न्यास या संस्था को कब व्यतिक्रमी निर्धारिती माना जाएगा
न्यास या संस्था को कब व्यतिक्रमी निर्धारिती माना जाएगा
115नच. (1) यदि कोर्इ प्रधान अधिकारी या न्यास का न्यासी या संस्था और न्यास या संस्था, धारा 115नघ के उपबंधों के अनुसार अनुवर्धित आय पर कर संदत्त नहीं करता या करती है, तो उसे उसके द्वारा संदेय कर की रकम की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा और इस अधिनियम के आय-कर के संग्रहण और उसकी वसूली से संबंधित सभी उपबंध लागू होंगे ।
(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी मामले में, जहां अनुवर्धित आय पर कर धारा 115नघ की उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट परिस्थितियों के अधीन संदेय है, ऐसे व्यक्ति को जिसे इसकी उपधारा (2) के अधीन अनुवर्धित आय की संगणना का भाग बनने वाली कोर्इ आस्ति अंतरित हुर्इ है, ऐसे कर और उस पर ब्याज की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा और आय-कर के संग्रहण और वसूली के लिए इस अधिनियम के सभी उपबंध लागू होंगे :
परंतु इस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति का दायित्व उस परिमाण तक सीमित होगा जिस तक उसके द्वारा प्राप्त आस्ति दायित्व को पूरा करने के लिए सक्षम है ।]
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

