आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115ज

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

धारा

धारा संख्या

115ज

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIक - गैर निवासियों के कुछ आय के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2002

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

115ज. जहां कोर्इ व्यक्ति जो किसी पूर्ववर्ष में अनिवासी भारतीय है, किसी पश्चात्वर्ती वर्ष की कुल आय की बाबत भारत में निवासी के रूप में निर्धारणीय हो जाता है, वहां जिस निर्धारण वर्ष के लिए वह इस प्रकार निर्धारणीय है उस वर्ष के लिए धारा 139 के अधीन अपनी आय की विवरणी के साथ वह 50[निर्धारण] अधिकारी को इस प्रभाव की लिखित घोषणा दे सकेगा कि इस अध्याय के उपबंध उसको किसी विदेशी मुद्रा आस्ति से, जो धारा 115ग के खंड () के उपखंड (ii) या उपखंड (iii) या उपखंड (iv) या उपखंड (v) में निर्दिष्ट प्रकृति की आस्ति है, व्युत्पन्न विनिधान आय के संबंध में लागू बने रहेंगे; और यदि ऐसा करता है तो इस अध्याय के उपबंध उस निर्धारण वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष की ऐसी आय के संबंध में उसको तब तक लागू बने रहेंगे जब तक कि ऐसी आस्तियों का अंतरण या धन में (अंतरण में अन्यथा) संपरिवर्तन नहीं हो जाता है।

 

50. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

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