नए रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रक्रिया
1 [नए सिरे से रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया
12कख. (1) प्रधान आयुक्त या आयुक्त, धारा 12क की उपधारा (1) के खंड (कग) के अधीन किए गए आवेदन के प्राप्त होने पर —
(क) जहां उक्त खंड के उपखंड (i) के अधीन किया गया आवेदन, न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए पांच वर्षों की अवधि के लिए लिखित में कोई आदेश पारित करता है;
(ख) जहां उक्त खंड के उपखंड (ii)या उपखंड (iii) या उपखंड (iv) या उपखंड (v) के अधीन किया गया आवेदन,—
(i) न्यास या संस्था से ऐसे दस्तावेजों या जानकारी के लिए मांग करना या ऐसी जांचों को स्वयं को संतुष्ट होने के लिए आदेश में जैसा वह ठीक समझे करेगा—
(अ) न्यास या संस्था के क्रियाकलापों की मौलिकता; और
(आ) इस उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रयोजन से जो सारवान हैं, न्यास या संस्था द्वारा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि की ऐसी अपेक्षाओं का अनुपालन;
(ii) मद (अ) के अधीन न्यास और संस्था के उद्देश्यों के बारे में या इसके क्रियाकलापों की मौलिकता और उपखंड (i) के मद (आ) के अधीन अपेक्षाओं का अनुपालन, के बारे में स्वयं का समाधान करने के पश्चात्—
(अ) पांच वर्षों की अवधि के लिए न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के संबंध में कोई लिखित आदेश पारित करेगा; या
(आ) यदि वह इस प्रकार संतुष्ट नहीं होता है, ऐसे आवेदन को लिखित में नामंजूर करने का कोई आदेश पारित करेगा और युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् इसका रजिस्ट्रीकरण भी रद्द कर देगा;
(ग) जहां उक्त खंड के उपखंड (vi) के अधीन कोई आवेदन किया जाता है, निर्धारण वर्ष से तीन वर्ष की अवधि के लिए न्यास या संस्था को अनंतिम रुप से रजिस्ट्रीकरण करने के लिए लिखित में कोई आदेश पारित करेगा, जो रजिस्ट्रीकरण में मांगा गया है,
और ऐसे आदेश की एक प्रति न्यास या संस्था को भेजेगा ।
(2) सभी आवेदन जो प्रधान आयुक्त या आयुक्त के समक्ष लंबित है, इस धारा के प्रवृत्त में आने की तारीख से पूर्व, धारा 12कक की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया गया है, उस तारीख को धारा 12क की उपधारा (1) के खंड (कग) के उपखंड (vi) के अधीन किया गया कोई आवेदन समझा जाएगा ।
(3) उपधारा (1) के खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) के उपखंड (ii) के अधीन कोई आदेश, ऐसे प्ररुप और रीति में जो विहित किया जाए, पारित किया जाएगा, क्रमश: तीन मास, छह मास और एक मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व ऐसे मास की समाप्ति से संगणना की जाएगी, जब ऐसा आवेदन प्राप्त किया गया था ।
1क[(4) जहां किसी न्यास या संस्था का रजिस्ट्रीकरण या अनंतिम रजिस्ट्रीकरण, यथास्थिति, उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या धारा 12कक की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन मंजूर किया गया है और तत्पश्चात् प्रधान आयुक्त या आयुक्त,-
(क) ने किसी पूर्ववर्ष के दौरान एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमणों को देखा है; या
(ख) ने धारा 143 की उपधारा (3) के दूसरे परंतुक के अधीन किसी पूर्ववर्ष के लिए निर्धारण अधिकारी से कोई प्रतिनिर्देश प्राप्त किया है; या
(ग) ने समय-समय पर, बोर्ड द्वारा किसी पूर्ववर्ष के लिए विरचित ऐसे मामले का जोखिम प्रबंधन रणनीति के अनुसार चयन किया है,
वहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त-
(i) न्यास या संस्था से ऐसे दस्तावेजों या सूचना की मांग करेगा या ऐसी जांच करेगा, जो वह किसी विनिर्दिष्ट अतिक्रमण होने या अन्यथा के संबंध में स्वयं का समाधान करने के लिए आवश्यक समझता है;
(ii) सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् ऐसे पूर्ववर्ष और पश्चातवर्ती वर्षों के लिए ऐसे न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमण हुए हैं;
(iii) यदि एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमण होन के संबंध में उसका समाधान नहीं होता है तो ऐसे न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने से इंकार करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा;
(iv) निर्धारण अधिकारी और ऐसे न्यास या संस्था को, यथास्थिति, खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन आदेश की एक प्रति अग्रेषित करेगा।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट अतिक्रमण" से निम्नलिखित अभिप्रेत होगा, अर्थात्:-
(क) जहां न्यास के अधीन पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए पूर्णत: या भागत: धृत संपत्ति से व्युत्पन्न किसी आय को, न्यास या संस्था के उद्देश्यों से भिन्न किसी कार्य के लिए उपयोजित किया गया है; या
(ख) न्यास या संस्था की कारबार के लाभ और अभिलाभ से आय है, जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति से आनुषंगिक नहीं है या कारबार के संबंध में, जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति से आनुषंगिक हैं, ऐसे न्यास या संस्था ने पृथक् लेखा बहियां नहीं रखी है; या
(ग) न्यास या संस्था ने किसी न्यास के अधीन धृत संपत्ति से अपनी आय के किसी भाग को प्राइवेट धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोजित किया है, जिससे पब्लिक को फायदा सुनिश्चित नहीं होता है; या
(घ) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् पूर्त प्रयोजनों के लिए सृजित या स्थापित न्यास या संस्था ने अपनी आय के किसी भाग का किसी विशिष्ट धार्मिक समुदाय या जाति के फायदे के लिए उपयोजन किया है; या
(ड़) न्यास या संस्था द्वारा किया जा रहा कोई क्रियाकलाप,-
(i) वास्तविक नहीं है; या
(ii) ऐसी सभी या किन्हीं शर्तों के अनुसार, जिनके अध्यधीन उसका रजिस्ट्रीकरण किया गया था, नहीं चलाया जा रहा है; या
(च) न्यास या संस्था ने उपधारा (1) के खंड (ख) के उपखंड (i) की मद (आ) में यथानिर्दिष्ट, किसी अन्य विधि की अपेक्षा का अनुपालन नहीं किया है और आदेश, निदेश या डिक्री में, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, यह अभिनिर्धारित किया गया है कि ऐसा अनुपालन हुआ है, जिसे या तो विवादित नहीं किया गया है या उसे अंतिम रूप प्रदान नहीं किया गया है।
(5) यथास्थिति, उपधारा (4) के खंड (ii) के अधीन आदेश उस तिमाही के अंत से, जिसमें प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा पहली सूचना उपधारा (4) के खंड (i) के अधीन, किसी दस्तावेज या सूचना की मांग करने या कोई जांच करने के लिए 1 अप्रैल, 2022 को या उसके पश्चात् जारी की जाती है, से संगणित छह मास की अवधि के अवसान से पूर्व पारित किया जाएगा।]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

