धारा 11 और 12 को लागू किए जाने संबंधी शर्तें
धारा 11 और 12 को लागू किए जाने संबंधी शर्तें
12क. (1) धारा 11 और धारा 12 के उपबंध किसी न्यास या संस्था की आय के संबंध में लागू नहीं होंगे जब तक कि निम्नलिखित शर्तें पूरी न की जाएं, अर्थात् :–
(क) आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने विहित फार्म और विहित रीति में प्रधान आयुक्त या आयुक्त को 1 जुलाई, 1973 को या उसके पूर्व या न्यास के सृजन अथवा संस्था की स्थापना की तारीख से एक वर्ष की कालावधि समाप्त होने के पूर्व इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो और ऐसा न्यास या संस्था धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत हो न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया है:
परन्तु जहां न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पूर्वोक्त कालावधि की समाप्ति के पश्चात् किया जाता है वहां धारा 11 और धारा 12 के उपबंध ऐसे न्यास या संस्था की आय के संबंध में,–
(i) यदि प्रधान आयुक्त या आयुक्त का ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे यह समाधान हो जाता है कि आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति पूर्वोक्त कालावधि की समाप्ति के पूर्व आवेदन करने से पर्याप्त कारणों से निवारित रहा था तो न्यास के सृजन या संस्था की स्थापना की तारीख से;
(ii) यदि प्रधान आयुक्त या आयुक्त का इस प्रकार समाधान नहीं होता है तो उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें आवेदन किया जाता है, प्रथम दिन से लागू होंगे:
परंतु यह और कि इस खंड के उपबंध 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किए गए किसी आवेदन के संबंध में लागू नहीं होंगे;
(कक) आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् प्रधान आयुक्त या आयुक्त को विहित प्ररूप और रीति में आवेदन किया है और ऐसा न्यास या संस्था धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत है;
(कख) उस दशा में, जहां किसी न्यास या किसी संस्था को धारा धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया गया है या जिसने धारा 12क [जैसी यह वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 1996 (1996 का 33) द्वारा उसके संशोधन से पूर्व थी] के अधीन किसी समय रजिस्ट्रीकरण अभिप्राप्त किया है और तत्पश्चात् उसने उद्देश्यों के ऐसे उपांतरण अंगीकृत किए हैं या उनमें उपांतरण किए हैं जो रजिस्ट्रीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं, आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए विहित प्ररूप और विहित रीति में उक्त अंगीकरण या उपांतरण की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर प्रधान आयुक्त या आयुक्त को आवेदन किया है और ऐसा न्यास या संस्था धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत है;
23क.[(कग) खण्ड (क) से खण्ड (कख) में किसी बात के होते हुए भी, आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने न्यास या संस्था के रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रधान आयुक्त या आयुक्त को विहित प्ररूप और रीति में आवेदन किया है,—
(i) जहां न्यास या संस्था उस तारीख से जिसको यह खण्ड प्रवृत्त हुआ है, 1 अप्रैल, 2021 से तीन मास के भीतर धारा 12क के अधीन [जैसा वह वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 (1996 का 33), द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था] या धारा धारा 12कक के अधीन [जैसा वह कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था] रजिस्ट्रीकृत किया जाता है;
(ii) जहां न्यास या संस्था धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत है और उक्त रजिस्ट्रीकरण की अवधि समाप्त होने वाली है वहां उक्त अवधि की समाति से कम से छः मास पूर्व ;
(iii) जहां न्यास या संस्था में धारा 12कख के अधीन अनंतिम रूप से रजिस्ट्रीकृत किया गया है वहीं अनंतिम रूप से रजिस्ट्रीकरण की अवधि की समाप्ति के कम से कम छः मास पूर्व या उनके क्रियाकलापों के प्रारंभ के छः मास के भीतर, इनमें जो भी पूर्वतर हो ;
(iv) जहां न्यास या संस्था का रजिस्ट्रीकरण, धारा 11 की उपधारा (7) के पहले परंतुक के कारण अप्रवर्तनीय हो गई है वहीं उस निर्धारण वर्ष प्रारंभ के प्रारंभ से जिससे उक्त रजिस्ट्रीकरण को प्रवर्तनीय बनाने की ईप्सा की गई है कम से कम छह मास पूर्व ;
(v) जहां न्यास या संस्था ने ऐसे उद्देश्यों को, जो रजिस्ट्रीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं, अंगीकृत किया है या उनका उपांतरण किया है वहीं उक्त अंगीकार या उपांतरण की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर ;
23खखख[(vi) किसी अन्य दशा में, जहां न्यास या संस्था के क्रियाकलाप,—
(अ) ऐसे निर्धारण वर्ष से, जिसमें उक्त रजिस्ट्रीकरण की ईप्सा की गई है, से सुसंगत पूर्ववर्ष के प्रारंभ के कम से कम एक मास पूर्व ;
(आ) आरंभ हो गए है और ऐसे क्रियाकलापों के प्रारंभ के पश्चात् किसी भी समय ऐसे लागू होने की तारीख को या उसके पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्ववर्ष के लिए धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) अथवा खंड (viक) या धारा 11 या धारा 12 के लागू होने के कारण कुल आय से उक्त न्यास या संस्था की कोई आय या उसका भाग अपवर्जित नहीं किया गया है,]
और ऐसा न्यास या संस्था धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत है]
23ख[(ख) जहां इस अधिनियम के अधीन किसी न्यास या संस्था की धारा 11 और धारा 12 के उपबंधों को प्रभावी किए बिना यथा संगणित सकल आय अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है, जो किसी पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभार्य नहीं है-
(i) लेखा बहियां और अन्य दस्तावेज ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में तथा ऐसे स्थान पर रखे गए हैं, जो विहित किया जाए; और
(ii) उस वर्ष के लिए न्यास या संस्था के लेखाओं की धारा 44कख में निर्दिष्ट तारीख से पूर्व धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में परिभाषित किसी लेखापाल द्वारा संपरीक्षित किए गए हैं और आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने ऐसी संपरीक्षा की विहित प्ररूप में रिपोर्ट, जो ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित और सत्यापित है और जिसमें ऐसी विशिष्टियां जो विहित की जाएं उपवर्णित हैं, उस तारीख तक प्रस्तुत की है;]
24[(खक) आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने धारा 139 की उपधारा (4क) के उपबंधों के अनुसार पूर्ववर्ष के लिए आय-कर की विवरणी 23गगग[उस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर] दे दी है।]
(ग) [***]
(2) जहां कोई आवेदन 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है वहां धारा 11 और धारा 12 के उपबंध उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसा आवेदन किया जाता है, ठीक बाद के निर्धारण वर्ष से ऐसे न्यास या संस्था की आय के संबंध में लागू होंगे :
24क[***]
24ख[परंतु न्यास या संस्था को धारा 11 और धारा 12 के उपबंध, जहां आवेदन, -
(क) उपधारा (1) के खंड (कग) के उपखंड (i) के अधीन किया गया है, वहां उस निर्धारण वर्ष से, जिससे ऐसे न्यास या संस्था को पहले रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया गया है, लागू होंगे;
(ख) उपधारा (1) के खंड (कग) के उपखंड (iii) के अधीन किया गया है वहां ऐसे पहले निर्धारण वर्ष से, जिसके लिए यह अनंतिम रूप से रजिस्ट्रीकृत था, लागू होंगे:
24ग[***]
24गग[***]
24गगग[***]
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

