यूनिट धारक और कारबार न्यास की आय पर कर
अध्याय 12चक
कारबार न्यास से संबंधित विशेष उपबंध
यूनिट धारक और कारबार न्यास की आय पर कर
115पक. (1) इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कारबार न्यास द्वारा अपने यूनिट धारकों को वितरित किसी आय को उसी प्रकृति की और यूनिट धारक के पास की उसी अनुपात में की आय समझी जाएगी मानो वह कारबार न्यास द्वारा प्राप्त की गई हो या उसे उपगत हुई हो।
(2) धारा 111क और धारा 112 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी कारबार न्यास की कुल आय पर कर अधिकतम सीमांत दर से प्रभारित किया जाएगा।
(3) यदि किसी पूर्ववर्ष में, किसी यूनिट धारक द्वारा कारबार न्यास से प्राप्त वितरित आय या उसका कोई भाग, धारा 10 के खंड (23चग) 48ख[के उपखंड (क)] मे या खंड (23चगक) में यथानिर्दिष्ट प्रकृति का है, तो वितरित आय या उसके भाग को उस यूनिट धारक की आय समझा जाएगा और उस पर पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर प्रभारित किया जाएगा।
वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 115 प क की उपधारा (3) के पश्चात् उपधारा (3क) अंतस्थापित कि जाएगी
(3क) उपधारा (1) के उपबंध किसी कारबार न्यास से किसी यूनिट धारक द्वारा प्राप्त की गई ऐसी किसी राशि के संबंध में लागू नहीं होंगे, जिसे धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (xii) में निर्दिष्ट किया गया है ।
(4) किसी कारबार न्यास की ओर से किसी यूनिट धारक को वितरित आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी कोई व्यक्ति, यूनिट धारक और विहित प्राधिकारी को ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप तथा रीति से, जो विहित किए जाएं, उसमें पूर्ववर्ष के दौरान संदत्त आय की प्रकृति के ब्यौरे और ऐसे अन्य ब्यौरे, जो विहित किए जाएं, देते हुए, एक विवरण प्रस्तुत करेगा।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

