घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर
85[अध्याय 12-घ
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर संबंधी विशेष उपबंध
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर
115ण. (1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 जून, 1997 को या उसके पश्चात् 85क[किन्तु 31 मार्च, 2002 को या उससे पूर्व] चाहे वर्तमान या संचित लाभों में से, लाभांशों के रूप में (अंतरिम या अन्यथा) घोषित, वितरित या संदत्त कोर्इ रकम 86[दस] प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर से (जिसे इसमें आगे वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित की जाएगी।
(2) इस बात के होते हुए भी कि देशी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन वितरित लाभों पर कर ऐसी कंपनी द्वारा संदेय होगा।
(3) देशी कंपनी का प्रधान अधिकारी और कंपनी, केन्द्रीय सरकार के जमाखाते वितरित लाभों पर कर–
(क) किसी लाभांश की घोषणा; या
(ख) किसी लाभांश के वितरण; या
(ग) किसी लाभांश के संदाय;
की तारीख से, इनमें से जो भी पहले हो, चौदह दिन के भीतर देने के लिए दायी होगी।
(4) कंपनी द्वारा इस प्रकार संदत्त वितरित लाभों पर कर लाभांश के रूप में घोषित, वितरित या संदत्त रकम की बाबत कर का अंतिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त रकम की बाबत कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसका कोर्इ और क्रेडिट नहीं मांगा जाएगा।
(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती उस रकम की बाबत जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर या उस पर कर प्रभारित किया गया है, कंपनी या शेयरधारक को अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
85. अध्याय 12घ, जिसमें धारा 115ण से 115थ हैं, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से अंत:स्थापित किया गया।
85क. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से इटैलिक में दिए गए शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे।
86. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से "बीस" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से 'दस' के स्थान पर 'बीस' रखा गया था।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

