आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115च

विदेशी मुद्रा आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कुछ दशाओं में प्रभारित न होना

धारा

धारा संख्या

115च

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIक - गैर निवासियों के कुछ आय के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

विदेशी मुद्रा आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कुछ दशाओं में प्रभारित न होना

विदेशी मुद्रा आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कुछ दशाओं में प्रभारित न होना

विदेशी मुद्रा आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कुछ दशाओं में प्रभारित न होना

115च. (1) जहां ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो अनिवासी भारतीय है, किसी विदेशी मुद्रा आस्ति के अंतरण से कोर्इ दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ उद्भूत होता है (इस प्रकार अंतरित आस्ति को इस धारा में इसके पश्चात् मूल आस्ति कहा गया है) और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण की तारीख के पश्चात् छह माह की अवधि के भीतर सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग का किसी विनिर्दिष्ट आस्ति में या धारा 10 के 46[* * *] खंड (4) में निर्दिष्ट किन्हीं बचत-पत्रों में विनिधान 47[* * *] किया है (ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति 48[* * *] या ऐसे बचत पत्र को इस धारा में इसके पश्चात् नर्इ आस्ति कहा गया है) वहां पूंजी अभिलाभ के संबंध में इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी, अर्थात् :–

() यदि नर्इ आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम नहीं है तो ऐसे सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ को धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;

() यदि नर्इ आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम है तो पूंजी अभिलाभ के उतने भाग को जिसका संपूर्ण पूंजी अभिलाभ से वही अनुपात है जो नर्इ आस्ति के अर्जन की लागत का शुद्ध प्रतिफल से है, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) किसी नर्इ आस्ति के संबंध में जो 49[* * *] धारा 115ग के खंड () के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट या उपखंड (v) में विनिर्दिष्ट निक्षेप है, "लागत" से अभिप्रेत है, ऐसे निक्षेप की रकम;

(ii) मूल आस्ति के अंतरण के संबंध में "शुद्ध प्रतिफल" से अभिप्रेत है, ऐसी आस्ति के अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल का पूर्ण मूल्य जिसमें से अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: उपगत खर्चे घटा दिए गए हैं।

(2) जहां नर्इ आस्ति उसका अर्जन किए जाने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर अंतरित की जाती है या धन में (अंतरण से अन्यथा) संपरिवर्तित की जाती है वहां मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत होने वाले पूंजी अभिलाभ की रकम को, जो उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड () या खंड () में दी गर्इ ऐसी नर्इ आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें नर्इ आस्ति अंतरित की जाती है या धन में (अंतरण से अन्यथा) संपरिवर्तित की जाती है, अल्पकालिक पूंजी आस्तियों से भिन्न पूंजी आस्तियों के संबंध में "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाएगा।

 

46. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से "खंड (4क) में निर्दिष्ट खाते में या" शब्दों का लोप किया गया।

47. यथोक्त द्वारा "या निक्षेप" शब्दों का लोप किया गया।

48. यथोक्त द्वारा "या उपरोक्त खाते में ऐसे निक्षेप" शब्दों का लोप किया गया।

49. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से, "धारा 10 के खंड (4क) में या" शब्दों का लोप किया गया।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

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