृत्ति चलाता है और उसकी सभी शाखाओं के अवस्थान और अभिनाम की, विशिष्टियां, ऐसे कारबार या वृत्ति में अपने भागीदारों के, यदि कोर्इ हों, नाम और पते और यदि वह किसी संगम या व्यष्टियों के निकाय का सदस्य है तो उस संगम या व्यष्टियों के निकाय के अन्य सदस्यों के नाम और उस कारबार या वृत्ति और किन्हीं शाखाओं के लाभों में निर्धारिती के अंश और, यथास्थिति, ऐसे सभी भागीदारों या सदस्यों के अंशों की मात्रा की विशिष्टियां दे।]

(7) 51[* * *]

52[53(8)() 54[जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (4) के अधीन विवरणी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् दी जाती है या नहीं दी जाती है, वहां निर्धारिती चाहे 55[निर्धारण] अधिकारी ने उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन विवरणी देने की तारीख बढ़ार्इ हो या नहीं] 56[पन्द्रह] प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा जो विनिर्दिष्ट तारीख के ठीक बाद में आने वाले दिन से विवरणी देने की तारीख तक या जहां विवरणी नहीं दी गर्इ है, वहां धारा 144 के अधीन निर्धारण के पूर्ण होने की तारीख तक उस रकम पर संगणित किया जाएगा जो नियमित निर्धारण पर अवधारित कुल आय पर संदेय कर की रकम में से, दिए गए अग्रिम कर की, यदि कोर्इ हो और स्रोत पर काटे कर की रकमों को घटाने पर आती है :

परन्तु 57[निर्धारण] अधिकारी ऐसी दशाओं में और ऐसी परिस्थितियों में, जो विहित58 की जाएं इस उपधारा के अधीन किसी निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज को घटा सकेगा या अधित्यक्त कर सकेगा।

स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "विनिर्दिष्ट तारीख" से किसी निर्धारण वर्ष के लिए विवरणी के संबंध में अभिप्रेत है,–

() ऐसे प्रत्येक निर्धारिती की दशा में, जिसकी कुल आय के अंतर्गत या ऐसे व्यक्ति की कुल आय के अंतर्गत जिसकी बाबत वह इस अधिनियम के अधीन निर्धार्य है, कारबार या वृत्ति से होने वाली आय है, वहां, पूर्ववर्ष के खत्म होने से, या जहां एक से अधिक पूर्ववर्ष हैं, वहां उस पूर्ववर्ष के खत्म होने से, जो निर्धारण वर्ष के प्रारम्भ होने के पहले सबसे अंत में समाप्त हुआ है, चार मास की समाप्ति की तारीख या, निर्धारण वर्ष के जून का तीसवां दिन, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() प्रत्येक अन्य निर्धारिती की दशा में निर्धारण वर्ष के जून का तीसवां दिन।]

59[स्पष्टीकरण 2.–जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 147 के अधीन कोर्इ निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किया गया निर्धारण इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।]

60[() जहां धारा 147 या धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के 61[अथवा धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन समझौता आयोग के किसी आदेश के] परिणामस्वरूप, कर की ऐसी रकम जिस पर इस उपधारा के अधीन ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ है या घटार्इ गर्इ है, वहां ब्याज, तदनुसार बढ़ा दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा और–

(i) किसी ऐसी दशा में जहां ब्याज बढ़ाया जाता है, वहां 62[निर्धारण] अधिकारी, संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए, विहित फार्म में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना धारा 156 के अधीन सूचना समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;

(ii) किसी ऐसी दशा में जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां दिए गए ब्याज का आधिक्य, यदि कोर्इ हो, प्रतिदत्त किया जाएगा।]]

63[() इस उपधारा के उपबंध, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के निर्धारण के संबंध में लागू होंगे और उसमें इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निदेशों का अर्थ, उक्त उपबंधों के प्रति निर्देशों के रूप में ऐसे लगाया जाएगा मानो वे सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू होते हैं।]

64[(9) जहां 65[निर्धारण] अधिकारी यह समझता है कि निर्धारिती द्वारा दी गर्इ आय-कर की विवरणी त्रुटिपूर्ण है, वहां वह निर्धारिती को त्रुटि की संसूचना दे सकेगा और उसे ऐसी संसूचना की तारीख से पंद्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो इस निमित्त दिए गए आवेदन पर 65[निर्धारण] अधिकारी अपने विवेकानुसार अनुज्ञात करे, त्रुटि को सुधारने का अवसर देगा; और यदि यथास्थिति, उक्त पंद्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अनुज्ञात अवधि के भीतर त्रुटि को सुधार नहीं दिया जाता है, तो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी विवरणी को अविधिमान्य विवरणी समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो निर्धारिती विवरणी देने में असफल रहा है :

परन्तु जहां निर्धारिती उक्त पंद्रह दिन की या अतिरिक्त अनुज्ञात अवधि की समाप्ति के पश्चात् किंतु निर्धारण किए जाने के पहले उस त्रुटि को सुधार देता है तो 65क[निर्धारण] अधिकारी, विलंब को माफ कर सकेगा और विवरणी को विधिमान्य विवरणी मान सकेगा।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए आय की विवरणी त्रूटिपूर्ण समझी जाएगी जब तक कि निम्नलिखित सभी शर्तें पूरी न की जाएं, अर्थात् :–

() आय के प्रत्येक शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना से, सकल कुल आय और कुल आय की संगणना से संबंधित आय की विवरणी में उपबंध, कथन और स्तंभ सम्यक्त: भरे गए हैं;

66[(कक) धारा 140क के उपबंधों के अनुसार संदेय कर ब्याज सहित, यदि कोर्इ हो, की विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख को या उसके पूर्व संदत्त कर दिया गया है; ]

() विवरणी के साथ ऐसा कथन है, जो विवरणी के आधार पर संदेय कर की संगणना दर्शाता है;

67[(खख) विवरणी के साथ धारा 44कख में निर्दिष्ट संपरीक्षा की रिपोर्ट है या जहां रिपोर्ट विवरणी देने से पहले दे दी गर्इ तो वहां रिपोर्ट देने के सबूत के साथ ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति है;]

() विवरणी के साथ निम्नलिखित का सबूत है–

(i) वह कर, यदि कोर्इ हो, जिसके 68[***] स्रोत पर काटे जाने 69[[या संगृहीत किए जाने] का दावा किया गया है, और अग्रिम कर तथा स्वत: निर्धारण कर, यदि कोर्इ हो, जिसके संदत्त किए जाने का दावा किया गया है :

70[परंतु जहां विवरणी के साथ ऐसे कर का, यदि कोर्इ हो, जिसके स्रोत पर काटे जाने 69[[या संगृहीत किए जाने] का दावा किया गया है, सबूत प्रस्तुत नहीं किया जाता है, वहां ऐसी आय की विवरणी को त्रुटिपूर्ण विवरणी नहीं समझा जाएगा, यदि,–

71[() धारा 203 या धारा 206ग के अधीन काटे गए या संगृहीत किए गए कर का कोर्इ प्रमाणपत्र आय की अपनी विवरणी प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को नहीं दिया गया था;]

() ऐसा प्रमाणपत्र की उपधारा (14) के अधीन विनिर्दिष्ट दो वर्ष की अवधि के भीतर प्रस्तुत कर दिया जाता है;]

(ii) अनिवार्य निक्षेप स्कीम (आय-कर दाता) अधिनियम, 1974 (1974 का 38) के अधीन अनिवार्य निक्षेप की रकम, यदि कोर्इ हो, जिसके निक्षेप किए जाने का दावा किया गया है;

() जहां निर्धारिती द्वारा नियमित लेखा बहियां रखी जाती हैं, वहां विवरणी के साथ निम्नलिखित की प्रतियां भी होंगी–

(i) यथास्थिति, विनिर्माण लेखा, व्यापार लेखा, लाभ और हानि लेखा या आय और व्यय का लेखा या इसी प्रकार का कोर्इ अन्य लेखा और तुलनपत्र;

(ii) स्वायत्त कारबार या वृत्ति की दशा में स्वामी का व्यक्तिगत लेखा, फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की दशा में भागीदारों या सदस्यों के व्यक्तिगत लेखे और फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय के भागीदार या सदस्य की दशा में फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय में उसका व्यक्तिगत लेखा भी;

() जहां निर्धारिती के लेखाओं की संपरीक्षा की गर्इ है, वहां विवरणी के साथ संपरीक्षित लाभ और हानि लेखा की, तुलनपत्र की और संपरीक्षक की रिपोर्ट की 72[और जहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 233ख73 के अधीन निर्धारिती के लागत लेखाओं की संपरीक्षा की गर्इ है, वहां उस धारा के अधीन रिपोर्ट प्रतियां भी];

() जहां निर्धारिती द्वारा नियमित लेखा बहियां नहीं रखी जाती हैं, वहां विवरणी के साथ एक कथन होगा जिसमें, यथास्थिति, आवर्त की रकमें या सकल प्राप्तियां, सकल लाभ, कारबार या वृत्ति के व्यय और शुद्ध लाभ उपदर्शित होंगे तथा वह आधार जिस पर ऐसी रकमों की संगणना की गर्इ है, और उसमें कुल अन्यान्य देनदारों की, अन्यान्य लेनदारों की व्यापार स्टाक की और पूर्ववर्ष के अंत में रोकड़ भी दिखार्इ जाएगी:]

74[***]

(10) 75[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से लोप किया गया।]

 

4. "निर्धारण" शब्द के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिये

5. परिपत्र सं. 307, तारीख 23.6.1981, परिपत्र सं. 412, तारीख 2.3.1985, परिपत्र सं. 639, तारीख 13.11.1992, परिपत्र सं. 792, तारीख 21.6.2000, परिपत्र सं. 795, तारीख 1.9.2000; परिपत्र सं. 10/2001, तारीख 19.7.2001, परिपत्र सं. 10/2003, तारीख 24.12.2003 परिपत्र सं. 9/2006, तारीख 10.10.2006, परिपत्र सं. 10/2006, तारीख 16.10.2006, परिपत्र सं. 12/2006, तारीख 27.11.2006, परिपत्र सं. 5/2007, तारीख 26.7.2007, परिपत्र सं. 5/2008, तारीख 14.7.2008, परिपत्र सं. 6/2008, तारीख 18.7.2008, परिपत्र सं. 8/2008, तारीख 22.9.2008, परिपत्र सं. 14/2008, तारीख 1.10.2008, और परिपत्र सं. 3/2009, तारीख 21.5.2009 भी देखिये

सुसंगत केस लॉज़ देखिये

6. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से, वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.8.1998 से और वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से यथा संशोधित उपधारा (1) इस प्रकार थी :

'(1) प्रत्येक व्यक्ति, यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, उस अधिकतम रकम से अधिक हो गर्इ थी जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, तो पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय की, विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उल्लिखित करते हुए एक विवरणी निश्चित तारीख को या उसके पूर्व देगा :

परन्तु कोर्इ व्यक्ति, जो इस उपधारा के अधीन विवरणी फाइल नहीं करता है और ऐसे क्षेत्र में रहता है जो बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए और जो पूर्ववर्ष में किसी समय निम्नलिखित शर्तों में से कोर्इ शर्त पूरी करता है, अर्थात्–

(i) विनिर्दिष्ट भूमि क्षेत्रफल से अधिक की स्थावर संपत्ति पर अधिभोग रखता है, चाहे स्वामित्व के माध्यम से या किराएदार के तौर पर या अन्यथा, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए; या

(ii) दुपहिया मोटर यान से भिन्न मोटर यान का स्वामी या पट्टेदार है, चाहे उसमें पृथक्करणीय साइडकार है जिसमें ऐसे दुपहिया मोटर यान के साथ अतिरिक्त पहिया लगा है या नहीं; या

(iii) टेलीफोन का अभिदाता है; या

(iv) अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश की यात्रा पर जाने पर खर्च किया है;

(v) किसी बैंक या संस्था द्वारा जारी किया गया क्रेडिट कार्ड धारक है जो "एड-आन कार्ड' न हो; या

(vi) किसी क्लब का सदस्य है जहां प्रवेश शुल्क पच्चीस हजार रुपए या अधिक है,

पूर्ववर्ष के दौरान हुर्इ अपनी आय की विवरणी निश्चित, तारीख को या उससे पूर्व दाखिल करेगा जो विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित हो तथा जिसमें ऐसे विवरण दिए हों जो विहित किए जाएं:

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, व्यक्तियों का या के वर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिन्हें प्रथम परन्तुक के उपबंध लागू नहीं होंगे।

स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा में "नियत तारीख" से अभिप्रेत है–

() जहां निर्धारिती एक कंपनी है वहां निर्धारण वर्ष के नवम्बर का 30वां दिन;

() जहां निर्धारिती, किसी कंपनी से भिन्न, केार्इ व्यक्ति है वहां–

(i) किसी ऐसी दशा में जहां इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन किसी निर्धारिती के लेखाओं की संपरीक्षा की जानी या जहां धारा 80जजग या धारा 80जजघ के अधीन लेखापाल की रिपार्ट दी जानी अपेक्षित हो जहां धारा 80द या धारा 80दद या धारा 80ददक की उपधारा (1) के अधीन विहित प्रमाणपत्र दिया जाना अपेक्षित हो या किसी सहकारी सोसाइटी की दशा में या किसी फर्म के ऐसे कार्यकारी भागीदार की दशा में, जिसके लेखे इस अधिनियम या, किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा किए जाने के लिए अपेक्षित है, निर्धारण वर्ष के अक्तूबर का 31वां दिन;

(ii) किसी ऐसी दशा में जो ऐसी दशा नहीं है जो उपखंड (i) के अंतर्गत आती है, जहां इस उपधारा में निर्दिष्ट कुल आय में कारबार या वृत्ति से कोर्इ आय सम्मिलित है, निर्धारण वर्ष के अगस्त का 31वां दिन;

(iii) किसी अन्य दशा में निर्धारण वर्ष के जून का 30वां दिन।

स्पष्टीकरण 2.–स्पष्टीकरण 1 के खंड () के उपखंड (i) के प्रयोजनों के लिए "कार्यकारी भागीदार" पद का वही अर्थ होगा जो धारा 40 के खंड () के स्पष्टीकरण 4 में उसका है।

स्पष्टीकरण 3.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "मोटर यान" पद का वही अर्थ होगा जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 2 के खंड (28) में उसका है।

स्पष्टीकरण 4.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "विदेश की यात्रा" पद के अन्तर्गत पड़ौसी देशों या तीर्थयात्रा के ऐसे स्थलों की यात्रा सम्मिलित नहीं है जो बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।'

7. "प्रत्येक व्यक्ति" पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

8. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

9. नियम 12 में विहित प्ररूप, जो निर्धारण वर्ष 2003-2004 से लागू है, निम्न प्रकार हैं :

() नीचे [पैरा] () में आने वाली कंपनियों से भिन्न कंपनियां प्ररूप सं. 1
() निवासी व्यष्टि/हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, नीचे [पैरा] () के अधीन आते हैं उनसे भिन्न :  
- जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय आती है प्ररूप सं. 2 या प्ररूप सं. 2घ सरल, निर्धारिती के विकल्प पर
- जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय नहीं आती, किन्तु उसके अंतर्गत पूंजी लाभ और कृषि आय आती है प्ररूप सं. 2 या प्ररूप सं. 2घ सरल, निर्धारिती के विकल्प पर
- जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय, अथवा पूंजी लाभ या कृषि आय नहीं आती है प्ररूप सं. 3 या प्ररूप सं. 2घ सरल या प्ररूप सं. 2ड़ नया सरल निर्धारिती के विकल्प पर
  - व्यष्टियों की दशा में, जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय अथवा पूंजी लाभ या कृषि आय नहीं आती किन्तु वेतन के अधीन, (अधिनियम की धारा 16 के अधीन कटौती अनुज्ञात करने से पूर्व) 1.50 लाख रुपए से अनधिक आय आती है और उस व्यक्ति को कोर्इ अन्य ऐसी आय प्राप्त नहीं हुर्इ है जिससे नियोजक से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा स्रोत पर कर की कटौती की गर्इ हो प्ररूप सं. 3 या प्ररूप सं. 2घ सरल या प्ररूप सं. 2ड़ नया सरल या प्ररूप सं. 16कक, निर्धारिती व्यष्टि के विकल्प पर
(खख) उपरोक्त [पैरा] () और () के अधीन आने वाले व्यक्तियों से भिन्न व्यक्ति :
- जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय आती है प्ररूप सं. 2 या प्ररूप सं. 2घ सरल, निर्धारिती के विकल्प पर
- जिनकी कुल आय के अंतर्गत कारबार या व्यवसाय से हुर्इ आय नहीं आती है प्ररूप सं. 3 या प्ररूप सं. 2घ सरल, निर्धारिती के विकल्प पर
() वे व्यक्ति (जिनके अंतर्गत कंपनियां भी हैं) जिन्हें न्यास या अन्य विधिक बाध्यता के अधीन पूर्णतया या भागत: पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए धारित संपत्ति से व्युत्पन्न आय प्राप्त होती है और जो धारा 11 के अधीन छूट का दावा करते हैं प्ररूप सं. 3क
() वे व्यक्ति जिनसे धारा 139(4ग) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है। प्ररूप सं. 3क
() वे व्यक्ति जो आर्थिक मापदंडों को पूरा करते हैं और जिनसे धारा 139(1) के पहले परन्तुक के अधीन विवरणी फाइल करने की अपेक्षा की जाती है प्ररूप सं. 2ग
() वे व्यक्ति, जिनसे तलाशी के मामलों में ब्लाक निर्धारण के लिए धारा 158खग के अधीन विवरणी फाइल करने की अपेक्षा की जाती है प्ररूप सं. 2ख

10. अधिसूचित क्षेत्रों के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिये। परिपत्र सं. 10/2001, तारीख 19.7.2001 भी देखिए।

11. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

12. विनिर्दिष्ट भूमि क्षेत्रफल के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिये

13. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, खंड (iii), जो वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2002 से संशोधित किया गया था, इस प्रकार था :"(iii) वह सेलुलर टेलीफोन का, जो लोकल लूप टेलीफोन में बेतार न हों अभिदाता है; या"

14. परिपत्र सं. 795, तारीख 1.9.2000 भी देखिए

15. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से "पूर्ववर्ष के दौरान" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

16. देखिए नियम 12 और प्ररूप सं. 2ग.

17. अधिसूचित व्यक्तियों के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिए

18. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

18क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2012 से अंत:स्थापित।

18ख. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

19. "मोटर यान" की परिभाषा के लिए देखिये पूर्व पृष्ठ 1.205 पर पाद टिप्पण 47.

19क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2012 से अंत:स्थापित।

19ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2012 से "खंड (कक) में निर्दिष्ट किसी कंपनी से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया। पूर्व में कोट किए गए शब्द वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.4.2011 से अंत:स्थापित किए गए थे।

19ग. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से "अक्तूबर मास का इकतीसवां दिन" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

19गक. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.4.2011 से अंत:स्थापित।

19घ. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2012 द्वारा "जो ऐसी कंपनी है, जिससे" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

20. अधिसूचित तीर्थस्थानों और पड़ोसी देशों के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिये

21. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व उपधारा (1क), जो वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से, वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से संशोधित की गर्इ थी, और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से जिसका लोप किया गया था, लोप से पूर्व इस प्रकार थी :

'(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति को अपनी आय की या किसी अन्य व्यक्ति की, जिसकी कुल आय की बाबत वह इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, उस उपधारा के अधीन विवरणी देने की आवश्यकता नहीं है, यदि पूर्ववर्ष के दौरान, यथास्थिति, उसकी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय में 'वेतन' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय या उस शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय सम्मिलित थी और धारा 80ठ की उपधारा (1) के खंड (i) से (ix) में से एक या अधिक में निर्दिष्ट प्रकार की आय भी सम्मिलित है, और निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी जाएं, अर्थात्:–

() जहां वह या ऐसा अन्य व्यक्ति पूर्ववर्ष के दौरान, कंपनी द्वारा नियोजित था वहां वह या ऐसा अन्य व्यक्ति पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय कंपनी का निदेशक या कंपनी में शेयरों का फायदाप्रद स्वामी नहीं था (जो नियत लाभांश दर के लिए हकदार शेयर न हों चाहे लाभों में सहभागी होने के अधिकार सहित या उसके बिना) जिनकी मतदान शक्ति कम से कम बीस प्रतिशत है;

() उन सब प्रसुविधाओं या सुख-सुविधाओं के मूल्य को अपवर्जित कर जो धन के रूप में नहीं दी गर्इ हैं, 'वेतन' शीर्ष के अधीन उसकी आय या ऐसे अन्य व्यक्ति की आय चौबीस हजार रुपए से अधिक नहीं है;

() धारा 80ठ की उपधारा (1) के खंड (i) से (ix) में निर्दिष्ट प्रकार की आय की राशि, यदि कोर्इ है, उस धारा के अधीन उसके मामले में कटौती के रूप में अनुज्ञेय अधिकतम रकम से अधिक है; और

() 'वेतन' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय से धारा 192 के अधीन स्रोत पर कटौती योग्य कर उस आय में से काट लिया गया है।'

22. वेतन प्राप्त कर्मचारियों द्वारा एक साथ विवरणियां फाइल करने की स्कीम 2002/वेतन प्राप्त कर्मचारियों द्वारा नियोजक के माध्यम से विवरणियां फाइल करने की स्कीम, 2004 देखिए।

23. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से स्पष्टीकरण का लोप किया गया। इससे पूर्व लोप किया गया स्पष्टीकरण इस प्रकार था :

"स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए 'वेतन' का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 17 के खंड (1) में है।"

24. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

25. आय की विवरणी का इलैक्ट्रानिक प्रस्तुतिकरण स्कीम 2004/इंटरनेट पर विवरणी प्राप्त करने की स्कीम, 2004 देखिए।

25क. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.6.2011 से अंत:स्थापित।

26. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। लोप से पहले उपधारा (2) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से संशोधित की गर्इ थी।

27. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "जिसे उपधारा (2) के अधीन सूचना की तामील नहीं की गर्इ है" का लोप किया गया।

28. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।

29. वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से अंत:स्थापित।

30. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "या पूर्ववर्ष के सुसंगत ऐसे निर्धारण वर्ष, जिसके दौरान हानि उठार्इ गर्इ थी, के जुलार्इ के 31वें दिन तक" का लोप किया गया। लोप से पूर्व उक्त पद "ऐसे और समय के अंदर जो, विहित रीति में किए गए आवेदन पर, आय-कर अधिकारी, अपने विवेकानुसार, अनुज्ञात करे" के स्थान पर कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से प्रतिस्थापित किया गया था। मूल पद कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित किया गया था।

31. देखिये नियम 12 और 12क.

32. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (4) वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से प्रतिस्थापित और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से संशोधित की गर्इ थी।

33. "अनुज्ञात समय" और "किसी समय" पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिये

34. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से मूल उपबंध के रूप में पुन: स्थापित। इससे पहले इसे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित किया गया था।

35. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1973 से प्रतिस्थापित। मूल उपधारा वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।

36. देखिए नियम 12 और 12क.

37. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित।

38. देखिए नियम 12 और 12क.

39. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

39क. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से "वैज्ञानिक अनुसंधान संगम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

40. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

40क. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.6.2011 से अंत:स्थापित।

41. नियम 12(1)() और प्ररूप सं. 3क भी देखिये

42. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

43. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।

44. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से उपधारा (6) के स्थान पर प्रतिस्थापित।

45. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "उपधारा (1), (2) और (3) में" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

46. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "और मूल्य की आस्तियों की और जो उसकी हों" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

47. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "उपधारा (1), (2) और (3) में" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

48. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "की उपधारा (1) और (3)" शब्दों का लोप किया गया।

49. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से, "धारा 44कख के अधीन अभिप्राप्त संपरीक्षा की रिपोर्ट" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

50. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

51. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।

52. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित। मूल उपधारा वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 28.4.1963 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।

53. देखिए नियम 119क.

54. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से "जहां किसी निर्धारण वर्ष" शब्दों से आरंभ होने वाले और "इस उपधारा के अधीन विवरणी देने की तारीख बढ़ार्इ हो या नहीं" से समाप्त होने वाले अंश के स्थान पर प्रतिस्थापित।

55. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

56. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। संशोधन अधिनियम की धारा 84 में यह स्पष्ट है कि ब्याज दर में वृद्धि 30.9.1984 के बाद आने वाली किसी भी अवधि के संबंध में और उन मामलों में भी लागू होगी जहां ब्याज पूर्वतर तारीख से प्रभार्य या संदेय हो गया था।

57. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

58. देखिये नियम 117क.

59. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से प्रतिस्थापित। इससे पहले वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से यथासंशोधित किया गया था।

60. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से प्रतिस्थापित।

61. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

62. यथोक्त द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

63. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

64. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.9.1980 से अंत:स्थापित।

65. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

65क. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

66. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से अंत:स्थापित।

67. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खण्ड (खख), जो वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :

"(खख) विवरणी के साथ धारा 44कख के अधीन प्राप्त संपरीक्षा रिपोर्ट है;"

68. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से "1 अप्रैल, 2008 के पूर्व" अंकों और शब्दों का लोप किया गया। इससे पूर्व उठ्ठरित अंक और शब्द वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित किए गए थे और उनका वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से तथा वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 सें संशोधन किया गया था।

69. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।

70. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।

71. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड () इस प्रकार था :

"() धारा 203 के अधीन कटौती किए गए कर का कोर्इ प्रमाणपत्र अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को नहीं दिया गया था;"

72. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

73. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 233ख के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट।

74. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2006 से भूतलक्षी प्रभाव से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित परन्तुक इस प्रकार था :

"परंतु बोर्ड, उसके द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा,–

() किसी वर्ग या किन्हीं वर्गों के व्यक्तियों को, खंड () से खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी शर्त से छूट दे सकेगा; या

() इस स्पष्टीकरण के खंड () से खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी शर्त को इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (6) के अधीन विहित विवरणी के प्ररूप में सम्मिलित कर सकेगा।"

75. लोप से पूर्व, उपधारा (10), जो कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1986 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से संशोधित की गर्इ थी।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट