कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध
वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से धारा 15 ञकक के पश्चात् निम्नलिखित धारा 115ञ ख अन्त:स्थापित की जाएगी :
कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध
115ञ ख. (1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहां किसी निर्धारिती की दशा में जो कंपनी है 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की बाबत इस अधिनियम के अधीन संगणित कुल आय पर संदेय आय-कर उसके बही लाभ के साढ़े सात प्रतिशत से कम है, वहां सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए संदेय कर ऐसे बही लाभ साढे सात प्रतिशत समझा जाएगा।
(2) प्रत्येक निर्धारिती जो एक कंपनी है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की छठी अनुसूची के भाग-2 और 378 के उपबंधों के अनुसार पूर्ववर्ष के लिए अपना लाभ और हानि लेखा तैयार करेगा :
परन्तु लाभ और हानि लेखा सहित वार्षिक लेखा तैयार करते समय,
(i) लेखाकर्म नीतियां;
(ii) लाभ और हानि लेखा तैयार करने के लिए अपनाए जाने वाले लेखा मानक;
(iii) अवक्षयण की संगणना के लिए अपनार्इ गर्इ पद्धति और दरें, वही होंगी जिन्हें कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 210 के उपबंधों के अनुसार ऐसे लेखे, जिनके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है, तैयार करने के प्रयोजनों के लिए अंगीकार किया गया है, और उन्हें कंपनी के समक्ष उसके वार्षिक अधिवेशन में रखा जाएगा :
परन्तु यह और कि जहां किसी कंपनी ने कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन वित्तीय वर्ष को अंगीकार किया है या वह अंगीकार करती है जो इस अधिनियम के अधीन पूर्ववर्ष से भिन्न है, वहां–
(i) लेखाकर्म नीतियां;
(ii) ऐसे लेखा, जिसके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है लेखा तैयार करने के लिए अपनाए गए लेखा-मानक;
(iii) अवक्षयण के परिकलन के लिए अपनार्इ गर्इ रीति और दरें,
उन लेखाकर्म नीतियों, लेखाकर्म मानकों और अवक्षयण के परिकलन की रीति और दरों के अनुरूप होंगी, जिन्हें सुसंगत पूर्ववर्ष के अंतर्गत आने वाले ऐसे वित्तीय वर्ष या वित्तीय वर्ष के भाग के लिए ऐसे लेखे, जिसके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है; तैयार करने के लिए अंगीकार किया गया है।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "बही लाभ" से अभिप्रेत है, उपधारा (2) के अधीन तैयार किए गए सुसंगत पूर्ववर्ष के लिये लाभ-हानि लेखा में दिखाया गया शुद्ध, लाभ जिसमें निम्नलिखित जोड़ दिए गए हैं–
(क) संदत्त या संदेय आय-कर की रकम और उसके लिए व्यवस्था; या
(ख) किन्हीं आरक्षितियों में ले जार्इ गर्इ रकमें, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों; या
(ग) अभिनिश्चित दायित्वों से भिन्न दायित्वों को चुकाने के लिए व्यवस्था के रूप में अलग रखी गर्इ रकम या रकमें; या
(घ) समनुषंगी कंपनियों की हानियों के लिए व्यवस्था के रूप में रकम; या
(ड़) संदत्त या प्रस्तावित लाभांश की रकम या रकमें; या
(च) किसी ऐसी आय से, जिसको धारा 10 या धारा 10क या धारा 10ख या धारा 11 लागू होती हों, संबंधित व्यय की रकम या रकमें; या
यदि खंड (क) से खंड (च) में निर्दिष्ट रकम लाभ-हानि लेखा में विकलित की जाती है, और उनमें निम्नलिखित घटा दिए गए हैं,--
(i) किसी आरक्षिती या व्यवस्था में से वापस की गर्इ रकम, यदि ऐसी कोर्इ रकम लाभ-हानि लेखे में जमा की जाती है :
परन्तु जहां यह धारा किसी पूर्ववर्ष में (जिसके अंतर्गत सुसंगत पूर्ववर्ष है) किसी निर्धारिती को लागू होती है वहां 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में सृजित आरक्षितियों में से या की गर्इ व्यवस्थाओं में से वापस ली गर्इ रकम को बही लाभ में से तभी कम की जाएगी जब उन आरक्षितियों या व्यवस्थाओं को (जिनमें से उक्त रकम निकाली की गर्इ थी) इस स्पष्टीकरण के अधीन ऐसे वर्ष के बही लाभ जोड़ा गया हो; या
(ii) ऐसी आय की रकम, जिसको धारा 10 या धारा 10क या धारा 10ख या धारा 11 या धारा 12 के कोर्इ उपबंध लागू होते हैं, यदि ऐसी रकम लाभ हानि लेखे में जमा की जाती है; या
(iii) हानि की रकम जो अग्रनीत की जाती है या बहियों के अनुसार शेष अवक्षयण, इनमें से जो भी कम हो;
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए हानि में अवक्षयण सम्मिलित नहीं होगा; या
(iv) धारा 80जजग के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की रकम, जो उस धारा की, यथास्थिति, उपधारा (3) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या उपधारा (3क) के अधीन संगणित की गर्इ है, और उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या
(v) धारा 80जजड़ के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की उस धारा की, यथास्थिति, उपधारा (3) या उपधारा (3क) के अधीन संगणित रकम, जो उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या
(vi) धारा 80 जजच के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की उस धारा की उपधारा (3) के अधीन संगणित रकम, जो उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या
(vii) रुग्ण औद्योगिक कंपनी के, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उक्त कंपनी, रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 1779 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी हो गर्इ है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ही आरंभ होने वाले और उस निर्धारण वर्ष को, जिसके दौरान ऐसी कंपनी का समस्त शुद्ध मूल्य संचित हानियों के बराबर या उनसे अधिक हो जाता है, समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए लाभ की रकम।
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए "शुद्ध मूल्य" का वही अर्थ है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक)80 में है।
(3) उपधारा (1) की कोर्इ बात किसी सुसंगत पूर्ववर्ष के संबंध में पश्चात्वर्ती वर्ष या वर्षों को धारा 32 की उपधारा (2) या धारा 32क की उपधारा (3) या धारा 72 की उपधारा (1) के खंड (ii) या धारा 73 या धारा 74 या धारा 74क की उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन अग्रनीत की जाने वाली रकमों के अवधारण पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(4) ऐसी प्रत्येक कंपनी, जिसे यह धारा लागू होती है, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखाकार की विहित प्ररूप80क में एक रिपोर्ट, यह प्रमाणित करते हुए कि बही लाभ इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगणित किया गया है, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गर्इ आय की विवरणी के साथ या धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन सूचना के उत्तर में प्रस्तुत की गर्इ आय की विवरणी के साथ प्रस्तुत करेगी।
(5) इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध इस धारा में उल्लिखित ऐसे प्रत्येक निर्धारिती को जो कंपनी है, लागू होंगे।
78. कंपनी अधिनियम, 1956 की छठी अनुसूची के भाग 2 और 3 के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट एक।
79. रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 17 के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट एक।
80. रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 3(1) के खंड (छक) में "शुद्ध मूल्य" की परिभाषा दी गर्इ है। धारा 3(1)(छक) के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट एक।
80क. देखिये नियम 40ख और प्ररूप सं. 29ख।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

