आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 132ख

अभिगृहीत या अध्यपेक्षित आस्तियों का उपयोजन

धारा

धारा संख्या

132ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

अभिगृहीत या अध्यपेक्षित आस्तियों का उपयोजन

अभिगृहीत या अध्यपेक्षित आस्तियों का उपयोजन

अभिगृहीत या अध्यपेक्षित आस्तियों का उपयोजन

132ख. (1) धारा 132 के अधीन अभिगृहीत या धारा के अधीन अध्यपेक्षित आस्तियों को निम्नलिखित रीति में बरता जा सकेगा, अर्थात् :–

(i) इस अधिनियम, धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27), व्यय-कर अधिनियम, 1987 (1987 का 35), दान कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18) और ब्याज-कर अधिनियम, 1974 (1974 का 45) के अधीन विद्यमान किसी दायित्व की रकम और धारा 153क और उस पूर्ववर्ष से, जिसमें, यथास्थिति, तलाशी आरंभ की जाती है, या अध्यपेक्षा की जाती है या ब्लाक अवधि के लिए अध्याय 14ख के अधीन निर्धारण के पूरा होने पर दायित्व की रकम का अवधारण किया जाता है, सुसंगत वर्ष के निर्धारण के अधीननिर्धारण के पूरा होने पर अवधारित दायित्व की रकम (जिसमें ऐसे निर्धारण के संबंध में उदगृहीत कोर्इ शास्ति या संदेय ब्याज सम्मिलित है) तथा जिनके बारे में ऐसा व्यक्ति व्यतिक्रम करने वाला है या व्यतिक्रम करने वाला समझा जाता है, या धारा 245ग की उपधारा (1) के अधीन समझौता आयोग के समक्ष किए गए किसी आवेदन से उद्भूत दायित्व की रकम ऐसी आस्तियों से वसूल की जा सकेगी :

परन्तु जहां संबंधित व्यक्ति उस मास के, जिसमें आस्ति अभिगृहीत की गर्इ थी, अंत से तीस दिन के भीतर निर्धारण अधिकारी को आस्ति के उन्मोचन के लिए आवेदन करता है और ऐसी किसी आस्ति के अर्जन की प्रकृति और स्रोत के बारे में निर्धारण अधिकारी को उसके समाधानप्रद रूप में स्पष्ट कर दिया जाता है, वहां इस खंड में निर्दिष्ट किसी विद्यमान दायित्व की रकम की वसूली ऐसी आस्ति में से की जा सकेगी और आस्ति का शेष भाग, यदि कोर्इ है, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त के पूर्व अनुमोदन से ऐसे व्यक्ति को दे दिया जाएगा जिसकी अभिरक्षा से वे आस्तियां अभिगृहीत की गर्इ थीं :

परन्तु यह और कि ऐसी आस्ति या उसका कोर्इ भाग, जो पहले परन्तुक में निर्दिष्ट है, उस तारीख से, जिसको, यथास्थिति, धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था, एक सौ बीस दिन की अवधि के भीतर दे दिया जाएगा;

(ii) यदि आस्तियां मात्र धन या भागत: धन और भागत: अन्य आस्तियों के रूप में हैं, तो निर्धारण अधिकारी ऐसे धन का उपयोग खंड (i) में निर्दिष्ट दायित्वों के निर्वहन में कर सकेगा और निर्धारिती इस प्रकार उपयोग किए धन की सीमा तक ऐसे दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा ;

(iii) धन से भिन्न आस्तियों का उपयोग खंड (i) में निर्दिष्ट ऐसे किसी दायित्व के उन्मोचन के लिए भी किया जा सकेगा जो अनुन्मोचित रह जाए और इस प्रयोजन के लिए आस्तियां करस्थम् के अधीन समझी जाएंगी मानो ऐसा करस्थम्, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी द्वारा धारा 226 की उपधारा (5) के अधीन प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त के प्राधिकार से प्रभावी किया गया था और, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी, ऐसे दायित्वों की रकम को ऐसी आस्तियों के विक्रय द्वारा वसूल कर सकेगा और ऐसा विक्रय तीसरी अनुसूची में अधिकथित रीति से किया जाएगा।

(2) उपधारा (1) में की कोर्इ बात इस अधिनियम में अधिकथित किसी अन्य ढंग से पूर्वोक्त दायित्वों की रकम की वसूली को प्रवारित नहीं करेगी।

(3) ऐसी कोर्इ आस्तियां या उनके आगम, जो उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट दायित्वों के उन्मोचन के पश्चात् शेष बचे रहते हैं, तुरंत उस व्यक्ति को सौंप दिए या संदत्त कर दिए जाएंगे जिसकी अभिरक्षा से वे आस्तियां अभिगृहीत की गर्इ थीं।

(4) () केंद्रीय सरकार, उतनी रकम पर प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए आधा प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज का संदाय करेगी, जितने से धारा 132 के अधीन अभिगृहीत या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित धन का, जो उपधारा (1) के खंड (i) के प्रथम परंतुक के अधीन दी गर्इ धन की रकम को, यदि कोर्इ हो, घटा कर आए, और उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट विद्यमान दायित्व के उन्मोचन के लिए बेची गर्इ आस्तियों के आगमों का, यदि कोर्इ हों, योग, इस धारा की उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट दायित्वों को पूरा करने के लिए अपेक्षित रकम के योग के अधिक है।

() ऐसा ब्याज उस तारीख से, जिसको धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था, एक सौ बीस दिन की कालावधि की समाप्ति से ठीक बाद की तारीख से धारा 153क के अधीन या अध्याय 14ख के अधीन निर्धारण के पूरा होने की तारीख तक चलेगा।

स्पष्टीकरण 1–इस धारा में,–

(i) "ब्लाक अवधि" का वही अर्थ है जो उसका धारा 158ख के खंड (क) में है ;

(ii) "तलाशी या अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकार का निष्पादन" का वही अर्थ है जो उसका धारा 158खड़ के स्पष्टीकरण 2 में है।

स्पष्टीकरण 2–शंकाओं को दूर करने के लिए, इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि "विद्यमान दायित्व" के अंतर्गत अध्याय 17 के भाग ग के उपबंधों के अनुसार संदेय अग्रिम कर नहीं आता है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट