प्रारंभ और 1956 के अधिनियम संख्यांक 42 का संशोधन।
भाग 2
प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 का संशोधन
प्रारंभ और 1956 के अधिनियम संख्यांक 42 का संशोधन।
133. (अ) इस भाग के उपबंध ऐसी तारीख को प्रवृत्त होंगे जो केंद्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस भाग के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी।
धारा 2 का संशोधन
(आ) प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्रतिभूति संविदा अधिनियम कहा गया है) की धारा 2 में,-
(i) ख्रंड (कग) के उपखंड (आ) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड अंत:स्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
(र्इ) वस्तु व्युत्पन्न; और
(उ) ऐसी अन्य लिखतें, जो केंद्रीय सरकार द्वारा व्युत्पन्न घोषित की जाएं;";
(iii) खंड (ख) के पश्चात् निम्ललिखित खंड अंत:स्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
'(खख) "माल" से अनुयोज्य दावों, धन और प्रतिभूतियों से भिन्न हर प्रकार की जंगम सम्पत्ति अभिप्रेत है;
'(खग) "वस्तु व्युत्पन्न" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(i) ऐसे माल के परिदान की सेविदा, जो केंद्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचित की जाए और जो कोर्इ तुरंत परिदान संविदा नहीं है; या
(ii) अंतरों की संविदा, जो अपना मूल्य ऐसे अंतनिर्हित माल की कीमतों या कीमतों के अक्षांकों या क्रियाकलापों, सेवाओं, अधिकारों, हितों और दशाओं, जो केंद्रीय सरकार द्वारा बोर्ड के परामर्श से अधिसूचित किए जाएं, से व्युत्पन्न करती है, किंतु इसके अंतर्गत खंड (कग) के उपखंड (अ), (आ) और (इ) में यथानिर्दिष्ट प्रतिभूतियां नहीं हैं;';
(iv) खंड (ग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(गक) "अनंतरणीय विनिर्दिष्ट परिदान संविदा" से ऐसी विनिर्दिष्ट परिदान संविदा अभिप्रेत है, जिसके अधीन या किसी परिदान आदेश, रेल प्राप्ति, लदान बिल या भांडागार प्राप्ति उससे संबंधित किन्हीं अन्य दस्तावेजों के अधीन के अधिकार या दायित्व अंतरणीय नहीं होते;';
(v) खंड (ड़) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(डक) "तुरंत परिदान संविदा" से ऐसी संविदा अभिप्रेत है, जिसमें माल के परिदान और उसके लिए कीमत के संदाय का, या तो तुरंत या संविदा की तारीख के पश्चात् ग्यारह दिन से अनधिक की ऐसी अवधि के भीतर और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी माल की बाबत विनिर्दिष्ट करे, उपबंध हो और ऐसी संविदा के अधीन अवधि उसके पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से या अन्यथा बढ़ाए जाने वाली न हो:
परंतु जहां ऐसी संविदा का पालन या तो पूर्णत: या भागत:,-
(I) किसी ऐसी धनराशि, जो संविदा दर और परिनिर्धारित दर या समाशोधन दर या किसी मुजरार्इ संविदा की दर में अंतर है, की वसूली द्वारा किया जाता है; या
(II) किसी अन्य साधन, जो भी हो, द्वारा किया जाता है और जिसके परिणामस्वरूप संविदा में समाविष्ट माल का वास्तविक निविदान या उसकी पूरी कीमत का संदाय अभिमोचित कर दिया जाता है,
तो ऐसी संविदा को तुरंत परिदान संविदा नहीं समझा जाएगा;';
(vii) खंड (ज) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(जक) "विनिर्दिष्ट परिदान संविदा" से ऐसी वस्तु व्युत्पन्न अभिप्रेत है जिसमें उसके द्वारा नियत कीमत पर या उसके द्वारा नियत की जाने वाली कीमत पर सहमत किसी विनिर्दिष्ट भावी अवधि के दौरान विनिर्दिष्ट गुणवत्ता या प्रकार के माल के वास्तविक परिदान का उपबंध है और जिसमें क्रेता और विक्रेता दोनों के नाम वर्णित हैं;';
(viii) खंड (ञ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(ट) "अंतरणीय विनिर्दिष्ट परिदान संविदा" से ऐसी विनिर्दिष्ट परिदान संविदा अभिप्रेत है जो अनंतरणीय विनिर्दिष्ट परिदान संविदा नहीं है, और जो उसकी अंतरणीयता के संबंध में ऐसी शर्तों के अध्यधीन है, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;'।

