प्रतिभूतिकरण न्यासों से आय पर कर
73गक[प्रतिभूतिकरण न्यासों से आय पर कर
115नगक. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति, जो किसी प्रतिभूतिकरण का कोर्इ विनिधानकर्ता है, को, प्रतिभूतिकरण में किए गए विनिधान से प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त कोर्इ आय, उसी रीति में आय-कर से प्रभार्य होगी मानो वह ऐसे व्यक्ति को प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त आय हो, यदि प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा विनिधान उसके द्वारा प्रत्यक्षत: किए गए हों ।
(2) प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा संदत्त या जमा की गर्इ आय उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति के हाथ में उसी प्रकृति और उसी अनुपात में समझी जाएगी मानो वह पूर्ववर्ष के दौरान प्रतिभूतिकरण द्वारा प्राप्त की गर्इ हो या उसको प्रोद्भूत अथवा उद्भूत हुर्इ हो ।
(3) किसी पूर्ववर्ष के दौरान प्रतिभूतिकरण न्यास को प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली या उसके द्वारा प्राप्त की जाने वाली आय, यदि वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को संदत्त या जमा न की गर्इ हो, पूर्ववर्ष के अंतिम दिन पर उक्त व्यक्ति के खाते में उसी अनुपात में जमा समझी जाएगी जिसमें ऐसा व्यक्ति आय प्राप्त करने के लिए हकदार होता यदि उसे पूर्ववर्ष में संदत्त किया गया होता ।
(4) प्रतिभूतिकरण न्यास की ओर से आय को जमा करने या संदाय करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसी आय के संबंध में कर के लिए दायी है और विहित आय-कर प्राधिकारी को ऐसे रूप में तथा ऐसी रीति में सत्यापित एक विवरण, जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान संदत्त या जमा आय के ब्यौरे और ऐसे अन्य सुसंगत ब्यौरे, जो विहित किए जाएं, दिए जाएंगे, प्रस्तुत करेगा ।
(5) उक्त पूर्ववर्ष के दौरान प्रोद्भूत या उद्भूत होने के कारण कोर्इ आय, जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति की आय में सम्मिलित किया गया है, ऐसे व्यक्ति की उस पूर्ववर्ष में कुल आय में सम्मिलित नहीं की जाएगी जिसमें ऐसी आय प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा वस्तुत: उसे संदत्त की गर्इ हो ।]
स्पष्टीकरण-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,-
(क) ''विनिधानकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा जारी की गर्इ किसी प्रतिभूतिकृत ऋण लिखत या प्रतिभूतियों 73घ[या प्रतिभूति प्राप्ति] का धारक है;
(ख) "प्रतिभूतियां" से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मानक आस्तियों के प्रतिभूतिकरण संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों में यथा निर्दिष्ट किसी विशेष प्रयोज्य माध्यम द्वारा जारी की गर्इ ऋण प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं;
(ग) "प्रतिभूतिकृत ऋण लिखत" का वही अर्थ होगा जो उसका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (लोक प्रस्थापना और प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतों का सूचीबद्धकरण) विनियम, 2008 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (ध) में उसका है;
(घ) "प्रतिभूतिकरण न्यास" से ऐसा कोर्इ न्यास अभिप्रेत है जो-
(i) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (लोक प्रस्थापना और प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतों का सूचीबद्धकरण) विनियम, 2008 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (प) में यथा परिभाषित "विशेष प्रयोज्य सुभिन्न सत्ता" है और उक्त विनियमों के अधीन विनियमित किया जाता है; या
(ii) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मानक आस्तियों के प्रतिभूतिकरण संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों में यथा परिभाषित "विशेष प्रयोज्य माध्यम" है और विनियमित किया जाता है, 73ड़[या]
73ड़[(iii) वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (2002 का 54) के प्रयोजनों के लिए बनार्इ गर्इ प्रतिभूतिकरण कंपनियों और पुनर्गठन कंपनियों द्वारा स्थापित न्यास या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उस प्रयोजन के लिए जारी मार्गदर्शक सिद्धांत या निदेशों के अनुसरण में है,]
ऐसी शर्तें पूरी करता है, जो विहित की जाएं।]
73ड़[(ड़) "प्रतिभूति प्राप्ति" का वही अर्थ होगा जो उसका वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (यछ) में है।]

