आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115बड़

आकलन/कर निर्धारण

धारा

धारा संख्या

115बड़

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIज - मामूली लाभ पर आयकर

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2007

आकलन/कर निर्धारण

आकलन/कर निर्धारण

निर्धारण

115बड़. (1) जहां, कोर्इ विवरणी धारा 115बघ के अधीन तैयार की गर्इ है,–

(i) वहां यदि किसी अग्रिम कर, स्वत: निर्धारण पर संदत्त किसी कर और अन्यथा ब्याज या कर के रूप में संदत्त किसी रकम के समायोजन के पश्चात् ऐसी विवरणी के आधार पर कोर्इ कर या ब्याज देय पाया जाता है तो उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निर्धारिती को इस प्रकार संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए एक सूचना भेजी जाएगी और ऐसी सूचना धारा 156 के अधीन जारी की गर्इ मांग की सूचना समझी जाएगी और इस अधिनियम के सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे ; और

(ii) वहां यदि ऐसी विवरणी के आधार पर कोर्इ प्रतिदाय देय है तो उसे निर्धारिती को दिया जाएगा और इस आशय की एक सूचना निर्धारिती को भेजी जाएगी :

परंतु इस उपधारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहां निर्धारिती द्वारा कोर्इ राशि संदेय नहीं है या उसे कोर्इ प्रतिदाय देय नहीं है वहां विवरणी की अभिस्वीकृति इस उपधारा के अधीन सूचना समझी जाएगी :

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोर्इ सूचना उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें विवरणी दी गर्इ है, समाप्ति से एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं भेजी जाएगी।

(2) जहां, कोर्इ विवरणी धारा 115बघ के अधीन प्रस्तुत की जाती है, वहां निर्धारण अधिकारी, यदि वह यह सुनिश्चित करना आवश्यक या समीचीन समझता है कि निर्धारती ने अनुषंगी फायदे के मूल्य को कम नहीं बताया है या किसी भी रीति में कर का कम संदाय नहीं किया है तो वह निर्धारिती को एक सूचना की तामील करेगा जिसमें उससे उस सूचना में विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख को उसके कार्यालय में उपस्थित होने या ऐसे किसी साक्ष्य को पेश करने या पेश कराने, जिसका निर्धारिती विवरणी के समर्थन में अवलंब लेता है, की अपेक्षा की जाएगी :

परंतु इस उपधारा के अधीन किसी सूचना की निर्धारिती को, उस मास की, जिसमें विवरणी दी गर्इ है, समाप्ति से बारह मास की समाप्ति के पश्चात् तामील नहीं की जाएगी।

(3) उपधारा (2) के अधीन जारी की गर्इ सूचना में विनिर्दिष्ट दिन को या यथाशीघ्र पश्चात्, ऐसे साक्ष्य की जो निर्धारिती प्रस्तुत करे, और ऐसे अन्य साक्ष्य की, जिसकी निर्धारण अधिकारी विनिर्दिष्ट मुद्दों पर अपेक्षा करे, सुनवार्इ करने के पश्चात् और ऐसी सभी सुसंगत तथ्य सामग्री पर, जो उसने एकत्रित की है, विचार करने के पश्चात् निर्धारण अधिकारी लिखित आदेश द्वारा, निर्धारिती द्वारा संदत्त या संदेय अनुषंगी फायदों के मूल्य का निर्धारण करेगा और ऐसे निर्धारण के आधार पर उसके द्वारा संदेय राशि का या उसको देय किसी रकम के प्रतिदाय का अवधारण करेगा।

(4) जहां धारा 115बच की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ नियमित निर्धारण किया जाता है वहां,–

() निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) के अधीन संदत्त कोर्इ कर या ब्याज ऐसे नियमित निर्धारण के संबंध में संदत्त किया गया समझा जाएगा ;

() यदि नियमित निर्धारण पर कोर्इ प्रतिदाय देय नहीं है या उपधारा (1) के अधीन प्रतिदाय की गर्इ रकम नियमित निर्धारण पर प्रतिदेय रकम से अधिक हो जाती है, तो इस प्रकार प्रतिदाय की गर्इ संपूर्ण या अधिक रकम को निर्धारिती द्वारा संदेय कर समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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