अनुवर्धित आय पर कर
73च[अध्याय 12ड़ख
कतिपय न्यासों और संस्थाओं की अनुवर्धित आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध
अनुवर्धित आय पर कर
115नघ. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोर्इ न्यास या संस्था किसी पूर्ववर्ष में–
(क) किसी ऐसे रूप में संपरिवर्तित हो गर्इ है, जो धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रदान किए जाने के लिए पात्र नहीं है;
(ख) किसी ऐसे अस्तित्व, जो कोर्इ न्यास या संस्था है, से भिन्न किसी अन्य अस्तित्व में विलय हो गर्इ है जिसके उद्देश्य उसके समान हैं और वह धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत है; या
(ग) जो विघटन पर अपनी आस्तियां किसी न्यास या संस्था अथवा धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था को उस मास से, जिसमें विघटन होता है, अंत से बारह मास की अवधि के भीतर, सभी आस्तियां अंतरित करने में असफल रहती हैं,
ऐसे न्यास या संस्था की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, विनिर्दिष्ट तारीख को, यथास्थिति, न्यास या संस्था की अनुवर्धित आय पर कर प्रभार्य किया जाएगा और ऐसा न्यास या संस्था अतिरिक्त आय-कर (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुवर्धित आय पर कर कहा गया है), अनुवर्धित आय पर अधिकतम मार्जिन की दर पर संदाय करने के लिए दायी होगा ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए अनुवर्धित आय से ऐसी रकम अभिप्रेत है, जिसके द्वारा, विनिर्दिष्ट तारीख को न्यास या संस्था की कुल आस्तियों का सकल उचित बाजार मूल्य मूल्यांकन की ऐसी रीति के जो विहित किया जाए, अनुसार संगणित ऐसे न्यास या संस्था के कुल दायित्व से अधिक हो जाता है :
परंतु ऐसी आस्ति से संबंधित इतनी अनुवृद्ध आय को, जो निम्नलिखित आस्ति और दायित्व के कारण है, यदि कोर्इ हो, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा, अर्थात्:–
(i) कोर्इ ऐसी आस्ति, जिसका न्यास या संस्था द्वारा धारा 10 के खंड (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की उसकी आय में से प्रत्यक्षत: अर्जित किया जाना सिद्ध कर दिया गया है;
(ii) न्यास या संस्था द्वारा उसके सृजन या स्थापना की तारीख से आरंभ होकर उस तारीख को, जिससे धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रभावी होता है, समाप्त होने वाली अवधि के दौरान अर्जित ऐसी आस्ति, यदि न्यास या संस्था को उक्त अवधि के दौरान धारा 11 और धारा 12 का कोर्इ फायदा मंजूर नहीं किया गया है:
परंतु यह और कि जहां न्यास या संस्था को उस तारीख से पूर्व, जिससे धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रभावी होता है, प्रांरभ होने वाले किसी पूर्ववर्ष या वर्षों की बाबत धारा 11 और धारा 12 का फायदा धारा 12क की उपधारा (2) के प्रथम परंतुक के कारण मंजूर नहीं किया गया है, वहां प्रथम परंतुक के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्रीकरण को पूर्वतम पूर्ववर्ष के प्रथम दिन से प्रभावी हुआ समझा जाएगा:
परंतु यह भी कि उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी मामले के संबंध में अनुवर्धित आय की संगणना करते समय ऐसी आस्तियों और दायित्वों, यदि कोर्इ हों, जो ऐसी आस्ति से संबंधित है और जिन्हें उक्त खंड में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी अन्य न्यास या संस्था को या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अन्य निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्थान को अंतरित कर दिया गया है, की अनदेखी कर दी जाएगी ।
(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए कोर्इ न्यास या संस्था किसी पूर्ववर्ष में ऐसे रूप में संपरिवर्तित समझे जाएंगे, जो धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र न हों, यदि–
(i) धारा 12कक के अधीन इसे प्रदान किया गया रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया है;
(ii) इसने अपने उद्देश्यों के उपांतरण को अंगीकार किया है या हाथ में लिया है, जो रजिस्ट्रीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं और–
(क) इसने उक्त पूर्ववर्ष में धारा 12कक के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है; या
(ख) धारा 12कक के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पत्र फाइल किया है किंतु वह अस्वीकार कर दिया गया है ।
(4) इस बात के होते हुए भी कि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित उसकी कुल आय पर किसी न्यास या संस्था द्वारा कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन अनुवर्धित आय पर ऐसे न्यास या संस्था द्वारा कर संदेय होगा ।
(5) यथास्थिति, प्रधान अधिकारी, या न्यास का न्यासी या संस्था और न्यास या संस्था भी निम्नलिखित तारीख से चौदह दिनों के भीतर अनुवर्धित आय पर कर का संदाय केंद्रीय सरकार के पास जमा करने के लिए दायी होंगे,
(i) उस तारीख को जिसको,–
(क) रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील फाइल करने की अवधि समाप्त हो जाती है और न्यास या संस्था द्वारा कोर्इ अपील फार्इल नहीं की गर्इ है; या
(ख) किसी अपील में रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश न्यास या संस्था द्वारा प्राप्त किया जाता है,
उपधारा (3) के खंड (i) में निर्दिष्ट मामले में;
(ii) पूर्ववर्ष के अंत पर, उपधारा (3) के खंड (ii) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट मामले में;
(iii) उस तारीख को, जिसको,–
(क) आवेदन को नामंजूर करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील करने की अवधि समाप्त हो जाती है और न्यास या संस्था द्वारा कोर्इ अपील फाइल नहीं की गर्इ है; या
(ख) किसी अपील में आवेदन के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश न्यास या संस्था द्वारा प्राप्त किया जाता है,
उपधारा (3) के खंड (ii) के उपखंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में;
(iv) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में विलयन की तारीख से;
(v) उस तारीख को जब उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट बारह मास की अवधि समाप्त हो ।
(6) किसी न्यास या संस्था द्वारा अनुवर्धित आय पर कर उक्त आय की बाबत कर का अंतिम रूप से संदाय समझा जाएगा और न्यास या संस्था या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस संबंध में किसी और प्रत्यय का दावा इस प्रकार संदत्त कर की रकम की बाबत नहीं किया जाएगा ।
(7) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन न्यास या संस्था या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी आय की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर प्रभारित किया गया हो या उस पर कर लगाया गया हो ।
स्पष्टीकरण– इस धारा के प्रयोजनों के लिए,
(i) "संपरिवर्तन की तारीख" से अभिप्रेत है–
(क) उपधारा (3) के खंड (i) में निर्दिष्ट मामले में धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण रद्द करने वाले आदेश की तारीख; या
(ख) उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट मामले में किसी उद्देश्य को अंगीकार करने या उपांतरित करने की तारीख;
(ii) "निर्दिष्ट तारीख" से अभिप्रेत है–
(क) उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन आने वाले किसी मामले में संपरिवर्तन की तारीख;
(ख) उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन आने वाले किसी मामले में विलयन की तारीख; और
(ग) उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन आने वाले किसी मामले में विघटन की तारीख ।
(iii) धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण में, धारा 12क के अधीन प्राप्त कोर्इ रजिस्ट्रीकरण, जैसा कि वह वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 (1996 का 33) द्वारा इसके संशोधन के पूर्व विद्यमान था, सम्मिलित होगा।
73च. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से अध्याय 12ड़ख, जिसमें धारा 115नघ से धारा 115नच हैं, अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

