अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश
90[अधीनस्थ प्राधिकारियों को अनुदेश
91119. (1) बोर्ड अन्य आय-कर प्राधिकारियों को समय-समय पर ऐसे आदेश, अनुदेश और निदेश जारी कर सकेगा, जिन्हें वह इस अधिनियम के उचित प्रशासन के लिए ठीक समझे और वे प्राधिकारी तथा इस अधिनियम के निष्पादन में नियोजित अन्य सब व्यक्ति बोर्ड के ऐसे आदेशों, अनुदेशों और निदेशों का अनुपालन और अनुसरण करेंगे :
परन्तु ऐसे कोर्इ आदेश, अनुदेश या निदेश इस प्रकार नहीं दिए जाएंगे जिससे–
(क) किसी आय-कर प्राधिकारी से विशिष्ट निर्धारण करने के लिए अथवा किसी विशिष्ट मामले का किसी विशिष्ट रीति से निपटारा करने के लिए अपेक्षा की जाए, या
(ख) 92[* * *] 93[आयुक्त (अपील)] के अपने अपीली कृत्यों का प्रयोग करने में विवेकाधिकार में कोर्इ हस्तक्षेप हो।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,–
94(क) बोर्ड, यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे, तो राजस्व के निर्धारण और संग्रहण के काम में उचित और दक्ष प्रबंध के लिए समय-समय पर (चाहे धारा 95[139,] 143, 144, 147, 148, 154, 155 96[, 158खचक] 97[धारा 201 की उपधारा (1क), धारा 210, 211, 234क, 234ख, 234ग], 271 और 273 के उपबंधों में से किसी के शिथिलीकरण के माध्यम से या अन्यथा आय के किसी वर्ग या मामलों के किसी वर्ग की बाबत साधारण या विशेष आदेश जारी कर सकेगा जिनमें राजस्व के निर्धारण या संग्रहण या शास्तियां अधिरोपित करने के लिए कार्यवाही आरम्भ करने से संबंधित काम में अन्य आय-कर प्राधिकारियों द्वारा अनुसरण किए जाने वाले मार्गदर्शनों, सिद्धान्तों या प्रक्रियाओं के बारे में निदेश या अनुदेश हों, (जो निर्धारितियों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालने वाले हों) और यदि बोर्ड की राय में लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है तो ऐसा आदेश98 सर्वसाधारण की सूचना के लिए विहित रीति से प्रकाशित और परिचालित किया जा सकेगा;
(ख) यदि बोर्ड किसी मामले या मामलों के वर्ग में वास्तविक कठिनार्इ से बचने के लिए ऐसा करना वांछनीय या समीचीन समझता है, तो वह साधारण या विशेष आदेश99 द्वारा 1[किसी आय-कर प्राधिकारी को, जो 2[* * *] आयुक्त (अपील) नहीं है] इस बात के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, कि इस अधिनियम के अधीन किसी छूट, कटौती, प्रतिदाय या अन्य राहत के लिए कोर्इ आवेदन या दावा, ऐसा आवेदन या दावा करने के लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट कालावधि के पश्चात् ग्रहण करे और उसके गुणागुण के आधार पर विधि के अनुसार उसे निपटाए।
3[(ग) यदि बोर्ड किसी मामले या मामलों के वर्ग में वास्तविक कठिनार्इ से बचने के लिए ऐसा करना वांछनीय या समीचीन समझता है तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा ऐसे कारणों से, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अध्याय 4 या अध्याय 6क के किन्हीं उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी अपेक्षा को, जहां निर्धारिती उसके अधीन कटौती का दावा करने के लिए ऐसे उपबंध में विनिर्दिष्ट किसी अपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहा है, वहां निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए शिथिल कर सकेगा, अर्थात्:–
(i) ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने में व्यतिक्रम ऐसी परिस्थितियों के कारण हुआ था जो निर्धारिती के नियंत्रण के परे थी; और
(ii) निर्धारिती ने उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें ऐसी कटौती का दावा किया जाता है, निर्धारण के पूरा होने के पूर्व ऐसी अपेक्षा का अनुपालन कर दिया है :
परन्तु केन्द्रीय सरकार इस खंड के अधीन निकाले गए प्रत्येक आदेश को संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी।]
(3) 4[* * *]
90. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित।
91. अनुदेश सं. 796, तारीख 22.11.1974 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लाज़ के लिये देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
92. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त (अपील) या" शब्दों का लोप किया गया। इससे पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "उपायुक्त (अपील)" शब्द "सहायक आयुक्त (अपील)" शब्दों के स्थान पर रखे गए थे।
93. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
94. देखिये नियम 111ख.
95. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
96. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।
97. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से "210, 234क, 234ख" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से "234क, 234ख" अंत:स्थापित किया गया था।
98. समय-समय पर अधीनस्थ प्राधिकारियों को बोर्ड के अनुदेशों के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ सरकुलर्स।
99. परिपत्र सं. 8/2001, तारीख 16.5.2001 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त या आय-कर अधिकारी" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
2. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त (अपील) या" शब्दों का लोप किया गया।
3. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
4. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व उपधारा (3) इस प्रकार थी :
"(3) इस अधिनियम के निष्पादन में लगा प्रत्येक आय-कर अधिकारी ऐसे अनुदेशों का पालन और अनुसरण करेगा जो उसे उसके मार्गदर्शन के लिए, ऐसे निरीक्षण निदेशक या आयुक्त या निरीक्षण सहायक आयुक्त द्वारा, जिसकी अधिकारिता के भीतर वह अपने कृत्य करता है, जारी किए जाएं।"
[वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा संशोधित रूप में]

