शेयर धारकों को वितरित आय पर कर
55क[अध्याय 12घक
शेयरों के क्रय द्वारा वापस लिए जाने के लिए देशी कंपनी की वितरित आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध
शेयर धारकों को वितरित आय पर कर
115थक.(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त कंपनी द्वारा किसी शेयरधारक से शेयरों (जो किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शेयर नहीं हैं) के क्रय द्वारा वापस लिए जाने पर वितरित आय की किसी रकम पर कर प्रभारित किया जाएगा और ऐसी कंपनी वितरित आय पर बीस प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर संदत्त करने के लिए दायी होगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "क्रय द्वारा वापस लिया जाना" से कंपनी द्वारा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 77क के उपबंधों के अनुसार अपने स्वयं के शेयरों का क्रय किया जाना अभिप्रेत है;
(ii) "वितरित आय" से कंपनी द्वारा शेयरों के क्रय द्वारा वापस लिए जाने पर संदत्त प्रतिफल, जिसमें से कंपनी द्वारा ऐसे शेयरों के निर्गमन के लिए प्राप्त रकम को घटा दिया गया हो, अभिप्रेत है।
(2) इस बात के होते हुए भी कि देशी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन वितरित आय पर कर ऐसी कंपनी द्वारा संदेय होगा।
(3) देशी कंपनी का प्रधान अधिकारी और कंपनी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट शेयरों के क्रय द्वारा वापस लिए जाने पर शेयरधारक को किसी प्रतिफल का संदाय किए जाने की तारीख से चौदह दिन के भीतर केंद्रीय सरकार के जमा खाते में कर का संदाय करने के लिए दायी होगी।
(4) कंपनी द्वारा वितरित आय पर कर, उक्त आय की बाबत कर का अंतिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त कर की रकम की बाबत कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसके लिए किसी अतिरिक्त प्रत्यय का दावा नहीं किया जाएगा।
(5) ऐसी आय की बाबत, जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर या उस पर कर प्रभारित किया गया है, कंपनी या किसी शेयर धारक को इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
55क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से अध्याय 12घक, जिसमें धारा 115थक से धारा 115थग हैं, अंत:स्थापित।

