अधिकारियों का आकलन के क्षेत्राधिकार
17[निर्धारण अधिकारियों की अधिकारिता
18124. (1) जहां धारा 120 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश या आदेश के आधार पर निर्धारण अधिकारी में किसी क्षेत्र की अधिकारिता निहित की गर्इ है, वहां ऐसे क्षेत्र की सीमाओं के भीतर, उसे--
(क) कारबार या वृत्ति करने वाले किसी व्यक्ति की बाबत अधिकारिता होगी, यदि वह स्थान जहां वह अपना कारबार या वृत्ति चलाता है, उस क्षेत्र के भीतर स्थित है या जहां उसका कारबार या वृत्ति एक से अधिक स्थानों में चलार्इ जाती है, वहां उसके कारबार या वृत्ति का मुख्य स्थान उस क्षेत्र के भीतर स्थित है; और
(ख) उस क्षेत्र में निवास करने वाले किसी अन्य व्यक्ति की बाबत अधिकारिता होगी।
(2) जहां इस धारा के अधीन यह प्रश्न उठता है कि क्या किसी निर्धारण अधिकारी को किसी व्यक्ति का निर्धारण करने की अधिकारिता है, वहां वह प्रश्न महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा या जहां प्रश्न उन क्षेत्रों से संबंधित है, जो भिन्न-भिन्न महानिदेशकों या मुख्य आयुक्तों या आयुक्तों की अधिकारिता के भीतर है, वहां संबंधित महानिदेशकों या मुख्य आयुक्त या आयुक्तों द्वारा या यदि वे सहमत नहीं हैं, तो बोर्ड द्वारा महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्तों द्वारा अथवा यदि वे सहमत नहीं है, तो बोर्ड द्वारा या ऐसे महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा अवधारित किया जाएगा जिसे बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
(3) कोर्इ व्यक्ति निर्धारण प्राधिकारी की अधिकारिता को ऐसी दशाओं में प्रश्नगत करने का हकदार नहीं होगा–
(क) जहां उसने उस तारीख से जिस तारीख को उस पर धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन सूचना तामील की गर्इ थी एक मास की समाप्ति के पश्चात् या निर्धारण पूरा होने के पश्चात्, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विवरणी दी है;
(ख) जहां उसने विवरणी देने के लिए धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 148 के अधीन सूचना द्वारा या धारा 144 के पहले परन्तुक के अधीन यह कारण बताने की सूचना द्वारा कि निर्धारण अधिकारी की सर्वोत्तम विवेकबुद्धि के अनुसार निर्धारण क्यों न पूरा किया जाए अनुज्ञात समय की इनमें से जो भी पूर्वतर हो, समाप्ति के पश्चात ऐसी कोर्इ विवरणी नहीं दी है।
(4) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां कोर्इ निर्धारिती किसी निर्धारण अधिकारी की अधिकारिता को प्रश्नगत करता है, वहां निर्धारण अधिकारी यदि उस दावे के सही होने के बारे में उसका समाधान नहीं होता है, तो निर्धारण किए जाने से पूर्व, मामले को उपधारा (2) के अधीन अवधारण के लिए निर्दिष्ट करेगा।
(5) इस धारा में या धारा 120 के अधीन जारी किए गए किसी निदेश या आदेश में किसी बात के होते हुए भी प्रत्येक निर्धारण अधिकारी को उस क्षेत्र के भीतर, यदि कोर्इ है, जिस पर धारा 120 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए निदेशों या आदेशों के आधार पर उसमें अधिकारिता निहित की गर्इ है, प्रोद्भूत या उदभूत होने वाली अथवा प्राप्त किसी आय की बाबत ऐसी सभी शक्तियां होंगी जो किसी निर्धारण अधिकारी को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदान की गर्इ है।]
17. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 124 का वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से संशोधन किया गया था।
18. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

