घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर
69[अध्याय 12घ
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर संबंधी विशेष उपबंध
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर
115ण. 70-71[(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् लाभांशों के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा), चाहे वे चालू लाभ या संचित लाभ हों, घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर साढ़े बारह प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर (जिसे इसमें इसके पश्चात् वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित किया जाएगा।]
(2) इस बात के होते हुए भी कि देशी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन वितरित लाभों पर कर ऐसी कंपनी द्वारा संदेय होगा।
(3) देशी कंपनी का प्रधान अधिकारी और कंपनी, केन्द्रीय सरकार के जमाखाते वितरित लाभों पर कर–
(क) किसी लाभांश की घोषणा; या
(ख) किसी लाभांश के वितरण; या
(ग) किसी लाभांश के संदाय;
की तारीख से, इनमें से जो भी पहले हो, चौदह दिन के भीतर देने के लिए दायी होगी।
(4) कंपनी द्वारा इस प्रकार संदत्त वितरित लाभों पर कर लाभांश के रूप में घोषित, वितरित या संदत्त रकम की बाबत कर का अंतिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त रकम की बाबत कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसका कोर्इ और क्रेडिट नहीं मांगा जाएगा।
(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती उस रकम की बाबत जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर या उस पर कर प्रभारित किया गया है, कंपनी या शेयरधारक को अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
72[(6) इस धारा में की किसी बात के होते हुए भी विकासकर्ता या उद्यम की या 72क[धारा 10 के खंड (23छ) के अंतर्गत न आने वाले] ऐसे लाभांश को प्राप्त करने वाले व्यक्ति की वर्तमान आय में से 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् लाभांश के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा) ऐसे विकासकर्ता या उद्यम द्वारा घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी विशेष आर्थिक जोन के विकास, या विकास तथा प्रचालन या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण में लगे किसी उपक्रम या उद्यम की कुल आय की बाबत वितरित लाभ पर कोर्इ कर प्रभार्य नहीं होगा।]
69. अध्याय 12घ, जिसमें धारा 115ण से 115थ हैं, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से अंत:स्थापित किया गया।
70-71. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपधारा (1), जिसका वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2002 से, वित्त अधिनियम 2001 द्वारा 1.6.2001 से और वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से संशोधन किया गया था, इस प्रकार थी :
"(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 जून, 1997 को या उसके पश्चात् [किन्तु 31 मार्च, 2002 को या उससे पूर्व] चाहे वर्तमान या संचित लाभों में से, लाभांशों के रूप में (अंतरिम या अन्यथा) घोषित, वितरित या संदत्त कोर्इ रकम दस प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर से (जिसे इसमें आगे वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित की जाएगी।"
72. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा 10.2.2006 से अंत:स्थापित।
72क. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "धारा 10 के खंड (23छ) के अंतर्गत न आने वाले" शब्दों का लोप किया जाएगा।
[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

