आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 119

कतिपय मामलों में आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन मांग, आदि का विधिमान्यकरण

धारा

धारा संख्या

119

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - प्रत्यक्ष कर

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2012

कतिपय मामलों में आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन मांग, आदि का विधिमान्यकरण

कतिपय मामलों में आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन मांग, आदि का विधिमान्यकरण

कतिपय मामलों में आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन मांग, आदि का विधिमान्यकरण

119. किसी न्यायालय या अधिकरण या किसी प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, भारत के बाहर रजिस्ट्रीकृत या निगमित किसी कंपनी के शेयर या शेयरों के अंतरण के परिणामस्वरूप या भारत के बाहर किसी करार के परिणामस्वरूप या अन्यथा, भारत में स्थित किसी पूंजी आस्ति के अंतरण द्वारा या उससे प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली आय के संबंध में, आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के उपबंधों के अधीन भेजी गईं या भेजे जाने के लिए तात्पर्यित सभी सूचनाएं, या उद्गृहीत, मांगे गए, निर्धारित, अधिरोपित, संगृहीत या वसूल किए गए अथवा उद्गृहीत, मांगे गए, निर्धारित, अधिरोपित, संगृहीत या वसूल किए जाने के लिए तात्पर्यित कर विधिमान्य रूप से भेजी गईं या की गई समझी जाएंगी और कर की सूचना, उसका उद्ग्रहण, मांग, निर्धारण, अधिरोपण, संग्रहण या वसूली विधिमान्य होगी और सदैव विधिमान्य रही समझी जाएगी और इस आधार पर कि कर प्रभार्य नहीं था या ऐसे किसी आधार पर जिसमें यह आधार भी है कि वह ऐसे संव्यवहारों से, जो भारत के बाहर किए गए हैं, उद्भूत पूंजी अभिलाभों के संबंध में कर है, प्रश्नगत नहीं की जाएंगी और तदनुसार इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व उद्गृहीत, मांगे गए, निर्धारित, अधिरोपित या जमा किए गए तथा ऐसे प्रारंभ से पूर्व किसी अवधि के लिए प्रभार्य, किंतु ऐसे प्रारंभ से पूर्व संगृहीत या वसूल न किए गए किसी कर को आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा संशोधित किए गए, उपबंधों के अनुसार संगृहीत या वसूल और विनियोजित किया जा सकेगा और किसी भी प्रकार के किसी प्रतिदाय का कोई दायित्व या बाध्यता नहीं होगी ।

1परंतु इस धारा का उस व्यक्ति को लागू होना समाप्त हो जाएगा, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्:--

  (i) जब उक्त व्यक्ति ने ऐसी आय के संबंध मे किसी आदेश के विरुद्ध किसी अपीलीय मंच के समक्ष कोई अपील या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष कोई रिट याचिका फाइल की है, वह या तो उसे वापस लेगा या ऐसी अपील या रिट याचिका को वापस लेने के लिए यथाविहित प्ररूप और रीति में एक वचनबध प्रस्तुत करेगा;

  (ii) जब उक्त व्यक्ति ने माध्यस्थम, सुलह या मध्यकता के लिए कोई कार्यवाही आरंभ की है या उसके लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या भारत द्वारा किसी अन्य देश या भारत से बाहर किसी राज्यक्षेत्र के साथ, चाहे विनिधान के संरक्षण के लिए या अन्यथा, कोई करार किया है, तो वह या तो उसे वापस लेगा या ऐसी कार्यवाहियों या सूचना में, दावे को, यदि कोई हो, यथाविहित प्ररूप और रीति में वापस लेने के लिए एक वचनबंध प्रस्तुत करेगा;

 (iii) उक्त व्यक्ति, ऐसी आय के संबंध में, किसी उपचार या किसी दावे की वांछा या उसका अनुसरण करने के उपने अधिकार का, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, जो उसे किसी साम्या में, चाहे विनिधान के संरक्षण के लिए या अन्यथा, भारत द्वारा, किसी अन्य देश या भारत से बाहर किसी राज्यक्षेत्र के साथ, किए गए किसी करार के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, अन्यथा उपलब्ध हो सकेगा, त्यजन करने के लिए, यथाविहित प्ररूप और रीति में, एक वचनबंध प्रस्तुत करेगा; और

 (iv) ऐसी अन्य शर्तें, जो विहित की जाएं :

परंतु यह और कि यदि आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन पहले परंतुक में निर्दिष्ट व्यक्ति को उसके द्वारा उक्त शर्तों को पूरा करने के परिणामस्वरूप कोई रकम प्रतिदेय हो जाती है, तो ऐसी रकम का उसे प्रतिदाय किया जाएगा, किंतु आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 244क के अधीन ऐसी रकम पर कोई ब्याज संदत्त नहीं किया जाएगा। ]

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1. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 द्वारा 13.8.2021 से अंतःस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012]

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