परिभाषाएं
अध्याय 12क
अनिवासियों की कुछ आय के संबंध में विशेष उपबंध
परिभाषाएं
115ग. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो,–
(क) ''संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा'' से अभिप्रेत है ऐसी विदेशी मुद्रा जो तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा मानी जाती है;
(ख) ''विदेशी मुद्रा आस्ति'' से वह विनिर्दिष्ट आस्ति अभिप्रेत है जो निर्धारिती ने संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा से अर्जित या क्रय की है या विदेशी मुद्रा में उसका अभिदाय किया है;
(ग) ''विनिधान आय'' से विदेशी मुद्रा आस्ति से 17क[***] प्राप्त आय अभिप्रेत है;
(घ) ''दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ'' से ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय अभिप्रेत है जो ऐसी पूंजी आस्ति से संबंधित है जो विदेशी मुद्रा आस्ति है किंतु अल्पकालिक पूंजी आस्ति नहीं है;
(ड़) ''अनिवासी भारतीय'' से अभिप्रेत है कोई व्यष्टि जो भारत का ऐसा नागरिक या भारतीय उद्भव का ऐसा व्यक्ति है जो ''निवासी'' नहीं है।
स्पष्टीकरण.–कोई व्यक्ति भारतीय उद्भव का समझा जाएगा, यदि वह, या उसके माता-पिता या पितामह-पितामही, मातामह-मातामही, में से कोई, अविभाज्य भारत में जन्मा था;
(च) ''विनिर्दिष्ट आस्ति'' से निम्नलिखित आस्तियों में से कोई आस्ति अभिप्रेत है, अर्थात्:–
(i) किसी भारतीय कंपनी के शेयर;
(ii) भारतीय कंपनी द्वारा, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा- परिभाषित प्राइवेट कंपनी नहीं है, निकाले गए डिबेंचर;
(iii) किसी भारतीय कंपनी में, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा- परिभाषित प्राइवेट कंपनी नहीं है, किए गए निक्षेप;
(iv) लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 2 के खंड (2) में यथा- परिभाषित केन्द्रीय सरकार की कोई प्रतिभूति;
(v) कोई अन्य ऐसी आस्तियां जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]
17क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

