प्रतिभूतिकरण न्यास का व्यतिक्रमी निर्धारिती होना
प्रतिभूतिकरण न्यास का व्यतिक्रमी निर्धारिती होना
115नग. यदि प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा वितरित आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी कोर्इ व्यक्ति और प्रतिभूतिकरण न्यास धारा 115नक की उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट कर का संदाय नहीं करता है तो वह उसके द्वारा संदेय कर की रकम की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा और इस अधिनियम के आय-कर के संग्रहण और वसूली से संबंधित सभी उपबंध लागू होंगे।
स्पष्टीकरण–इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "विनिधानकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा जारी की गर्इ किसी प्रतिभूतिकृत ऋण लिखत या प्रतिभूतियों का धारक है;
(ख) "प्रतिभूतियां" से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मानक आस्तियों के प्रतिभूतिकरण संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों में यथा निर्दिष्ट किसी विशेष प्रयोज्य माध्यम द्वारा जारी की गर्इ ऋण प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं;
(ग) "प्रतिभूतिकृत ऋण लिखत" का वही अर्थ होगा जो उसका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (लोक प्रस्थापना और प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतों का सूचीबद्धकरण) विनियम, 2008 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (ध) में उसका है;
(घ) "प्रतिभूतिकरण न्यास" से ऐसा कोर्इ न्यास अभिप्रेत है जो–
(i) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (लोक प्रस्थापना और प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतों का सूचीबद्धकरण) विनियम, 2008 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (प) में यथा परिभाषित "विशेष प्रयोज्य सुभिन्न सत्ता" है और उक्त विनियमों के अधीन विनियमित किया जाता है; या
(ii) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मानक आस्तियों के प्रतिभूतिकरण संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों में यथा परिभाषित "विशेष प्रयोज्य माध्यम" है और विनियमित किया जाता है,
ऐसी शर्तें पूरी करता है, जो विहित की जाएं।]
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

