आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115पख

विनिधान निधि और इसके यूनिट धारकों की आय पर कर

धारा

धारा संख्या

115पख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIचख - विनिधान निधियों की आय और ऐसी निधियों से प्राप्त आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

विनिधान निधि और इसके यूनिट धारकों की आय पर कर

विनिधान निधि और इसके यूनिट धारकों की आय पर कर

अध्याय 12चख

विनिधान निधियों की आय और ऐसी निधियों से प्राप्त आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध

विनिधान निधि और इसके यूनिट धारकों की आय पर कर

115पख. (1) इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो किसी विनिधान निधि का यूनिट धारक है, विनिधान निधि में किए गए विनिधानों से प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त कोर्इ आय उसी रीति में आय-कर के लिए प्रभार्य होगी मानो वह ऐसे व्यक्ति को प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त ऐसी आय होती यदि ऐसे विनिधान उसके द्वारा सीधे विनिधान निधि में किए गए हों।

(2) जहां किसी पूर्ववर्ष में विनिधान निधि की कुल आय की संगणना करने का शुद्ध परिणाम [धारा 10 के खंड (23चखक) के उपबंधों को प्रभावी किए बिना] आय के किसी शीर्ष के अधीन हानि है और ऐसी हानि उक्त पूर्ववर्ष की आय का किसी अन्य शीर्ष के अधीन आय से पूर्णतया मुजरा नहीं किया जा सकेगा या पूर्णतया मुजरा नहीं किया जाता है वहां—

(i) ऐसी हानि को अग्रनीत किया गया अनुज्ञात किया जाएगा और यह अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार विनिधान निधि द्वारा मुजरा किया जाएगा; और

(ii) ऐसी हानि की उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए अनदेखी की जाएगी।

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 115पख की उपधारा (2) के विद्यमान खंड (i) तथा (ii) के स्थान पर निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किए जाएंगे:

(i) ऐसी हानियों में से, "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणना के परिणामस्वरूप विनिधान निधि को हुर्इ हानि को, यदि कोर्इ हो,—

() अग्रनीत किए जाने की अनुज्ञा दी जाएगी और अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार उसका मुजरा विनिधान निधि द्वारा किया जाएगा; और

() उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए उसकी अनदेखी की जाएगी;

(ii) खंड (i) में निर्दिष्ट हानि से भिन्न किसी अन्य हानि की, यदि कोर्इ हो, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए अनदेखी की जाएगी, यदि ऐसी हानि किसी ऐसी यूनिट की बाबत उद्भूत हुर्इ है, जिसे यूनिट धारक द्वारा न्यूनतम बारह मास की अवधि के लिए धारित नहीं किया गया है।

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 115पख की उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा (2क) अंत:स्थापित की जाएगी:

(2क) "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हानि से भिन्न किसी हानि को, यदि कोर्इ हो, जो 31 मार्च, 2019 को विनिधान निधि के स्तर पर संचित हुर्इ है,—

(i) उसी रीति में, जो उपधारा (1) में उपबंधित की गर्इ है, यूनिट धारक द्वारा विनिधान निधि में किए गए विनिधानों की बाबत ऐसे यूनिट धारक की हानि के रूप में समझा जाएगा, जो 31 मार्च, 2019 को ऐसी यूनिट को धारण कर रहा था; और

(ii) ऐसे यूनिट धारक को, उस वर्ष से, जिसमें प्रथम बार हानि उद्भूत हुर्इ थी, उस वर्ष को प्रथम वर्ष के रूप में मानते हुए संगणित शेष अवधि के लिए अग्रनीत करने की अनुज्ञा दी जाएगी और हानि का उसके द्वारा अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार मुजरा किया जाएगा:

परंतु उपधारा (1) के अधीन इस प्रकार समझी गर्इ हानि 1 अप्रैल, 2019 को या उसके पश्चात् विनिधान निधि को उपलब्ध नहीं होगी।

(3) विनिधान निधि द्वारा संदत्त या जमा की गर्इ आय उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति के पास उसी प्रकृति की और उसी अनुपात में आय समझी जाएगी मानों वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए पूर्ववर्ष के दौरान विनिधान निधि द्वारा प्राप्त की गर्इ हो या उससे प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ हो।

(4) विनिधान निधि की कुल आय पर-

(i) सुसंगत वर्ष के वित्त अधिनियम में यथा विनिर्दिष्ट दर या दरों पर, जहां ऐसी निधि कोर्इ कंपनी या कोर्इ फर्म है; या

(ii) किसी अन्य मामले में, अधिकतम सीमांत दर पर, कर प्रभारित किया जाएगा।

(5) अध्याय 12घ या अध्याय 12ड़ के उपबंध इस अध्याय के अधीन किसी विनिधान निधि द्वारा संदत्त आय को लागू नहीं होंगे।

(6) विनिधान निधि को पूर्ववर्ष के दौरान प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त आय, यदि वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को संदत्त या उसके पास जमा नहीं की जाती है, उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उक्त व्यक्ति के खाते में पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को उसी अनुपात में, जिसमें ऐसा व्यक्ति आय प्राप्त करने का तब हकदार होता यदि उसका पूर्ववर्ष में संदाय किया गया होता, जमा की गर्इ समझी जाएगी।

(7) किसी विनिधान निधि की ओर से आय को जमा करने या उसका संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति और विनिधान निधि, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, उस व्यक्ति को, जो ऐसी आय के संबंध में कर के लिए दायी है और विहित आय-कर प्राधिकारी को विहित रूप में और ऐसी रीति में सत्यापित एक विवरण प्रस्तुत करेंगे जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान संदत्त या जमा की गर्इ आय की प्रकृति के ब्यौरे और ऐसे अन्य सुसंगत ब्यौरे, जो विहित किए जाएं, होंगे।

स्पष्टीकरण 1.इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—

() "विनिधान निधि" से ऐसे किसी न्यास या कंपनी या सीमित दायित्व भागीदारी या निगमित निकाय के रूप में, जिसे प्रवर्ग 1 या प्रवर्ग 2 आनुकल्पिक विनिधान निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है और जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (आनुकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 के अधीन विनियमित किया जाता है, अभिप्रेत है;

() "न्यास" से भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन स्थापित कोर्इ न्यास अभिप्रेत है;

() "यूनिट" से विनिधान निधि या विनिधान निधि की किसी स्कीम में विनिधानकर्ता का फायदाप्रद हित अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत शेयर या भागीदारी हित भी आएंगे।

स्पष्टीकरण 2.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि ऐसी कोर्इ आय, जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति की कुल आय में, उक्त पूर्ववर्ष में उसको प्रोद्भूत या उद्भूत होने के कारण किसी पूर्ववर्ष में सम्मिलित की गर्इ है, उस पूर्ववर्ष में, जिसमें ऐसी आय का विनिधान निधि द्वारा उसे वस्तुत: संदाय किया गया है, उस व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित नहीं की जाएगी।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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