कुछ कंपनियों से संबंधित समझा आय पर भुगतान कर के संबंध में टैक्स क्रेडिट
53[कुछ कंपनियों से सम्बद्ध समझी गर्इ आय पर संदत्त कर की बाबत कर क्रेडिट
115ञकक. (1) जहां निर्धारिती द्वारा, जो कोर्इ कंपनी हो, धारा 115ञक की उपधारा (1) के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए कोर्इ कर राशि संदत्त की जाती है वहां इस प्रकार संदत्त कर की बाबत क्रेडिट उसे इस धारा के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञात किया जाएगा।
53क[ (1क) जहां निर्धारिती द्वारा, जो कोर्इ कंपनी है, धारा 115ञ ख की उपधारा (1) के अधीन कर की कोर्इ रकम, 1 अप्रैल, 2006 को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष और किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए संदत्त की जाती है, वहां इस प्रकार संदत्त कर की बाबत क्रेडिट उसे इस धारा के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञात किया जाएगा।]
(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात किया जाने वाला कर क्रेडिट 53क[यथास्थिति] धारा 115ञक की उपधारा (1) के अधीन 53क[या धारा 115ञ ख की उपधारा (1) के अधीन] किसी निर्धारण वर्ष के लिए संदत्त कर और इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर निर्धारिती द्वारा संदेय कर राशि में अन्तर होगा :
परन्तु इस उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कर क्रेडिट पर कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन अवधारित कर क्रेडिट की राशि उपधारा (4) और उपधारा (5) के अनुसार अग्रनीत और मुजरा की जाएगी किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष से जिसमें कर क्रेडिट उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञेय हो जाता है, ठीक उत्तरवर्ती 5वें निर्धारण वर्ष से आगे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।
वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से धारा 115ञकक की विद्यमान उपधारा (2) और (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा (2) से (3क) प्रतिस्थापित की जाएगी :
(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात किया जाने वाला कर क्रेडिट, धारा 115ञक की उपधारा (1) के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए संदत्त कर और निर्धारिती की इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसार संगणित कुल आय पर उसके द्वारा संदेय कर की रकम का अंतर होगा :
परंतु उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कर क्रेडिट पर कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा।
(2क) उपधारा (1क) के अधीन अनुज्ञात किया जाने वाला कर क्रेडिट धारा 115ञख की उपधारा (1) के अधीन किसी निर्धारण के लिए संदत्त कर और निर्धारिती की इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसार संगणित कुल आय पर उसके द्वारा संदेय कर की रकम का अंतर होगा :
परंतु उपधारा (1क) के अधीन अनुज्ञात कर क्रेडिट पर कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन अवधारित कर क्रेडिट की राशि उपधारा (4) और उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा की जाएगी, किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष से, जिसमें कर क्रेडिट उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञेय हो जाता है, ठीक उत्तरवर्ती पांचवें निर्धारण वर्ष के आगे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।
(3क) उपधारा (2क) के अधीन अवधारित कर क्रेडिट की राशि उपधारा (4) और उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा की जाएगी, किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष से, जिसमें कर क्रेडिट उपधारा (1क) के अधीन अनुज्ञेय हो जाता है, ठीक उत्तरवर्ती सातवें निर्धारण वर्ष के पश्चात् अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।
(4) कर क्रेडिट उस वर्ष मुजरा होने दिया जाएगा जब कर, 54[यथास्थिति], धारा 115ञक 54[या धारा 115ञ ख] से भिन्न इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित कुल आय पर संदेय हो जाए।]
(5) अग्रनीत कर क्रेडिट की बाबत मुजरा किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए उसकी कुल आय पर कर और उस कर में अंतर की सीमा तक अनुज्ञात किया जाएगा, जो 54[यथास्थिति] धारा 115ञक 54[या धारा 115ञ ख] की उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन उस निर्धारण वर्ष के लिए संदेय हो गया होता।
(6) जहां धारा 143 की उपधारा (1) या उपधारा (3), धारा 144, धारा 147, धारा 154, धारा 155, धारा 245घ की उपधारा (4), धारा 250, धारा 254, धारा 260, धारा 262, धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश के परिणामस्वरूप इस अधिनियम के अधीन संदेय कर राशि यथास्थिति, घटार्इ या बढ़ार्इ जाती है वहां इस धारा के अधीन अनुज्ञात कर क्रेडिट की राशि भी तदनुसार घटा-बढ़ा दी जाएगी।]
53. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
53क. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
54. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

