कतिपय संस्थाओं की विनिर्दिष्ट आय
कतिपय संस्थाओं की विनिर्दिष्ट आय।
115खखझ. (1) जहां किसी निर्धारिती, जो धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था किसी या उपखंड (v) में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था या धारा 11 में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था के निमित्त कोई आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति है, की आय में किसी इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट आय के माध्यम से कोई आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर-
(i) विनिर्दिष्ट आय के योग पर तीस प्रतिशत की दर से संगणित आय-कर की रकम; और
(ii) आय-कर की रकम, जिसे निर्धारिती प्रभार्य होता, यदि निर्धारिती की कुल आय को खंड (i) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट आय के योग से घटा दिया जाता,
का योग होगा।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हए भी, किसी व्यय या मोक या किसी हानि के मुजरा के संबंध में कोई कटौती निर्धारिती को उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट आय की संगणना करने में अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनो के लिए, "विनिर्दिष्ट आय" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(क) आय के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक संचयित या अलग रखी गई आय, जहां ऐसा संचयन अधिनियम के हिन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों के अधीन अनुज्ञात नहीं किया जाता है; या
(ख) धारा 10 के खंड (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 4 या धारा 11 की उपधारा (1ख) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट समझी गई आय; या
(ग) कोई आय, जो धारा 10 के खंड (23ग) के तीसरे परंतुक के खंड (ख) के उपबंधों के अतिक्रमण के कारण धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन छूट प्राप्त नहीं है या धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (घ) के उपबंधों के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं की जाने वाली कोई आय है; या
(घ) कोई आय, जिसे धारा 10 के खंड (23ग) के इक्कीसवें परंतुक के अधीन आय समझा जाता है या जिसे धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं किया जाता है; या
(ड़) कोई आय, जो धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं है।
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

