आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 131

साक्ष्य के प्रकटीकरण, पेश करने आदि के बारे में शक्ति\

धारा

धारा संख्या

131

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

साक्ष्य के प्रकटीकरण, पेश करने आदि के बारे में शक्ति\

साक्ष्य के प्रकटीकरण, पेश करने आदि के बारे में शक्ति\

ग.–शक्तियां

साक्ष्य के प्रकटीकरण, पेश करने आदि के बारे में शक्ति

131. (1) निम्नलिखित बातों के बारे में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निर्धारण अधिकारी, उपायुक्त (अपील), संयुक्त आयुक्त, आयुक्त (अपील), प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त और धारा 144ग की उपधारा (15) के खंड (क) में निर्दिष्ट विवाद समाधान पैनल को वे शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन वाद का विचारण करते समय न्यायालय में निहित होती है, अर्थात् :–

() प्रकटीकरण और निरीक्षण;

() किसी व्यक्ति को जिसके अंतर्गत किसी बैंककारी कंपनी का कोर्इ अधिकारी भी है, हाजिर करना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

() लेखा बहियों तथा अन्य दस्तावेजों को पेश करने के लिए विवश करना; और

() कमीशन निकालना।

(1क) यदि प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान निदेशक या निदेशक या संयुक्त निदेशक या सहायक निदेशक या उपनिदेशक या धारा 132 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकृत अधिकारी को उस उपधारा के खंड (i) से खंड (v) के अधीन कार्यवाही करने के पूर्व यह संदेह करने का कारण है, कि उसकी अधिकारिता के भीतर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग द्वारा कोर्इ आय छिपार्इ गर्इ है या उसके छिपाए जाने की संभावना है, तो वह इस बात के होते हुए भी कि उसके या किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी के समक्ष ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग की बाबत कोर्इ कार्यवाही लम्बित नहीं है, उससे संबंधित कोर्इ जांच या अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-कर प्राधिकारियों को उस उपधारा के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम होगा।

(2) धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के संबंध में, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग की बाबत कोर्इ जांच या अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए, आय-कर सहायक आयुक्त के रैंक से अनिम्न रैंक के किसी आय-कर प्राधिकारी के लिए, जो इस निमित्त बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया जाए, यह सक्षम होगा कि वह उपधारा (1) मं् निर्दिष्ट आय-कर अधिकारियों को उस उपधारा के अधीन प्रदत्त शक्तियों का इस बात के होते हुए भी प्रयोग करे कि ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग की बाबत कोर्इ कार्यवाहियां उसके या किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी के समक्ष लंबित नहीं है।

(3) इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए उपधारा (1) या उपधारा (1क) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोर्इ प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में अपने सामने पेश की गर्इ किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को परिबद्ध कर सकेगा और ऐसी अवधि के लिए जो वह ठीक समझता है, अपनी अभिरक्षा में रख सकेगा :

परन्तु कोर्इ निर्धारण अधिकारी या सहायक निदेशक या उपनिदेशक–

() किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को परिबद्ध करने के लिए अपने कारणों को अभिलिखित किए बिना ऐसा नहीं करेगा, या

() ऐसी किन्हीं बहियों या दस्तावेजों को (अवकाश दिनों को निकालकर) पंद्रह दिन से अधिक की कालावधि के लिए अपनी अभिरक्षा में यथास्थिति, उसके लिए प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान आयुक्त या आयुक्त या प्रधान निदेशक या निदेशक का अनुमोदन प्राप्त किए बिना, नहीं रखेगा।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

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