आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 119

अधीनस्थ प्राधिकारियों को अनुदेश

धारा

धारा संख्या

119

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

अधीनस्थ प्राधिकारियों को अनुदेश

अधीनस्थ प्राधिकारियों को अनुदेश

अधीनस्थ प्राधिकारियों को अनुदेश

119. (1) बोर्ड अन्य आय-कर प्राधिकारियों को समय-समय पर ऐसे आदेश, अनुदेश और निर्देश जारी कर सकेगा, जिन्हें वह इस अधिनियम के उचित प्रशासन के लिए ठीक समझे और वे प्राधिकारी तथा इस अधिनियम के निष्पादन में नियोजित अन्य सब व्यक्ति बोर्ड के ऐसे आदेशों, अनुदेशों और निर्देशों का अनुपालन और अनुसरण करेंगे :

परन्तु ऐसे कोर्इ आदेश, अनुदेश या निर्देश इस प्रकार नहीं दिए जाएंगे जिससे–

() किसी आय-कर प्राधिकारी से विशिष्ट निर्धारण करने के लिए अथवा किसी विशिष्ट मामले का किसी विशिष्ट रीति से निपटारा करने के लिए अपेक्षा की जाए, या

() आयुक्त (अपील) के अपने अपीली कृत्यों का प्रयोग करने में विवेकाधिकार में कोर्इ हस्तक्षेप हो।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,–

() बोर्ड, यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे, तो राजस्व के निर्धारण और संग्रहण के काम में उचित और दक्ष प्रबंध के लिए समय-समय पर (चाहे धाराओं के उपबंधों में से किसी उपबंध को शिथिल करने के रूप में धारा 115त, 115ध, 115बघ, 115बड़, 115बच, 115बछ, 115बज, 115बञ, 115बट, 139, 143, 144, 147, 148, 154, 155, 158खचक धारा 201 की उपधारा (1क), धारा 210, 211, 234क, 234ख, 234ग, 234ड़, 270क 271 49[,धारा 271ग, धारा 271गक] और 273 के उपबंधों में से किसी के शिथिलीकरण के माध्यम से या अन्यथा आय या अनुषंगी फायदों के किसी वर्ग या मामलों के किसी वर्ग की बाबत साधारण या विशेष आदेश जारी कर सकेगा जिनमें राजस्व के निर्धारण या संग्रहण या शास्तियां अधिरोपित करने के लिए कार्यवाही आरम्भ करने से संबंधित काम में अन्य आय-कर प्राधिकारियों द्वारा अनुसरण किए जाने वाले मार्गदर्शनों, सिद्धान्तों या प्रक्रियाओं के बारे में निर्देश या अनुदेश हों, (जो निर्धारितियों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालने वाले हों) और यदि बोर्ड की राय में लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है तो ऐसा आदेश सर्वसाधारण की सूचना के लिए विहित रीति से प्रकाशित और परिचालित किया जा सकेगा;

() यदि बोर्ड किसी मामले या मामलों के वर्ग में वास्तविक कठिनार्इ से बचने के लिए ऐसा करना वांछनीय या समीचीन समझता है, तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा किसी आय-कर प्राधिकारी को, जो आयुक्त (अपील) नहीं है इस बात के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, कि इस अधिनियम के अधीन किसी छूट, कटौती, प्रतिदाय या अन्य राहत के लिए कोर्इ आवेदन या दावा, ऐसा आवेदन या दावा करने के लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट कालावधि के पश्चात् ग्रहण करे और उसके गुणागुण के आधार पर विधि के अनुसार उसे निपटाए।

() यदि बोर्ड किसी मामले या मामलों के वर्ग में वास्तविक कठिनार्इ से बचने के लिए ऐसा करना वांछनीय या समीचीन समझता है तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा ऐसे कारणों से, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अध्याय 4 या अध्याय 6क के किन्हीं उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी अपेक्षा को, जहां निर्धारिती उसके अधीन कटौती का दावा करने के लिए ऐसे उपबंध में विनिर्दिष्ट किसी अपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहा है, वहां निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए शिथिल कर सकेगा, अर्थात्:–

(i) ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने में व्यतिक्रम ऐसी परिस्थितियों के कारण हुआ था जो निर्धारिती के नियंत्रण के परे थी; और

(ii) निर्धारिती ने उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें ऐसी कटौती का दावा किया जाता है, निर्धारण के पूरा होने के पूर्व ऐसी अपेक्षा का अनुपालन कर दिया है :

परन्तु केन्द्रीय सरकार इस खंड के अधीन निकाले गए प्रत्येक आदेश को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी।

(3) [* * *]

 

49. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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